लद्दाख में Gen Z सड़क पर : लेह में हिंसक प्रदर्शन के बाद कर्फ्यू, 50 गिरफ्तार, 4 मौतें; सेना और CRPF की तैनाती

Violent protests in Ladakh Violent protests in Ladakh

राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग पर फूटा गुस्सा

लद्दाख: लद्दाख में महीनों से सुलग रहा असंतोष बुधवार को हिंसा के भयानक विस्फोट में बदल गया। राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत आदिवासी संरक्षण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण धरने से अचानक सड़कों पर उतर आए।
कुछ ही घंटों में लेह हिंसा, आगजनी और गोलीबारी की चपेट में आ गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस हिंसा में अब तक कम से कम चार लोगों की मौत हुई है और 90 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें 30 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।

कैसे भड़की हिंसा : पत्थरबाजी से फायरिंग तक
गृह मंत्रालय ने बताया कि दोपहर 11:30 बजे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना शुरू किया। कई सरकारी दफ्तरों में आगजनी की गई। हालात बिगड़ते देख पहले लाठीचार्ज और फिर फायरिंग करनी पड़ी।
शाम चार बजे तक प्रशासन ने हालात किसी हद तक काबू में किए, लेकिन पूरे लेह जिले में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया गया। इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक लगा दी गई है ताकि अफवाहें न फैलें।

सुरक्षाबलों की तैनाती और गिरफ्तारियां
स्थिति को काबू में करने के लिए ITBP, CRPF और स्थानीय पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है। गुरुवार तड़के पुलिस ने भारी छापेमारी कर अब तक 50 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें स्थानीय नेता भी शामिल हैं। पुलिस ने कांग्रेस पार्षद फुंतसोग स्तांजिन त्सेपग के खिलाफ FIR दर्ज की है।
भाजपा ने आरोप लगाया है कि त्सेपग हिंसक भीड़ का हिस्सा थे और उन्होंने भीड़ को भड़काया, हालांकि उनकी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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सोनम वांगचुक विवाद के केंद्र में
इस पूरे घटनाक्रम में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का नाम भी सामने आया है। केंद्र सरकार ने उन्हें हिंसा का “मुख्य प्रेरक” बताया है। वांगचुक पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर थे और इस दौरान उन्होंने कई बार अपने भाषणों में अरब स्प्रिंग और नेपाल के जन आंदोलनों का जिक्र कर लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया।
गृह मंत्रालय के अनुसार, वांगचुक के भाषणों से भड़की भीड़ ने भाजपा कार्यालय और लद्दाख हिल काउंसिल के सचिवालय पर हमला किया। जब हिंसा चरम पर थी, वांगचुक ने अचानक अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी।

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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
लेह हिंसा के दौरान भाजपा कार्यालय को जला दिया गया और हिल काउंसिल का कार्यालय भी आग की चपेट में आ गया। भाजपा ने इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पार्टी हिंसा को राजनीतिक स्वार्थ के लिए उकसा रही है।
वहीं कांग्रेस ने सरकार पर लोकतांत्रिक आवाजें दबाने का आरोप लगाया।

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तनावपूर्ण माहौल और भविष्य की चिंता
फिलहाल लेह और आसपास के इलाकों में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात हैं। बाजार, स्कूल, कार्यालय सब कुछ बंद हैं और लोग अपने घरों में सहमे हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि लंबे समय से उपेक्षित गहरे असंतोष का नतीजा है।
यदि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच तत्काल संवाद शुरू नहीं हुआ, तो यह असंतोष भविष्य में और भयानक रूप ले सकता है।

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