जुलाई में थोक महंगाई घटकर 9.78%, ईंधन से राहत लेकिन खाद्य-विनिर्माण का दबाव बरकरार

WPI Inflation July 2026
dipika pandey sing
दीपक कुमार थाना प्रभारी रामगढ़ घाटों
द हॉप मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल रांची रोड मरार रामगढ़
बिहार फाऊंडरी एंड कास्टिंग लिमिटेड इंडस्ट्रीज एरिया मरार रामगढ़
मां तारा सेवा समिति
मां सेवा यतन हॉस्पिटल
रजरप्पा थाना प्रभारी श्री कृष्ण कुमार
रमेश रविदास
रमेश सिंह
राधा गोविंद यूनिवर्सिटी लाल की घाटी रामगढ़
रोटरी रामगढ़ सिटी के पूर्व अध्यक्ष श्री आदर्श चौधरी
रोटेरियन हरीश चौधरी
होटल सम्राट गोला रोड
होटल तेजस
होटल ट्रीट थाना चौक रामगढ़

नई दिल्ली: देश में थोक महंगाई के मोर्चे पर जुलाई 2026 में मामूली राहत देखने को मिली है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक, थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI आधारित महंगाई दर जुलाई में 9.78 प्रतिशत रही। जून 2026 में यह दर 9.87 प्रतिशत थी। यानी महीने-दर-महीने आधार पर थोक महंगाई में मामूली कमी दर्ज की गई है। हालांकि, महंगाई में यह गिरावट बहुत बड़ी राहत नहीं मानी जा रही, क्योंकि खाद्य वस्तुओं और विनिर्माण क्षेत्र में कीमतों का दबाव लगातार बढ़ा है। ऐसे में आने वाले समय में महंगाई को लेकर चुनौती बनी रह सकती है।

ईंधन और बिजली की कीमतों में बड़ी राहत
जुलाई में थोक महंगाई दर में मामूली कमी की सबसे बड़ी वजह ईंधन और बिजली क्षेत्र रहा। जून 2026 में इस क्षेत्र की महंगाई दर 27.41 प्रतिशत थी, जो जुलाई में घटकर 20.05 प्रतिशत रह गई। यानी ईंधन और बिजली की कीमतों में दबाव कम हुआ है। इसका सकारात्मक असर कुल WPI पर पड़ा और महंगाई दर जून के मुकाबले नीचे आई। लेकिन दूसरी तरफ खाद्य वस्तुओं और कई औद्योगिक उत्पादों की कीमतों में तेजी ने इस राहत को सीमित कर दिया।

ccl.psd
Cambrian public school
RKDF University
Sarla Birla school
Vedanta iron steel
आशुतोष सिंह कुज्जू थाना प्रभारी
झारखंड हॉस्पिटल
डीड राइटर रामगढ़
डॉ इरफान अंसारी
थेरेपी वर्ल्ड स्पा
बागड़िया ब्रदर श्याम कंपलेक्स
प्रो केयर डेंटल क्लिनिक
पॉली डॉग हॉस्पिटल रांची
न्यू रामगढ़ टेंट हाउस
निवेदक श्री सदानंद कुमार
निवेदक नवीन प्रकाश पांडे थाना प्रभारी रामगढ़ थाना

खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी
खाद्य क्षेत्र की तस्वीर इसके उलट रही। जुलाई 2026 में थोक खाद्य सूचकांक की महंगाई दर 6.65 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह 6.14 प्रतिशत थी। यानी खाद्य महंगाई में करीब आधा प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर आने वाले दिनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। मिनरल ऑयल, खाद्य वस्तुओं, बुनियादी धातुओं, गैर-खाद्य वस्तुओं और रसायन एवं रासायनिक उत्पादों की कीमतों में तेजी को भी महंगाई बढ़ने के प्रमुख कारणों में माना गया है।

सेंट्रल हार्डवेयर
सतीश गुप्ता
श्री शंकर मिश्रा
श्री पंकज कुशवाहा
श्री कृष्ण विद्या मंदिर
श्री आजाद सिंह

प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई भी बढ़ी
प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर में भी जुलाई के दौरान तेजी देखी गई। जून में यह 7 प्रतिशत थी, जो जुलाई में बढ़कर 8.52 प्रतिशत हो गई। इससे संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था के शुरुआती स्तर पर इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुओं की कीमतों में लागत का दबाव बढ़ा है। अगर कच्चे माल और प्राथमिक वस्तुओं की कीमतों में तेजी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर आगे चलकर तैयार उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

munadi live whattsapp banne.jpg

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर बढ़ा दबाव
विनिर्मित उत्पादों की थोक महंगाई दर भी जुलाई में बढ़ी है। जून में यह 7.48 प्रतिशत थी, जो जुलाई में बढ़कर 8.29 प्रतिशत हो गई। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कीमतों का बढ़ना कारोबार और उपभोक्ता दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। उत्पादन लागत बढ़ने पर कंपनियां कई बार इसका बोझ अंतिम उत्पादों की कीमतों में डालती हैं। यही वजह है कि आने वाले महीनों में थोक महंगाई के साथ-साथ खुदरा महंगाई पर भी नजर रहेगी।

resizone elanza

Telegram channel

WPI के नए आधार वर्ष का इस्तेमाल
सरकार अब WPI की गणना के लिए 2022-23 को आधार वर्ष मान रही है। नए आधार वर्ष के तहत सभी वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक जून 2026 के 110.2 से घटकर जुलाई में 110.0 हो गया। नए आधार वर्ष के जरिए अर्थव्यवस्था में बदलती वस्तुओं और कीमतों की संरचना को अधिक बेहतर तरीके से प्रतिबिंबित करने का प्रयास किया गया है।

मई के आंकड़ों में भी हुआ संशोधन
सरकार ने मई 2026 के WPI आंकड़ों में भी संशोधन किया है। मई की थोक महंगाई दर पहले 9.68 प्रतिशत बताई गई थी, जिसे संशोधित कर 9.88 प्रतिशत कर दिया गया। इससे यह साफ है कि शुरुआती अनुमान के बाद आंकड़ों में बदलाव संभव है और अंतिम आंकड़ों में भी संशोधन किया जा सकता है।

महंगाई पर आगे भी रहेगी नजर
जुलाई में थोक महंगाई में मामूली गिरावट जरूर आई है, लेकिन 9.78 प्रतिशत का स्तर अभी भी ऊंचा है। ईंधन क्षेत्र में राहत के बावजूद खाद्य और विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ती कीमतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आने वाले महीनों में खाद्य वस्तुओं और औद्योगिक उत्पादों की कीमतों का रुख क्या रहता है। अगर इन क्षेत्रों में महंगाई का दबाव जारी रहा, तो इसका असर उत्पादन लागत से लेकर बाजार में बिकने वाली वस्तुओं की कीमतों तक दिखाई दे सकता है।

ऐसे में महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखना सरकार और नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बना रहेगा। वहीं भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति पर भी महंगाई के ये आंकड़े महत्वपूर्ण असर डाल सकते हैं। कुल मिलाकर जुलाई के आंकड़े एक मिली-जुली तस्वीर पेश करते हैं—ईंधन से राहत मिली है, लेकिन खाद्य और विनिर्माण क्षेत्र ने चिंता बढ़ा दी है। आने वाले महीनों के आंकड़े बताएंगे कि यह महंगाई का दबाव अस्थायी है या अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौती बन रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *