JPSC घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा! अभय तिवारी के ससुर हिरासत में, करोड़ों की संपत्तियों पर CID की नजर
गिरिडीह में शिक्षक ससुर से पूछताछ, अस्पताल, फ्लैट और जमीन की जांच तेज; OMR शीट की होगी फॉरेंसिक जांच

रांची: 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने अब अपनी जांच का दायरा और व्यापक कर दिया है। गुरुवार को जांच एजेंसी ने गिरिडीह जिले के बेंगाबाद थाना क्षेत्र स्थित हथबोर गांव में छापेमारी कर कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी के ससुर और सरकारी शिक्षक विकास पांडेय को हिरासत में लेकर पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार इस पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिसके बाद CID ने अभय तिवारी के ससुराल पक्ष और उससे जुड़े लोगों की आर्थिक गतिविधियों की भी जांच शुरू कर दी है।
करोड़ों की संपत्ति की पड़ताल में जुटी CID
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि अभय तिवारी और उसके करीबी लोगों के पास करोड़ों रुपये की संपत्ति कैसे बनी। CID की जांच के दायरे में देवघर में निर्माणाधीन अस्पताल, रांची में खरीदी गई जमीन, तीन फ्लैट और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं।अधिकारियों द्वारा इन संपत्तियों के दस्तावेज, निवेश के स्रोत, बैंक लेन-देन और आर्थिक गतिविधियों की गहन जांच की जा रही है। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति या अवैध निवेश के प्रमाण मिलते हैं, तो आगे और बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

फरार हैं अभय तिवारी के दोनों साले
सूत्रों के अनुसार अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद से उसके दोनों साले फरार बताए जा रहे हैं। CID ने दोनों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है, लेकिन अब तक वे एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुए हैं। वहीं, अभय तिवारी की पत्नी, जो सरकारी सेवा में कार्यरत बताई जाती हैं, उनकी भूमिका को लेकर भी जांच जारी है। फिलहाल उनकी गतिविधियों और आर्थिक संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।
CID की नजर में सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार
जांच एजेंसी फिलहाल अभय तिवारी को पूरे कथित परीक्षा सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार मानकर जांच आगे बढ़ा रही है। अब तक हुई गिरफ्तारियों और पूछताछ में सामने आए अधिकांश तार इसी नेटवर्क से जुड़े होने की बात सामने आई है। CID को संदेह है कि JPSC परीक्षा का संचालन करने वाली कंपनी TDPL और कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं, जिनमें अभय तिवारी की भूमिका महत्वपूर्ण रही हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में CID ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है और जांच जारी है।
आर्थिक लेन-देन और निवेश पर विशेष फोकस
जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि कथित परीक्षा सिंडिकेट से जुड़े लोगों ने यदि अवैध तरीके से धन अर्जित किया, तो उसका निवेश किन-किन संपत्तियों और परियोजनाओं में किया गया। CID वित्तीय दस्तावेजों, बैंक खातों, संपत्ति खरीद-बिक्री और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि वित्तीय जांच के आधार पर आने वाले दिनों में कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

OMR शीट की होगी तकनीकी और फॉरेंसिक जांच
इधर, 14वीं JPSC पीटी परीक्षा की जांच को वैज्ञानिक आधार देने के लिए CID ने सफल घोषित अभ्यर्थियों से उनकी OMR शीट की प्रतियां भी मांगी हैं। अभ्यर्थियों को 7 अगस्त तक अपनी OMR शीट जमा करने का समय दिया गया है। सभी प्रतियां मिलने के बाद विशेषज्ञ उनकी तकनीकी समीक्षा करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर OMR शीट को फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजकर भी जांच कराई जाएगी, ताकि किसी प्रकार की छेड़छाड़, टेंपरिंग या तकनीकी अनियमितता के आरोपों की वैज्ञानिक तरीके से पुष्टि की जा सके।

जांच के अगले चरण पर सबकी नजर
CID की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। अब जांच केवल परीक्षा संचालन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि कथित आर्थिक नेटवर्क, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन तक पहुंच चुकी है। यदि जांच में अवैध संपत्ति, मनी ट्रेल या संगठित नेटवर्क के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां तथा बड़ी कार्रवाई हो सकती है।






