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गुमला में नगर परिषद के नाम पर फर्जी प्रतियोगिता का आरोप, K.O. कॉलेज में निजी कोर्स के प्रचार से मचा हंगामा

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आखिर किसने जारी किया नगर परिषद के नाम वाला प्रवेश पत्र?

K.O. College में कार्यक्रम के लिए अनुमति किसने ली?

बच्चों से संबंधित गतिविधि में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी?

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गुमला से अमित राज की विशेष रिपोर्ट: गुमला जिले में नगर परिषद गुमला के नाम का कथित तौर पर इस्तेमाल कर स्कूली बच्चों के लिए प्रतियोगिता आयोजित करने और बाद में निजी संस्था के कोर्स का प्रचार करने का मामला सामने आया है। मामला रविवार, 9 अगस्त 2026 को कार्तिक उरांव कॉलेज (K.O. College), पुगु, गुमला में आयोजित कथित “GK/Drawing ओलंपियाड प्रतियोगिता-2026” से जुड़ा है।

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल यह है कि प्रतियोगिता के लिए जारी किए गए प्रवेश पत्र में नगर परिषद गुमला का नाम इस्तेमाल किया गया, जबकि नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ने स्पष्ट रूप से ऐसे किसी कार्यक्रम के आयोजन से इनकार किया है। मामले के सामने आने के बाद प्रतियोगिता में अपने बच्चों को लेकर पहुंचे अभिभावकों में नाराजगी और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। अभिभावकों का आरोप है कि उन्हें प्रतियोगिता के नाम पर बुलाया गया, लेकिन मौके पर बच्चों की अपेक्षित GK/Drawing प्रतियोगिता आयोजित नहीं की गई और इसके बजाय एक निजी संस्था के पेड कोर्स का प्रचार किया गया।

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एडमिट कार्ड में नगर परिषद के नाम से प्रतियोगिता का दावा
जानकारी के अनुसार गुमला के विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों को एक प्रवेश पत्र उपलब्ध कराया गया था। इसमें “GK / Drawing ओलंपियाड प्रतियोगिता-2026” के आयोजन का उल्लेख था। प्रवेश पत्र में बताया गया था कि इच्छुक विद्यार्थी प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। साथ ही प्रत्येक प्रतिभागी को प्रमाण-पत्र देने और विभिन्न स्तरों पर विजेताओं को पुरस्कार दिए जाने की जानकारी भी दी गई थी। प्रवेश पत्र के मुताबिक प्रतियोगिता का आयोजन 9 अगस्त 2026, रविवार को कार्तिक उरांव कॉलेज (K.O. College), पुगु, गुमला में होना था। प्रवेश पत्र पर एक हेल्पलाइन नंबर भी दिया गया था और अभिभावकों से बच्चों को प्रतियोगिता स्थल तक लेकर आने को कहा गया था।

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प्रतियोगिता स्थल पहुंचने पर बदल गया पूरा मामला?
रविवार को जब अभिभावक अपने बच्चों को लेकर K.O. College पहुंचे, तो उनके अनुसार वहां उन्हें एक हॉल में बैठाया गया। आरोप है कि इसके बाद एक निजी संस्था से जुड़े व्यक्ति द्वारा किसी पेड कोर्स का प्रचार शुरू किया गया। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को जिस GK/Drawing प्रतियोगिता के लिए बुलाया गया था, उसके बजाय उनसे डस्टबिन पेंटिंग जैसी गतिविधि कराई गई। अभिभावकों का आरोप है कि उन्हें किसी प्रतियोगिता का अपेक्षित स्वरूप देखने को नहीं मिला और न ही मौके पर प्रमाण-पत्र दिए गए। इसके बाद अभिभावकों के बीच यह सवाल उठने लगा कि यदि कार्यक्रम वास्तव में नगर परिषद गुमला द्वारा आयोजित किया गया था, तो वहां किसी निजी संस्था द्वारा अपने कोर्स का प्रचार और बिक्री क्यों की जा रही है।

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अभिभावकों ने निजी कोर्स बेचने का लगाया आरोप
मौके पर मौजूद अभिभावकों के मुताबिक, निजी संस्था से जुड़े व्यक्ति ने उन्हें कोर्स लेने के लिए प्रेरित किया और अलग-अलग ऑफर की जानकारी दी। अभिभावकों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कार्यक्रम की वैधता और आयोजक संस्था के संबंध में सवाल उठाए।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि बच्चों को एक सरकारी निकाय के नाम से जारी प्रवेश पत्र के आधार पर कार्यक्रम स्थल पर बुलाया गया था।

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Adiwasi Mahotsav
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नगर परिषद ने कार्यक्रम से किया इनकार
मामले की सच्चाई जानने के लिए संवाददाता ने नगर परिषद गुमला के कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार से दूरभाष पर संपर्क किया। उनके अनुसार, नगर परिषद गुमला की ओर से इस तरह का कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया था। उन्होंने इसे फर्जी कार्यक्रम बताया। यदि नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी का यह बयान सही है, तो यह सवाल गंभीर हो जाता है कि प्रतियोगिता के प्रवेश पत्र पर नगर परिषद का नाम और आयोजन से संबंधित दावा किस आधार पर किया गया।

