रांची के अंजनी कुमार सहाय बने यूक्रेन में भारत के नए राजदूत, राष्ट्रपति मुर्मू ने सौंपा नियुक्ति पत्र

रांची: राजधानी रांची के लिए गर्व का एक और अवसर सामने आया है। बरियातू हाउसिंग कॉलोनी निवासी और भारतीय विदेश सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी अंजनी कुमार सहाय को यूक्रेन में भारत का नया राजदूत नियुक्त किया गया है। शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में उन्हें औपचारिक रूप से नियुक्ति पत्र सौंपा। इसके साथ ही यूक्रेन में उनकी नई जिम्मेदारी संभालने की प्रक्रिया पूरी हो गई। विदेश मंत्रालय ने इससे पहले 7 जुलाई को अंजनी कुमार सहाय की यूक्रेन में भारत के राजदूत के रूप में नियुक्ति की घोषणा की थी। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रपति भवन में उन्हें आधिकारिक नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया।
शनिवार को परिवार के साथ यूक्रेन होंगे रवाना
नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के बाद अंजनी कुमार सहाय शनिवार को अपने परिवार के साथ यूक्रेन के लिए रवाना होंगे। नई जिम्मेदारी के तहत वे भारत और यूक्रेन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक जिम्मेदारियां संभालेंगे। यूक्रेन में भारत के राजदूत के रूप में उनकी नियुक्ति ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब भारत और यूक्रेन के संबंध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा में रहे हैं। ऐसे में अंजनी कुमार सहाय का लंबा कूटनीतिक अनुभव उनके लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

माली और मॉरिटानिया में भी रह चुके हैं राजदूत
भारतीय विदेश सेवा के अनुभवी अधिकारी अंजनी कुमार सहाय इससे पहले माली और मॉरिटानिया में भारत के राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें यूक्रेन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके पूर्व कूटनीतिक अनुभव को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि वे भारत के हितों को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बरियातू से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तक का सफर
अंजनी कुमार सहाय का रांची के बरियातू हाउसिंग कॉलोनी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के महत्वपूर्ण पद तक पहुंचना शहर और पूरे झारखंड के लिए गौरव की बात मानी जा रही है। उनकी इस उपलब्धि से रांची में खुशी का माहौल है। उनके यूक्रेन में भारत के राजदूत बनने को राज्य के युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
यह उपलब्धि यह संदेश देती है कि प्रतिभा, मेहनत और समर्पण के दम पर झारखंड के युवा भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने की ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं।





