झारखंड में बड़ा फैसला: 22 परीक्षाएं रद्द, 17 की होगी जांच, छात्रों के लंबे आंदोलन के बीच आया फैसला
JSSC-CGL और 11वीं से 13वीं JPSC भी रद्द
रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार कुल 22 परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया है, जबकि 17 परीक्षाओं की जांच कराने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा 6 परीक्षाओं को स्थगित किया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद राज्य की भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस शुरू हो गई है। खास बात यह है कि रद्द की गई परीक्षाओं में ऐसी परीक्षाएं भी शामिल हैं, जिनके माध्यम से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की नियुक्तियां हो चुकी हैं और वे वर्तमान में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं।
JSSC-CGL और 11वीं से 13वीं JPSC भी रद्द
सरकार के फैसले के तहत जिन प्रमुख परीक्षाओं को रद्द किया गया है, उनमें JSSC-CGL के साथ-साथ 11वीं, 12वीं और 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा CDPO, फूड सेफ्टी ऑफिसर, JET समेत कई अन्य भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द करने का निर्णय लिया गया है। इन परीक्षाओं के रद्द होने से उन अभ्यर्थियों के बीच भी चिंता बढ़ सकती है, जिन्होंने इन परीक्षाओं के आधार पर नौकरी हासिल की है। सरकार के फैसले का असर नियुक्तियों और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े हजारों अभ्यर्थियों पर पड़ने की संभावना है।




17 परीक्षाओं की होगी जांच
सरकार ने सिर्फ परीक्षाएं रद्द करने का निर्णय ही नहीं लिया है, बल्कि 17 परीक्षाओं की जांच के भी निर्देश दिए हैं। जांच के दायरे में वर्ष 2010 से शुरू हुई परीक्षाओं को भी शामिल किया गया है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सरकार अब भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की पुराने स्तर से भी समीक्षा करना चाहती है। जांच में परीक्षा प्रक्रिया, एजेंसी की भूमिका, प्रश्नपत्र से संबंधित व्यवस्थाओं, परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया और नियुक्तियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा सकती है।





छह परीक्षाएं स्थगित
अधिसूचना के अनुसार छह परीक्षाओं को फिलहाल स्थगित किया गया है। इन परीक्षाओं को लेकर आगे सरकार की ओर से नए निर्णय लिए जा सकते हैं। सरकार के इस व्यापक फैसले से झारखंड की भर्ती व्यवस्था में बड़े बदलाव की संभावना बन गई है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्षों के आधार पर और भी कार्रवाई हो सकती है।








छात्रों के लंबे आंदोलन के बीच आया फैसला
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। छात्रों की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में सुधार शामिल रहे हैं। छात्र संगठनों की ओर से लगातार यह आरोप लगाया जाता रहा है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी और कथित अनियमितताओं के कारण मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। अब सरकार की ओर से 22 परीक्षाओं को रद्द करने और 17 परीक्षाओं की जांच के फैसले को इसी व्यापक विवाद के बीच महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों के भविष्य पर भी सवाल?
सबसे बड़ा सवाल उन अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर है, जो पहले ही संबंधित परीक्षाओं में सफल होकर सरकारी सेवा में नियुक्त हो चुके हैं। परीक्षा रद्द होने के बाद उनकी नियुक्तियों की स्थिति क्या होगी और सरकार आगे क्या प्रक्रिया अपनाएगी, यह महत्वपूर्ण विषय बन गया है। विशेषज्ञों और अभ्यर्थियों की नजर अब सरकार की विस्तृत अधिसूचना, जांच के परिणाम और नियुक्त कर्मचारियों से संबंधित अगले आदेशों पर रहेगी।
कुल मिलाकर, झारखंड सरकार का यह फैसला राज्य की भर्ती व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक कदम है। 22 परीक्षाओं को रद्द करना, 17 की जांच और 6 को स्थगित करना बताता है कि सरकार भर्ती प्रक्रिया से जुड़े पुराने और नए मामलों की व्यापक समीक्षा के मूड में है। अब सबसे अहम सवाल यही है कि जांच कितनी निष्पक्ष और समयबद्ध होती है और इससे प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर सरकार क्या रास्ता अपनाती है।





