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पिठोरिया हॉस्टल केस में बड़ा मोड़, हाईकोर्ट के निर्देश पर DLSA एक्टिव

Pithoria Hostel Case

झालसा सदस्य सचिव को गहन जांच के निर्देश, बच्चे के इलाज, काउंसलिंग और कानूनी सहायता की व्यवस्था

रांची: रांची के पिठोरिया थाना क्षेत्र स्थित एक स्कूल के हॉस्टल में नाबालिग छात्र के साथ कथित यौन उत्पीड़न के मामले में अब झारखंड हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई तेज हो गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने झालसा की सदस्य सचिव रंजना अस्थाना को मामले की गहन जांच कराने और पीड़ित बच्चे को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) और रांची जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। अब जांच की प्रगति के साथ-साथ बच्चे के उपचार, काउंसलिंग, कानूनी सहायता और पुनर्वास से जुड़े पहलुओं की भी निगरानी की जा रही है।

पिठोरिया थाना पहुंची DLSA की टीम
प्रधान न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा के निर्देश पर रांची डालसा की टीम पिठोरिया थाना पहुंची। टीम ने पुलिस अधिकारियों से मामले की अब तक की जांच और कार्रवाई की जानकारी ली। डालसा की टीम ने पीड़ित बच्चे के पिता से भी मुलाकात की और बच्चे की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी ली। मामले में पुलिस की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई है और जांच किस स्तर तक पहुंची है, इसकी भी जानकारी जुटाई गई। डालसा सचिव ने मामले के अनुसंधानकर्ता से जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट झालसा को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई और पीड़ित बच्चे को उपलब्ध कराई जा रही सहायता की निगरानी की जाएगी।

इलाज और काउंसलिंग की व्यवस्था
हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान के बाद पीड़ित बच्चे के उपचार और काउंसलिंग की व्यवस्था की गई है। परिवार को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इसके अलावा पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया पर भी काम किया जा रहा है। डालसा की ओर से स्पष्ट किया गया है कि मामले में बच्चे के हित, सुरक्षा, गरिमा और पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ पीड़ित बच्चे को मनोवैज्ञानिक और सामाजिक सहायता उपलब्ध कराना भी आवश्यक होता है।

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21 सितंबर की रात की बताई जा रही है घटना
परिजनों की शिकायत के अनुसार घटना 21 सितंबर की रात करीब 10:30 बजे की है। परिवार के मुताबिक, पीड़ित छात्र ने अगले दिन यानी 22 सितंबर को फोन पर रोते हुए घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिजन स्कूल पहुंचे और मामले की जानकारी लेने के बाद पिठोरिया थाना में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित के पिता ने पुलिस को दिए आवेदन में आरोप लगाया कि आरोपी छात्र ने उनके बेटे को डराने-धमकाने के बाद कथित घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर POCSO एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है और आरोपी नाबालिग छात्र को हिरासत में लिया गया है। पुलिस मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार, स्कूल प्रबंधन ने घटना की जानकारी मिलने के बाद सीसीटीवी फुटेज की जांच कर आरोपी छात्र की पहचान किए जाने की बात कही है।

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स्कूल और हॉस्टल प्रबंधन पर भी सवाल
घटना के बाद पीड़ित के परिजनों ने स्कूल और हॉस्टल प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे। परिजनों का आरोप था कि घटना की जानकारी तत्काल उन्हें और पुलिस को नहीं दी गई। हालांकि, स्कूल प्रबंधन की ओर से सामने आए पक्ष के अनुसार, घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों को सूचना दी गई और पुलिस को भी जानकारी दी गई। स्कूल की ओर से सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद आरोपी छात्र की पहचान किए जाने की बात कही गई है। इसलिए स्कूल प्रबंधन की भूमिका को लेकर उठे सवालों की भी जांच आवश्यक है। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब पुलिस जांच के साथ-साथ विधिक सेवा प्राधिकार भी मामले की प्रगति पर नजर रख रहा है।

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अब जांच की प्रगति पर रहेगी नजर
पिठोरिया हॉस्टल मामले में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जांच का दायरा केवल प्राथमिकी और आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा। पीड़ित बच्चे को उपचार, काउंसलिंग, कानूनी सहायता और प्रतिकर योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया भी समानांतर रूप से आगे बढ़ेगी। DLSA की ओर से मांगी गई जांच प्रगति रिपोर्ट के आधार पर झालसा आगे की कार्रवाई की निगरानी करेगा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। चूंकि मामला नाबालिगों से जुड़ा है, इसलिए पीड़ित बच्चे की पहचान और उससे जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए।

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