सरला बिरला विश्वविद्यालय में देशभक्ति और संस्कृति का संगम, तिरंगा फहराकर हुआ समारोह का शुभारंभ

Sarla Birla University

युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जुड़ने का संदेश

भारत का भविष्य युवाओं के विचार और कर्म से बनेगा

रांची: सरला बिरला विश्वविद्यालय, रांची में 80वां स्वतंत्रता दिवस देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विविधता के उल्लासपूर्ण वातावरण में मनाया गया। विश्वविद्यालय के खेल प्रांगण में आयोजित समारोह में विद्यार्थियों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय परिवार ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में राष्ट्रप्रेम के साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरत झलक देखने को मिली।

तिरंगा फहराकर हुआ समारोह का शुभारंभ
समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज फहराने और ध्वज को सलामी देने के साथ हुई। इसके बाद राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया गया। शहीदों और राष्ट्रवीरों के सम्मान में लगाए गए जयघोष से पूरा विश्वविद्यालय परिसर देशभक्ति की भावना से गूंज उठा। परेड ने समारोह की गरिमा को और बढ़ाया।

‘अनेकता में एकता’ का संदेश बनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
स्वतंत्रता दिवस समारोह का सबसे आकर्षक हिस्सा विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। विद्यार्थियों ने देश के अलग-अलग राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य, योग और अन्य प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया। इन प्रस्तुतियों में भारत की विविध भाषाओं, परंपराओं, रीति-रिवाजों और लोक-संस्कृतियों की झलक दिखाई दी। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए ‘अनेकता में एकता’ की भावना को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा।

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देशभक्ति गीतों से गूंजा परिसर
कार्यक्रम में देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति ने माहौल में नया उत्साह भर दिया। ‘अपनी धरती, अपना अंबर, अपना हिंदुस्तान’ गीत की प्रस्तुति के माध्यम से कलाकारों ने मातृभूमि के प्रति प्रेम और गौरव की भावना व्यक्त की। गीत की प्रस्तुति के दौरान विद्यार्थियों और अतिथियों में खासा उत्साह देखने को मिला और पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति के सुरों से गूंज उठा।

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युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जुड़ने का संदेश
कार्यक्रम को विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. श्रीधर डांडिन, कुलपति प्रो. सी. जगनाथन, महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक तथा राज्यसभा सांसद सह निदेशक, प्लानिंग एंड डेवलपमेंट, एसबीयू डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने संबोधित किया। अपने संबोधनों में सभी वक्ताओं ने विद्यार्थियों को देशभक्ति, जिम्मेदारी, युवा नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूक किया।

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डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने युवाओं को दिया संदेश
समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना, एकता और देशभक्ति की भावना का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से ‘वंदे मातरम्’ की भावना को अपने जीवन और कार्यों में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी आकांक्षाओं और सपनों को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ना चाहिए। डॉ. वर्मा ने कहा कि देशभक्ति केवल भावना तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि शिक्षा, नवाचार, प्रतिभा, जिम्मेदार नागरिकता और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से सशक्त एवं विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने की अपील की।

‘भारत का भविष्य युवाओं के विचार और कर्म से बनेगा’
कुलसचिव प्रो. श्रीधर डांडिन ने विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के विचारों, चरित्र और कर्मों से निर्मित होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा और क्षमताओं का उपयोग देश की प्रगति के लिए करने का आह्वान किया।

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अनुशासन और जिम्मेदारी पर जोर
कुलपति प्रो. सी. जगनाथन ने एकता, अनुशासन और जिम्मेदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को समझने और उनका ईमानदारी से निर्वहन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार और अनुशासित युवा ही सशक्त राष्ट्र की मजबूत नींव तैयार कर सकते हैं।

युवा शक्ति को बताया देश की सबसे बड़ी ताकत
महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक ने युवा शक्ति को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं की प्रतिभा, ऊर्जा और नवाचार की क्षमता को सकारात्मक दिशा देकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने सपनों और लक्ष्यों को देश की प्रगति से जोड़ने तथा समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी कार्य करने का आह्वान किया।

प्रतिकुलाधिपति ने दी शुभकामनाएं
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के माननीय प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार को शुभकामना संदेश प्रेषित किया। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को राष्ट्र की प्रगति में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। समारोह के अंत में विद्यार्थियों की जीवंत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और वक्ताओं के प्रेरणादायक संदेशों ने देशभक्ति, सांस्कृतिक विविधता, युवा शक्ति और राष्ट्रीय जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत किया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता में निहित एकता और युवा पीढ़ी की ऊर्जा में है।

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