8.86 एकड़ जमीन मामले में हेमंत सोरेन को झटका, PMLA कोर्ट में पेशी के निर्देश

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हाईकोर्ट में याचिका की मेंटेनबिलिटी पर सुनवाई जारी, ED को सप्लीमेंट्री एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश

28 अक्टूबर को अगली सुनवाई

रांची : रांची के बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। मामला निचली अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया और उसके खिलाफ दायर आपराधिक रिट याचिका से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, हेमंत सोरेन ने विशेष PMLA अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने और ED की जांच पूरी होने तक आरोप तय नहीं करने की मांग की थी। इससे पहले हाईकोर्ट ने इस राहत के अनुरोध पर रोक लगाने से इनकार किया था और बाद में याचिका पर फैसला सुनाते हुए आपराधिक कार्यवाही से राहत की मांग खारिज की थी।

हाईकोर्ट में मेंटेनबिलिटी पर सुनवाई
मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ में हुई। हेमंत सोरेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस. नागामुथु ने पक्ष रखा। वहीं ED की ओर से ASGI एसवी राजू, वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष रखा। सुनवाई में याचिका की मेंटेनबिलिटी यानी सुनवाई योग्य होने को लेकर भी आपत्तियां सामने आई हैं। अदालत इसी कानूनी पहलू पर आगे सुनवाई कर रही है।

PMLA कोर्ट में आरोप तय करने की प्रक्रिया
यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल में करीब 8.83 से 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित अवैध अधिग्रहण और मनी लॉन्ड्रिंग जांच से संबंधित है। अलग-अलग रिपोर्टों में जमीन का क्षेत्रफल 8.83 और 8.86 एकड़ बताया गया है। रांची की विशेष PMLA अदालत में हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया पहले से चल रही है। 24 सितंबर को अदालत ने बचाव पक्ष को ED की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच के लिए समय देते हुए आरोप तय करने की कार्यवाही को 30 सितंबर तक टाल दिया था। निचली अदालत में इससे पहले मामले के कई अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं। संबंधित आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया है और मामले में ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

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ED की जांच पर क्या है विवाद?
ED ने इस जमीन से जुड़े कथित अवैध अधिग्रहण को मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जोड़ा है। जांच एजेंसी के दस्तावेजों में जमीन के कब्जे, रिकॉर्ड और इससे जुड़े लोगों के बयानों का उल्लेख किया गया है। वहीं हेमंत सोरेन की ओर से निचली अदालत में जारी कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की गई है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ED की ओर से लगाए गए आरोप और जांच में सामने आए दावे अभी न्यायिक रूप से अंतिम रूप से साबित नहीं हुए हैं। मामले में आरोपों का परीक्षण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना है।

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ED को सप्लीमेंट्री एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने मामले में ED को सप्लीमेंट्री एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही इसकी प्रति संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराने के लिए समयसीमा भी तय की गई है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

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क्या है हेमंत सोरेन की याचिका?
हेमंत सोरेन की ओर से दाखिल आपराधिक रिट याचिका में विशेष PMLA अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है। याचिका में यह मांग उठाई गई थी कि ED की जांच पूरी होने तक निचली अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए। इससे पहले 8 जून को विशेष अदालत ने आपराधिक कार्यवाही से राहत देने की मांग खारिज कर दी थी। इसके बाद 31 अगस्त को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। अब हाईकोर्ट में मुख्य सवालों में से एक यह भी है कि जिस कानूनी प्रावधान के तहत याचिका दायर की गई है, उसके तहत यह याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं।

28 अक्टूबर को अगली सुनवाई
फिलहाल हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन को इस मामले में तत्काल राहत नहीं दी है। ED को अतिरिक्त जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है और मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी। इस बीच PMLA कोर्ट में चल रही कार्यवाही और हाईकोर्ट में लंबित याचिका—दोनों की स्थिति पर नजर बनी हुई है। हाईकोर्ट में अभी मामले की सुनवाई जारी है और आरोप तय होना या किसी आरोपी की दोषसिद्धि अलग न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।

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