JPSC-JSSC विवाद: जयपाल सिंह स्टेडियम में प्रदर्शन पर रोक, छात्रों ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
रांची: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच राजधानी रांची में छात्र आंदोलन को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जयपाल सिंह स्टेडियम में अब किसी भी तरह के विरोध-प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन ने यहां निषेधाज्ञा की धारा 163 लागू कर दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को JPSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने सरकार की भूमिका पर नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि छात्रों को भरोसा दिलाने के बावजूद कोर्ट की कार्यवाही के दौरान सरकार की मंशा छात्रहित में नजर नहीं आई।
कोर्ट की सुनवाई के बाद छात्रों में नाराजगी
मंच के रविंद्र पासवान ने कहा कि गुरुवार को हाईकोर्ट में हुई कार्रवाई को देखकर छात्रों को खुद को ठगा हुआ महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी छात्रों ने मुख्यमंत्री और सरकार के प्रतिनिधिमंडल की बातों पर भरोसा किया था। रविंद्र पासवान के मुताबिक, छात्रों को उम्मीद थी कि सरकार उनके हितों के लिए मजबूती से खड़ी होगी। लेकिन कोर्ट में हुई कार्यवाही के बाद मंच को लगता है कि छात्रों के साथ छल किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें राज्य सरकार की ओर से छात्रों के साथ खड़े रहने की बात कही गई थी। मंच का सवाल है कि यदि सरकार वास्तव में छात्रों के हित में है, तो कोर्ट में भी वही रुख क्यों नहीं दिखाई दिया?
शुक्रवार को जिलों में विरोध का ऐलान
कोर्ट की सुनवाई से नाराज JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने शुक्रवार को राज्य के सभी जिलों में मुख्यमंत्री का पुतला दहन करने का आह्वान किया है। मंच का कहना है कि आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए अब जिला स्तर पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हालांकि, स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम की रूपरेखा और आयोजन को लेकर संबंधित संगठनों की ओर से निर्णय लिया जाएगा।
सरकार की कानूनी पैरवी पर भी सवाल
मंच के कुणाल प्रताप सिंह ने हाईकोर्ट में सरकार की ओर से हुई पैरवी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि सुनवाई के दौरान कोई बड़ा वकील उपस्थित नहीं था और मौजूद अधिवक्ताओं की ओर से भी अपेक्षित तरीके से बात नहीं रखी गई। कुणाल प्रताप सिंह ने इसी आधार पर आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों को भरोसा दिया, लेकिन कोर्ट की कार्यवाही में वह गंभीरता दिखाई नहीं दी जिसकी छात्रों को उम्मीद थी। हालांकि, कोर्ट में सरकार की कानूनी रणनीति और अधिवक्ताओं की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष न्यायालय के आधिकारिक आदेश और रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
जयपाल सिंह स्टेडियम में धारा 163 लागू
इधर, लंबे समय से छात्र आंदोलन का प्रमुख केंद्र बने जयपाल सिंह स्टेडियम में प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू कर दी है। इसका सीधा मतलब है कि अब निर्धारित प्रतिबंधों के तहत स्टेडियम परिसर में विरोध-प्रदर्शन या भीड़ जुटाने की अनुमति नहीं होगी। प्रशासन के इस फैसले के बाद छात्रों के आंदोलन की अगली रणनीति महत्वपूर्ण हो गई है। एक तरफ आंदोलनकारी छात्र सरकार और भर्ती प्रक्रिया को लेकर अपनी मांगों पर कायम हैं, वहीं प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती बरत रहा है।
अब आगे क्या?
JPSC-JSSC विवाद पहले ही परीक्षा रद्द करने, जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार जैसे कई बड़े फैसलों के दौर से गुजर रहा है। अब हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद छात्रों की नाराजगी और जयपाल सिंह स्टेडियम में निषेधाज्ञा ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। छात्र संगठनों की ओर से शुक्रवार को प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम और उसके बाद सरकार की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी। साथ ही न्यायालय में लंबित मामलों में आने वाले आदेश भी इस पूरे विवाद की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।




