सैनिकों के साहस और अनुशासन से रूबरू हुए कैंब्रियन स्कूल के छात्र

Cambrian Public School Kanke Road

कर्नल रोहित नंदन प्रसाद ने विद्यार्थियों से साझा किए सैन्य अभियानों के अनुभव, अनुशासन और देश के प्रति जिम्मेदारी पर दिया जोर

रांची: रांची के कांके रोड स्थित कैंब्रियन पब्लिक स्कूल में भारतीय सेना के साहस, शौर्य और पराक्रम पर विद्यार्थियों के लिए विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून के पूर्व छात्र और कॉर्प्स ऑफ सिग्नल के अधिकारी कर्नल रोहित नंदन प्रसाद ने विद्यार्थियों से संवाद किया। कार्यक्रम में उन्होंने विद्यार्थियों के साथ अपने सैन्य अनुभव साझा किए और बताया कि सेना में जिम्मेदारी, अनुशासन, साहस और नैतिकता का क्या महत्व है। संवाद में कक्षा आठवीं और दसवीं के विद्यार्थी शामिल हुए।

विद्यार्थियों से साझा किए सैन्य अभियानों के अनुभव
कर्नल रोहित नंदन प्रसाद ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए एक सैनिक के चरित्र, साहस और पराक्रम से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में सैन्य अभियानों और आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़े अपने अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए। इसके अलावा उन्होंने ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन पराक्रम से जुड़े अनुभवों का भी उल्लेख किया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि सैन्य जीवन केवल शारीरिक साहस तक सीमित नहीं होता, बल्कि निर्णय लेने की क्षमता, मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और जिम्मेदारी भी एक सैनिक के व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

नैतिकता और अखंडता पर दिया जोर
संवाद के दौरान कर्नल रोहित नंदन प्रसाद ने नैतिकता, अखंडता और एकता के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने कार्यों के प्रति ईमानदार रहने और जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज तथा देश के प्रति अपनी भूमिका समझने की बात कही। उन्होंने भारत के दूत यानी ‘एम्बेसडर ऑफ इंडिया’ होने के उत्तरदायित्व की भी चर्चा की। उनके अनुसार देश का प्रतिनिधित्व केवल किसी आधिकारिक पद पर रहते हुए नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और जिम्मेदारियों के जरिए भी किया जा सकता है।

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परिवार और देश के प्रति दोहरी जिम्मेदारी
कार्यक्रम के दौरान कर्नल नंदन ने परिवार और देश के प्रति जिम्मेदारियों के बीच संतुलन के विषय पर भी विद्यार्थियों से बातचीत की। उन्होंने इस संदर्भ में नेल्सन मंडेला के विचारों का उल्लेख करते हुए जिम्मेदारी और कर्तव्य की भावना को समझाया। विद्यार्थियों ने सैन्य जीवन, अभियानों और सैनिकों की दिनचर्या से जुड़े विषयों पर सवाल भी किए। संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को सेना के कार्यों और सैनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिला।

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अनुशासन को चरित्र निर्माण से जोड़ा
विद्यालय की निदेशक-सह-प्राचार्या श्रीमती परमजीत कौर ने कार्यक्रम को विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन में अनुशासन, समयबद्धता, आत्म-नियंत्रण और निरंतरता के लिए सैनिकों का जीवन हमेशा प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि अनुशासन ऐसी आदत है, जो व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करती है और उसे जीवन में उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ाती है। परमजीत कौर ने कहा कि कर्नल रोहित नंदन प्रसाद के साथ विद्यार्थियों का यह संवाद उनके लिए प्रेरणादायक अनुभव साबित होगा और उन्हें जिम्मेदारी, अनुशासन तथा देश के प्रति कर्तव्य की भावना को समझने में मदद मिलेगी।

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आठवीं और दसवीं के विद्यार्थी हुए शामिल
कार्यक्रम में कक्षा आठवीं और दसवीं के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। सैन्य अधिकारी के साथ सीधे संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने सैनिकों के अनुभवों, सैन्य अभियानों और अनुशासन से जुड़े विषयों को समझा। स्कूल प्रबंधन के अनुसार इस तरह के संवाद विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से अलग वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़ने में मदद करते हैं और उनमें जिम्मेदारी, आत्म-अनुशासन तथा देश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। कैंब्रियन पब्लिक स्कूल में आयोजित यह संवाद विद्यार्थियों के लिए भारतीय सेना के जीवन, सैनिकों के कर्तव्य और अनुशासन के महत्व को करीब से समझने का अवसर बना।

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