खान-खनिज संशोधन विधेयक के खिलाफ JMM का आंदोलन का ऐलान, 16 से 18 अगस्त तक चलेगा जनजागरण















गिरिडीह: खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक-2026 के खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने आंदोलन की रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। शुक्रवार को गिरिडीह में पार्टी जिलाध्यक्ष संजय सिंह की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मंत्री सुदिव्य कुमार ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर झारखंड के हितों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया।
‘झारखंड नहीं सहेगा सौतेला व्यवहार’: सुदिव्य कुमार
मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने जल्दबाजी में खान और खनिज संशोधन विधेयक-2026 पारित कराकर झारखंड के हितों को नुकसान पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने इसे झारखंड और झारखंडियों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि इस कानून का असर राज्य के विकास और भविष्य पर पड़ेगा। सुदिव्य कुमार ने आरोप लगाया कि विधेयक के प्रावधानों से राज्य के राजस्व पर असर पड़ेगा और इसका सीधा प्रभाव मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, सर्वजन पेंशन योजना, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी योजनाओं पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां के प्राकृतिक संसाधनों से होने वाले राजस्व पर राज्य के विकास और कल्याणकारी योजनाओं की बड़ी जिम्मेदारी टिकी हुई है। ऐसे में केंद्र का यह फैसला झारखंड के हित में नहीं है।
















16 से 18 अगस्त तक चलेगा जनजागरण अभियान
JMM ने आंदोलन की शुरुआत जनजागरण अभियान से करने का फैसला लिया है। जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने बताया कि 16 से 18 अगस्त तक प्रखंड से लेकर पंचायत स्तर तक अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों को विधेयक के प्रावधानों और उसके संभावित प्रभावों की जानकारी देंगे। पार्टी नेताओं ने कहा कि आंदोलन को केवल पार्टी स्तर तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि आम लोगों को भी इससे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।






‘जरूरत पड़ी तो होगी आर्थिक नाकेबंदी’
JMM नेताओं ने बैठक में स्पष्ट किया कि यदि जनजागरण अभियान के बाद भी केंद्र सरकार विधेयक को वापस नहीं लेती है, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। पार्टी की ओर से आर्थिक नाकेबंदी जैसे कदम उठाने की चेतावनी भी दी गई है। संजय सिंह ने कहा कि झारखंड के हितों की रक्षा के लिए पार्टी इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अभियान को पंचायत और प्रखंड स्तर तक मजबूत करने तथा अधिक से अधिक लोगों को आंदोलन से जोड़ने का आह्वान किया।
गिरिडीह में जुटे JMM के नेता और कार्यकर्ता
बैठक में पूर्व विधायक केदार हाजरा, जिला सचिव महालाल सोरेन, महापौर प्रमिला मेहरा, उप महापौर सुमित कुमार, जिला उपाध्यक्ष अजीत कुमार पप्पू और शाहनवाज अंसारी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसके अलावा केंद्रीय कमेटी की सदस्य बबली मरांडी, बरकत अली, प्रणव वर्मा, दिलीप मंडल, शत्रुघ्न मंडल, नुनूराम किस्कू उर्फ टाइगर, झारखंड युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष कोलेश्वर सोरेन, जिला प्रवक्ता कृष्ण मुरारी शर्मा, नगर अध्यक्ष राकेश कुमार रॉकी, नगर सचिव सन्नी रैन और मीडिया प्रभारी अभय सिंह सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने बैठक में हिस्सा लिया।
JMM का अगला कदम क्या?
खान-खनिज संशोधन विधेयक को लेकर झारखंड सरकार और केंद्र के बीच पहले से राजनीतिक खींचतान जारी है। अब JMM के आंदोलन के ऐलान के बाद यह मुद्दा राज्य में और जोर पकड़ सकता है। 16 अगस्त से शुरू होने वाला जनजागरण अभियान इस आंदोलन का पहला बड़ा चरण होगा। इसके बाद पार्टी की रणनीति इस बात पर निर्भर करेगी कि केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया जाता है।
खनिज संपदा पर अधिकार को लेकर केंद्र से टकराव
JMM नेताओं ने कहा कि झारखंड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है और कोयला, लौह अयस्क समेत अन्य खनिज संसाधनों से मिलने वाला राजस्व राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पार्टी का आरोप है कि प्रस्तावित संशोधन से राज्यों के वित्तीय अधिकार प्रभावित होंगे और खनिज संपदा वाले राज्यों की आर्थिक स्वायत्तता कमजोर हो सकती है। नेताओं ने कहा कि झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों का लाभ यहां के लोगों, खासकर खनन प्रभावित क्षेत्रों के परिवारों और आदिवासी समुदायों तक पहुंचना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाने की तैयारी कर रही है।





