JPSC-JSSC गड़बड़ी में नया खुलासा! बिंसिस-आईसीएन इंडिया के कनेक्शन से बढ़ी जांच की रफ्तार
रांची: JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले में नए नाम और नए कनेक्शन सामने आ रहे हैं। JPSC से जुड़ी कथित गड़बड़ियों के मामले में एक दिन पहले मुंबई से गिरफ्तार किए गए बिंसिस कंपनी के निदेशक अरुण कुमार शर्मा से CID पूछताछ कर रही है। वहीं, जांच में ICN India नाम की एक अन्य कंपनी और उसके निदेशक मिथिलेश सिंह उर्फ आरके सिंह का नाम भी सामने आया है। जांच के दायरे में अब कथित परीक्षा माफिया नेटवर्क, परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसियां, अभ्यर्थियों तक प्रश्न-उत्तर पहुंचाने के आरोप और इससे जुड़े आर्थिक लेन-देन की कड़ियां भी शामिल होती जा रही हैं।
अरुण शर्मा और आरके सिंह की संपत्तियों की भी चर्चा
जांच से जुड़े दावों के मुताबिक अरुण कुमार शर्मा और आरके सिंह ने कथित तौर पर करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की। इनमें बिहार में शिक्षण संस्थान, पुणे में होटल और दिल्ली-गुरुग्राम में जमीन-मकान जैसी संपत्तियां शामिल होने की बात सामने आई है। अरुण कुमार के बारे में यह भी दावा किया गया है कि मुंबई स्थित उनके फिल्म निर्माण संस्थान के माध्यम से फिल्म निर्माण में निवेश किया गया और नोएडा में शूटिंग के नाम पर उत्तर प्रदेश सरकार से सब्सिडी भी ली गई। वर्ष 2019 में ‘सेटर्स’ नाम की फिल्म बनाए जाने का भी उल्लेख सामने आया है। इन तमाम संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों की वास्तविकता तथा परीक्षा मामलों से इनके संबंध की जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही है।
DRDO की परीक्षाओं में भी गड़बड़ी का आरोप
जांच में अरुण कुमार पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO से जुड़ी परीक्षाओं में भी कथित गड़बड़ी करने के आरोप सामने आए हैं। CID को दिए गए कथित इनपुट के अनुसार, अरुण कुमार ने अधिकारी महेंद्र कपूर के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को गलत तरीके से पास कराने का काम किया। आरोप है कि सैन्य अभियंता सेवा, पुणे की 2021-22 की परीक्षा में करीब 300 अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में कथित छेड़छाड़ की गई। इसी तरह दिल्ली में JNU के समीप आयोजित राष्ट्रीय प्रतिरक्षा अनुसंधान संस्थान की 2020 की परीक्षा में करीब 20 अभ्यर्थियों को कथित तौर पर नौकरी दिलाने का आरोप भी सामने आया है। इन आरोपों की पुष्टि जांच के अंतिम निष्कर्ष से ही होगी।
JSSC जूनियर इंजीनियर परीक्षा पेपर लीक से भी जुड़ा नाम
अरुण कुमार का नाम झारखंड में 3 जुलाई 2022 को आयोजित JSSC कनीय अभियंता परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले से भी जोड़ा गया है। आरोप है कि परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से करीब तीन दिन पहले लीक होकर बिहार और झारखंड के करीब 700 अभ्यर्थियों तक पहुंचा था। इसके बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इस मामले में अरुण कुमार के सहयोगी अभिषेक कुमार की गिरफ्तारी की बात भी सामने आई थी, जबकि अरुण कुमार के फरार रहने का दावा किया गया था।
2024 की स्नातक स्तरीय परीक्षा पर भी सवाल
जांच से जुड़े आरोपों के मुताबिक 28 जनवरी 2024 की स्नातक स्तरीय परीक्षा में भी अरुण कुमार और आरके सिंह का नाम सामने आया है। दावा है कि दोनों ने राजस्थान के कथित परीक्षा माफिया गिरोह के साथ मिलकर बिहार के गया और औरंगाबाद में अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र रटवाए थे। इसके बाद परीक्षा रद्द किए जाने की बात कही गई है। वर्ष 2017 की बिहार रेल भर्ती परीक्षा और वर्ष 2019 की बिहार सिपाही भर्ती से जुड़े कथित 14 करोड़ रुपये के गबन मामले में भी अरुण कुमार का नाम सामने आने का दावा किया गया है।
