JPSC नियुक्ति रद्द करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती, 342 अधिकारियों के भविष्य पर टिकी नजर
नियुक्ति रद्द होने के बाद अभ्यर्थी ने दाखिल की याचिका
सरकार के 18 अगस्त के आदेश पर उठे कानूनी सवाल
दूसरी नौकरी छोड़कर JPSC से मिली सेवा
रांची : झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार की ओर से लिए गए बड़े फैसलों के बीच अब मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। राज्य सरकार की ओर से जारी उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 11वीं से 13वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से हुई नियुक्तियों को भी रद्द करने का फैसला लिया गया है। रांची की याचिकाकर्ता सोनम कुमारी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सरकार के आदेश को निरस्त करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि उन्होंने दूसरी नौकरी छोड़कर JPSC के माध्यम से मिली सेवा ज्वाइन की थी। उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था और इसके बाद उन्होंने प्रशिक्षण भी पूरा किया। लेकिन 18 अगस्त 2026 को जारी सरकारी अधिसूचना के बाद उनकी नियुक्ति भी रद्द होने की स्थिति में आ गई।
दूसरी नौकरी छोड़कर ज्वाइन की थी सरकारी सेवा
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के समक्ष अपनी स्थिति रखते हुए कहा गया है कि JPSC परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने दूसरी जगह की नौकरी छोड़कर झारखंड में सरकारी सेवा ज्वाइन की। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रशिक्षण भी पूरा किया गया। ऐसे में नियुक्ति रद्द होने के फैसले ने उनके सामने रोजगार और भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। याचिका के माध्यम से सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए नियुक्ति रद्द करने वाली अधिसूचना को निरस्त करने का आग्रह किया गया है।
342 चयनित अभ्यर्थी कर रहे थे नौकरी
11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा के जरिए चयनित 342 अभ्यर्थी सरकारी सेवा में कार्यरत थे। सरकार के फैसले के बाद इन अधिकारियों की नियुक्ति और भविष्य की सेवा को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। अब हाईकोर्ट में दाखिल याचिका के बाद इस मामले में न्यायिक समीक्षा की संभावना बढ़ गई है। अदालत के रुख और आगे होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि इन नियुक्तियों को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है।
CID जांच के बाद सरकार ने लिया बड़ा फैसला
दरअसल, झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर CID जांच चल रही है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर सरकार ने उन परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया, जिनमें परीक्षा एजेंसी TDPL की भूमिका सामने आई है। इसके साथ ही सरकार ने केवल मौजूदा विवादित परीक्षाओं तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी। वर्ष 2014 से अब तक आयोजित भर्ती परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की भी जांच कराने का फैसला लिया गया है। सरकार का तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए पूरे मामले की गहराई से जांच जरूरी है।
22 परीक्षाएं रद्द, 6 स्थगित और 17 जांच के दायरे में
सरकार के फैसले के बाद कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की गई है। इसके अनुसार 22 परीक्षाओं को रद्द, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित और 17 परीक्षाओं को संभावित अनियमितताओं की जांच के दायरे में रखा गया है। इस व्यापक कार्रवाई का उद्देश्य भर्ती परीक्षा व्यवस्था में सामने आई शिकायतों और जांच में मिले तथ्यों की समीक्षा करना है। सरकार की ओर से भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने की बात भी कही गई है।
अब अदालत में तय होगी आगे की दिशा
JPSC नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद अब इस पूरे मामले का कानूनी पहलू बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। एक तरफ सरकार का कहना है कि कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और भर्ती व्यवस्था में सुधार जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ चयनित अभ्यर्थी अपने भविष्य और नियुक्ति की सुरक्षा को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं। अब सबकी नजर हाईकोर्ट की सुनवाई पर है। क्या जांच पूरी होने तक नियुक्त अधिकारियों को राहत मिलेगी? क्या सरकार के आदेश पर अदालत कोई अंतरिम फैसला देगी? और 342 चयनित अधिकारियों की नियुक्ति का भविष्य क्या होगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे।




