जयराम महतो के आरोपों पर पुलिस एसोसिएशन का पलटवार, 5 दिन का अल्टीमेटम; आंदोलन की चेतावनी
रांची: JLKM विधायक जयराम महतो और झारखंड पुलिस एसोसिएशन के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। बरवाअड्डा थाना प्रभारी के साथ मोबाइल पर कथित तौर पर अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल को लेकर शुरू हुआ विवाद अब निजता के अधिकार, पुलिसकर्मियों की गरिमा, गिरफ्तारी की मांग और आंदोलन की चेतावनी तक पहुंच गया है। जयराम महतो की ओर से पुलिस एसोसिएशन पर लगाए गए आरोपों के बाद एसोसिएशन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विधायक पर पलटवार किया। पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल मुर्मू ने जयराम महतो के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी मामले को चुनिंदा बयानों के आधार पर नहीं, बल्कि पूरे संदर्भ के साथ देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि विधायक का उद्देश्य झारखंड पुलिस एसोसिएशन का अपमान करना था, तो उनके वीडियो में यह स्पष्ट तौर पर दिखाई देता है।
बरवाअड्डा केस में 5 दिन में कार्रवाई की मांग
राहुल मुर्मू ने बताया कि बरवाअड्डा थाना कांड संख्या 146/2026, दिनांक 22 मई 2026 में दर्ज मामले को लेकर पुलिस एसोसिएशन की ओर से धनबाद एसपी से पत्राचार किया गया है। एसोसिएशन ने जयराम महतो समेत अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए जरूरी प्रक्रियाओं को पांच दिनों के भीतर पूरा करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होती है, तो झारखंड पुलिस एसोसिएशन राज्यभर के शाखा पदाधिकारियों और सदस्यों के साथ आंदोलन करने पर विचार करेगा। राहुल मुर्मू के मुताबिक, एसोसिएशन की ओर से इस पत्र की प्रतिलिपि राज्यपाल, मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों, मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और डीजीपी को भी भेजी जा रही है। इसका उद्देश्य मामले में कार्रवाई की स्थिति को उच्च स्तर तक स्पष्ट रखना है।
‘थाना प्रभारी की गरिमा को ठेस पहुंची तो रिकॉर्डिंग गलत कैसे?’
जयराम महतो ने विवाद को लेकर निजता के अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला दिया था। विधायक का कहना था कि थाना प्रभारी के साथ उनकी बातचीत निजी थी और उसे सार्वजनिक करना निजता के अधिकार से जुड़ा सवाल है। इस पर राहुल मुर्मू ने कहा कि अनुच्छेद 21 जीवन और गरिमा के अधिकार से जुड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी थाना प्रभारी के साथ फोन पर कथित तौर पर अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया और अधिकारी ने अपने बचाव में बातचीत रिकॉर्ड की, तो इसे निजता का उल्लंघन किस आधार पर कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब किसी पुलिस पदाधिकारी की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप हो और बातचीत की रिकॉर्डिंग सामने आती है, तब केवल निजता के अधिकार का हवाला देना उचित नहीं है।
नस्लीय भेदभाव के आरोप भी खारिज
पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ने संगठन पर लगाए गए नस्लीय भेदभाव और चुनिंदा पुलिसकर्मियों का पक्ष लेने के आरोपों को भी खारिज किया। राहुल मुर्मू ने कहा कि एसोसिएशन ने अलग-अलग मामलों में पुलिसकर्मियों के हितों को लेकर आवाज उठाई है। उन्होंने हजारीबाग में पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के बीच हुए विवाद, महेश मुंडा से जुड़े मामले और बौखालो की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर एसोसिएशन की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि 1855 के संथाल विद्रोह से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भ में महेशलाल दत्त की भूमिका को लेकर एसोसिएशन पूर्व में माफी भी मांग चुकी है।
‘सेलेक्टिव नहीं, पूरे संदर्भ में बात करें’
राहुल मुर्मू ने जयराम महतो पर आरोप लगाया कि वह अपनी सुविधा के अनुसार निजता के अधिकार का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब विधायक अधिकारियों को फोन करते हैं और उनकी बातचीत के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते हैं, तब निजता के अधिकार की बात क्यों नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे पर ‘सेलेक्टिव’ तरीके से नहीं, बल्कि पूरे संदर्भ में बात की जानी चाहिए। राहुल मुर्मू ने जयराम महतो से ‘इमोशनल इंटेलिजेंस’ के नाम पर लोगों को प्रभावित करने की राजनीति बंद करने की भी अपील की।
बालू विवाद को लेकर भी निशाना
पुलिस एसोसिएशन ने बालू विवाद को लेकर भी विधायक जयराम महतो पर निशाना साधा। राहुल मुर्मू ने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेशों के तहत बरसात के दौरान बालू खनन और नदी से जुड़े कार्यों पर प्रतिबंध की स्थिति रहती है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में आम लोगों को कथित तौर पर अवैध गतिविधियों के लिए उकसाना उचित नहीं है। उनके अनुसार, झारखंड की जनता को किसी भी तरह से उकसाने या भड़काने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। ‘क्रांति’ की अपील को लेकर भी राहुल मुर्मू ने सवाल उठाया और कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सिर्फ पुलिस की नहीं, बल्कि सभी की जिम्मेदारी है।
विवाद आगे किस दिशा में जाएगा?
जयराम महतो के आरोपों और पुलिस एसोसिएशन के जवाब के बाद अब दोनों पक्षों के बीच टकराव और तेज हो गया है। एक ओर विधायक निजी बातचीत को सार्वजनिक किए जाने को लेकर निजता के अधिकार का सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर पुलिस एसोसिएशन थाना प्रभारी की गरिमा और कथित दुर्व्यवहार को मुद्दा बना रहा है। एसोसिएशन ने बरवाअड्डा मामले में पांच दिनों के भीतर कार्रवाई की मांग कर स्पष्ट कर दिया है कि यदि कार्रवाई नहीं होती है तो राज्यव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है। फिलहाल इस पूरे विवाद में आगे पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई और जयराम महतो की प्रतिक्रिया पर नजर बनी हुई है। दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं और मामले में अंतिम स्थिति संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगी।