‘श्वेता गुप्ता को गड़बड़ियों की जानकारी थी’—रामवीर सिंह का दावा
जांच के दौरान TDPL के निदेशक रामवीर सिंह के कथित बयान ने भी मामले को और गंभीर बना दिया है। रामवीर सिंह ने आरोप लगाया कि परीक्षा में होने वाली कथित गड़बड़ियों की जानकारी परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को थी। उनके अनुसार, श्वेता गुप्ता को ACF, FRO इंटरव्यू और 14वीं JPSC परीक्षा के संचालन एवं निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी। रामवीर सिंह के कथित बयान के अनुसार, 14वीं सिविल सेवा परीक्षा की आंसर सीट WhatsApp के जरिए कुछ कर्मचारियों तक भेजी गई थी और OMR शीट में कथित तौर पर बदलाव कर अंक बढ़ाने का प्रयास किया जाता था। उन्होंने कुछ चयनित अभ्यर्थियों के नामों का भी उल्लेख किया है। हालांकि, ये सभी आरोप जांच का विषय हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस सामग्री में नहीं है।

FRO परीक्षा में भी कथित सेटिंग का दावा
रामवीर सिंह ने कथित तौर पर यह भी बताया कि FRO PT परीक्षा के बाद कुछ अभ्यर्थियों के नाम दिए गए थे, जिन्हें सफल कराने का दबाव था। दावा किया गया कि मुख्य परीक्षा की कॉपियां आयोग से निकालकर कुछ लोगों को दी गईं और अलग-अलग स्थानों पर उनके उत्तर लिखवाए गए। यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है तो परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और आयोग के भीतर संभावित नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
पूर्व JPSC सदस्य डॉ. जमाल अहमद से पूछताछ
इधर JPSC के पूर्व सदस्य डॉ. जमाल अहमद भी बुधवार को CID कार्यालय पहुंचे, जहां उनसे पूछताछ की गई और बयान दर्ज किया गया। डॉ. जमाल अहमद ने कथित गड़बड़ियों में अपनी भूमिका से इनकार किया। उन्होंने कहा कि आयोग की बैठकों में जिन मुद्दों पर उन्हें असहमति होती थी, वहां उन्होंने अपनी बात मजबूती से रखी। उन्होंने TDPL के चयन में किसी तरह की गड़बड़ी या छात्रों की गलत तरीके से नियुक्ति की जानकारी होने से भी इनकार किया और अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को तथ्यों से परे बताया। उनका नाम TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी द्वारा लगाए गए आरोपों के संदर्भ में सामने आया था।
मुख्य सचिव कार्यालय के कर्मी धर्मेंद्र से भी पूछताछ
CID ने मुख्य सचिव कार्यालय से जुड़े कर्मी धर्मेंद्र से भी दोबारा पूछताछ शुरू की है। रिमांड अवधि बढ़ाए जाने के बाद उससे अन्य आरोपियों के बयानों के आधार पर सवाल किए जा रहे हैं। पूछताछ में उसके पूर्व मुख्य सचिव एल खियांग्ते से संबंध, TDPL और बिंसिस कंपनी से संपर्क तथा कथित आर्थिक लेन-देन से जुड़े सवाल पूछे जाने की बात सामने आई है।
अरुण कुमार पांच दिनों की CID रिमांड पर
मुंबई से गिरफ्तार किए गए बिंसिस के निदेशक अरुण कुमार को CID ने पांच दिनों की रिमांड पर लिया है। उससे JSSC कनीय अभियंता परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले को लेकर पूछताछ की जा रही है। साथ ही जांच एजेंसी अभय तिवारी, धर्मेंद्र और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते से उसके कथित संबंधों की भी पड़ताल कर रही है। अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अलग-अलग कंपनियों, परीक्षा एजेंसियों, बिचौलियों और अभ्यर्थियों के बीच कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था? JPSC और JSSC की परीक्षाओं से जुड़े मामलों में सामने आ रहे नए नामों और आरोपों के बीच CID की जांच पर अब सबकी नजर है। हालांकि, आरोपों की अंतिम सच्चाई जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।






