आजसू के पैदल मार्च को प्रशासन ने रोका, सैकड़ों कार्यकर्ता गिरफ्तार; 8 मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

तमाड़/बुंडू: तमाड़ विधानसभा क्षेत्र की गंभीर और जनहित से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर आजसू पार्टी की ओर से निकाला जा रहा शांतिपूर्ण पैदल मार्च प्रशासन ने बुंडू के धुरवामोड़ के पास रोक दिया। इसके बाद मार्च में शामिल आजसू नेताओं, कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारी नागरिकों को हिरासत में लेकर बुंडू थाना ले जाया गया। आजसू पार्टी के अनुसार, यह पैदल मार्च पेड़ाईडीह गांव से झारखंड विधानसभा तक प्रस्तावित था। पार्टी का कहना है कि क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों को सरकार तक पहुंचाने के उद्देश्य से मार्च निकाला गया था।
धुरवामोड़ पर रोका गया पैदल मार्च
आजसू पार्टी के बैनर तले बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और ग्रामीण पैदल मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक पहुंचाना चाहते थे। हालांकि, बुंडू के धुरवामोड़ पर प्रशासन ने मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच गतिरोध की स्थिति बनी और मार्च में शामिल लोगों को गिरफ्तार कर बुंडू थाना ले जाया गया। आजसू की ओर से प्रशासन की इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई गई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है।


गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
गिरफ्तारी के बाद आंदोलनकारियों की ओर से झारखंड के मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन अनुमंडल पदाधिकारी, बुंडू को सौंपा गया। मौके पर मौजूद SDO और SDPO की ओर से क्षेत्र की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने की बात आजसू की ओर से कही गई है।
आजसू की 8 प्रमुख मांगें
आजसू पार्टी ने तमाड़ विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी कई प्रमुख समस्याओं को ज्ञापन में उठाया है।
- सालगाडीह केनल रोड का निर्माण
- तमाड़ में डिग्री कॉलेज
- बुंडू अनुमंडल में बुनियादी सुविधाएं
- अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर का सुदृढ़ीकरण
- बड़े तालाब सौंदर्यीकरण की जांच
- नए प्रखंड का गठन
- राजा बांध का सौंदर्यीकरण
- जनहित के मुद्दों पर समयबद्ध कार्रवाई
आश्वासन के बाद भी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
आजसू पार्टी ने कहा है कि प्रशासन और सरकार की ओर से मिले आश्वासन का सम्मान किया जाएगा, लेकिन यदि निर्धारित समयसीमा में मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो पार्टी और क्षेत्र के ग्रामीण आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे। पार्टी ने कहा कि आगे की स्थिति के लिए शासन और प्रशासन जिम्मेदार होगा। फिलहाल पैदल मार्च को रोके जाने और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद तमाड़ विधानसभा क्षेत्र की इन मांगों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद इन जनहित के मुद्दों पर जमीन पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।





