JPSC की 21 परीक्षाएं रद्द, 1,744 पदों पर असर; JET से Civil Service तक बड़े फैसले
JET रद्द होने से विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति भी प्रभावित
सरकार के आदेश के बाद भर्ती प्रक्रिया पर लगा ब्रेक
रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने JPSC की 21 परीक्षाओं को रद्द करने का आदेश जारी किया है। इन परीक्षाओं में झारखंड पात्रता परीक्षा यानी JTE/JET 2024, सिविल जज, सहायक वन संरक्षक, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, CDPO, फूड सेफ्टी ऑफिसर और विभिन्न तकनीकी एवं शैक्षणिक पदों की भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। सरकार के इस फैसले का असर करीब 1,744 पदों की नियुक्ति प्रक्रियाओं पर पड़ा है। इनमें कुछ परीक्षाएं ऐसी हैं जिनकी प्रक्रिया अभी चल रही थी, जबकि कुछ में परिणाम जारी हो चुके थे और चयनित अभ्यर्थी सरकारी सेवा में योगदान भी कर चुके हैं।
JET रद्द होने से विश्वविद्यालयों में नियुक्ति पर असर
राज्य में विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति और पीएचडी/JRF के लिए आयोजित होने वाली झारखंड पात्रता परीक्षा 2024 को भी रद्द किया गया है। झारखंड गठन के बाद JET का यह केवल दूसरा आयोजन था। इससे पहले वर्ष 2007 में JET आयोजित किया गया था, जिसकी जांच लंबे समय से चल रही है। अब 2024 की परीक्षा रद्द होने के बाद विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया में और देरी की संभावना बढ़ गई है।
CDPO नियुक्ति पर भी पड़ा असर
सरकार के फैसले में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी यानी CDPO के 64 पदों की नियुक्ति भी प्रभावित हुई है। इस परीक्षा का अंतिम परिणाम 10 जनवरी 2026 को जारी किया गया था और अप्रैल 2026 में मुख्यमंत्री की ओर से चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी दिए गए थे। चयनित अभ्यर्थी वर्तमान में अलग-अलग जिलों में कार्यरत बताए जा रहे हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होने के फैसले का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर भी पड़ा है, जिन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद सरकारी सेवा शुरू कर दी थी।
11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा भी रद्द
सरकार के आदेश में 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा भी शामिल है। इसके तहत 342 पदों पर नियुक्ति होनी थी। परीक्षा का विज्ञापन जनवरी 2024 में जारी हुआ था। प्रारंभिक परीक्षा मार्च 2024 और मुख्य परीक्षा जून 2024 में आयोजित की गई थी।
इस परीक्षा में सफल अभ्यर्थी वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया रद्द होने के फैसले ने चयनित अधिकारियों के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
Civil Judge से Forest Range Officer तक कई परीक्षाएं प्रभावित
JPSC की ओर से आयोजित सिविल जज जूनियर डिविजन परीक्षा के 138 पदों की भर्ती प्रक्रिया भी रद्द होने वाली परीक्षाओं में शामिल है। इस परीक्षा का प्रारंभिक परिणाम एक बार जारी होने के बाद अदालत की कार्यवाही के कारण दोबारा जारी किया गया था। इसी तरह सहायक वन संरक्षक के 78 पद और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के 170 पद की भर्ती प्रक्रिया पर भी असर पड़ा है। दोनों परीक्षाओं में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के परिणाम जारी हो चुके थे तथा सफल अभ्यर्थियों की शारीरिक जांच की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी।
14वीं JPSC समेत कई सिविल सेवा भर्तियों पर भी असर
सिविल सेवा परीक्षा 2025 यानी 14वीं JPSC के तहत 103 पदों पर भर्ती होनी थी। प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम भी जारी किया जा चुका था और हजारों अभ्यर्थियों के लिए मुख्य परीक्षा प्रस्तावित थी। इसके अलावा सिविल सेवा बैकलॉग 2025 के 45 पद, सिविल सेवा बैकलॉग 2023 के 26 पद और छठी लिमिटेड उपसमाहर्ता परीक्षा के 28 पद भी सरकार के फैसले से प्रभावित हुए हैं।
Food Safety Officer के चयनित अभ्यर्थी भी प्रभावित
फूड सेफ्टी ऑफिसर के 56 पदों पर भर्ती प्रक्रिया का अंतिम परिणाम मार्च 2026 में जारी हुआ था। चयनित अभ्यर्थी वर्तमान में विभिन्न जिलों में काम कर रहे हैं। सरकार के आदेश के बाद इस नियुक्ति का भविष्य भी जांच और आगे होने वाली कार्रवाई से जुड़ गया है। इसके अलावा ड्रग इंस्पेक्टर, सहायक निदेशक/वरीय वैज्ञानिक अधिकारी, इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर, पॉलिटेक्निक कॉलेजों में व्याख्याता और मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे पदों की भर्ती प्रक्रियाएं भी प्रभावित हुई हैं।
सरकार के फैसले के पीछे क्या है वजह?
JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं की व्यापक समीक्षा का फैसला लिया है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में संभावित खामियों की पहचान करना और भविष्य में भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना बताया जा रहा है। हालांकि, परीक्षा रद्द होने से उन अभ्यर्थियों की चिंता भी बढ़ी है, जिन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद सफलता हासिल की है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच के बाद निर्दोष अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा किस तरह होगी और प्रभावित परीक्षाओं के लिए आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
फिलहाल JPSC की इन 21 परीक्षाओं पर सरकार के फैसले ने झारखंड की भर्ती व्यवस्था को लेकर एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है। एक ओर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग मजबूत हुई है, तो दूसरी ओर हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर सरकार के अगले कदम पर सबकी नजर है।