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हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने पर भी उठे सवाल
प्रवेश पत्र पर दिए गए हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने पर संतोष यादव नामक व्यक्ति से बात होने की जानकारी सामने आई। उन्होंने कथित तौर पर खुद को नगर परिषद में सुपरवाइजर बताया और कार्यक्रम को नगर परिषद गुमला द्वारा आयोजित बताया। जब उनसे नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी से बात कराने को कहा गया, तो कथित तौर पर फोन काट दिया गया। इसके बाद उसी नंबर पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं किए जाने की बात सामने आई।

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स्कूलों की भूमिका पर भी उठे सवाल
मामले में अब स्कूल प्रबंधन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एक स्कूल के प्रभारी प्राचार्य से जब कार्यक्रम के संबंध में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कथित तौर पर बताया कि कार्यक्रम नगर परिषद गुमला की ओर से आयोजित किया जा रहा था। हालांकि, कार्यक्रम से संबंधित आधिकारिक पत्र या दस्तावेज उपलब्ध कराने के सवाल पर उन्होंने उस दिन दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात कही। इसके बाद संवाददाता का नंबर ब्लॉक किए जाने का भी आरोप है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित स्कूल प्रबंधन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल
इस मामले ने सिर्फ कथित फर्जी प्रतियोगिता का सवाल नहीं खड़ा किया है, बल्कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा और संस्थागत सत्यापन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। यदि किसी सरकारी निकाय के नाम पर कोई निजी संस्था बच्चों को किसी दूसरे स्थान पर बुलाती है, तो कार्यक्रम की अनुमति, आयोजक संस्था, जिम्मेदार व्यक्ति और सुरक्षा व्यवस्था का सत्यापन किस स्तर पर किया गया—यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है। खासकर प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को किसी प्रतियोगिता के नाम पर एक बाहरी स्थल पर बुलाए जाने की स्थिति में अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन को कार्यक्रम की प्रामाणिकता की पुष्टि करना जरूरी होता है।

आखिर किसने जारी किया नगर परिषद के नाम वाला प्रवेश पत्र?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि नगर परिषद गुमला ने वास्तव में प्रतियोगिता आयोजित नहीं की थी, तो फिर उसके नाम का इस्तेमाल किसने किया?

जांच में इन बिंदुओं को स्पष्ट किया जाना जरूरी है—

  • नगर परिषद के नाम वाला प्रवेश पत्र किसने तैयार किया?
  • इसमें नगर परिषद के नाम का इस्तेमाल किस अनुमति से किया गया?
  • विभिन्न स्कूलों तक प्रवेश पत्र कैसे पहुंचा?
  • बच्चों और अभिभावकों को प्रतियोगिता स्थल तक किसने बुलाया?
  • हेल्पलाइन नंबर किस व्यक्ति या संस्था का था?
  • K.O. College में कार्यक्रम के लिए अनुमति किसने ली?
  • क्या संबंधित निजी संस्था को वहां कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मिली थी?
  • बच्चों से संबंधित गतिविधि में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी?
  • क्या प्रतियोगिता के नाम पर निजी कोर्स बेचने की योजना पहले से बनाई गई थी?

प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
मामला सामने आने के बाद अब अभिभावकों और स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि नगर परिषद के नाम का बिना अनुमति इस्तेमाल हुआ है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि गुमला के विभिन्न स्कूलों तक प्रतियोगिता से संबंधित जानकारी कैसे पहुंची और स्कूलों ने विद्यार्थियों को भेजने से पहले आयोजक की आधिकारिक पुष्टि की थी या नहीं।

क्या किसी सरकारी कर्मचारी की मिलीभगत है?
फिलहाल किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत का कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। हालांकि, अभिभावकों की ओर से यह सवाल जरूर उठाया जा रहा है कि यदि कोई निजी संस्था बिना किसी सरकारी सहयोग के नगर परिषद जैसे सरकारी निकाय का नाम इस्तेमाल कर कई स्कूलों के बच्चों तक पहुंच बना रही थी, तो उसे इतनी आसानी से मंच और विद्यार्थियों तक पहुंच कैसे मिली। इसलिए पूरे मामले में नगर परिषद, शिक्षा विभाग, संबंधित स्कूलों, कार्यक्रम स्थल और कथित आयोजक संस्था की भूमिका की जांच आवश्यक दिखाई देती है।

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कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ सकता है जोखिम
ऐसे मामलों में केवल अभिभावकों से पैसे लेने या निजी कोर्स बेचने के आरोप की जांच ही पर्याप्त नहीं होगी। सरकारी संस्था का नाम इस्तेमाल करने, बच्चों को कार्यक्रम के नाम पर बुलाने और आयोजन की वास्तविकता छिपाने के आरोपों की भी जांच जरूरी है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो प्रशासन को जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई संस्था सरकारी विभाग या स्थानीय निकाय के नाम का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर बच्चों और अभिभावकों को भ्रमित न कर सके।

Munadi Live की पड़ताल में सामने आए इस मामले में नगर परिषद गुमला का कार्यक्रम से इनकार सबसे अहम तथ्य है। अब पुलिस और जिला प्रशासन की जांच से ही स्पष्ट होगा कि प्रवेश पत्र किसने जारी किया, इसके पीछे कौन लोग थे और प्रतियोगिता के नाम पर वास्तव में क्या उद्देश्य था।

नोट: इस रिपोर्ट में निजी संस्था, स्कूल या किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संबंधित पक्षों के कथन और मौके पर सामने आई जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच एजेंसी की जांच के बाद ही होगी। संबंधित संस्था या स्कूल प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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