धुर्वा से लापता अंश–अंशिका मामला: NCPCR ने लिया स्वतः संज्ञान, DGP से मांगी रिपोर्ट

NCPCR

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का सख्त रुख

​​Ranchi : रांची के धुर्वा इलाके से पिछले 12 दिनों से रहस्यमय तरीके से लापता दो मासूम भाई–बहन अंश और अंशिका के मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा को पत्र भेजकर मामले में अब तक की कार्रवाई और जांच की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

डीजीपी से क्या जानकारी मांगी गई
NCPCR ने यह नोटिस मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर जारी किया है। आयोग ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2005 की धारा 13 के तहत पत्र लिखते हुए स्पष्ट किया कि बच्चों के अधिकारों से जुड़े कानूनों—POCSO एक्ट, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और शिक्षा का अधिकार अधिनियम—के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी उसका संवैधानिक दायित्व है। आयोग ने झारखंड पुलिस और प्रशासन से बच्चों की तलाश में की गई अब तक की कार्रवाइयों, छापेमारी, तकनीकी जांच और समन्वय प्रयासों का पूरा ब्योरा मांगा है। यह पत्र 13 जनवरी 2026 को जारी किया गया है।

क्या है पूरा मामला
2 जनवरी को रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र अंतर्गत मौसीबाड़ी से 5 वर्षीय अंश कुमार और 4 वर्षीय उसकी बहन अंशिका कुमारी बिस्कुट खरीदने घर से निकले थे, लेकिन इसके बाद दोनों का कोई सुराग नहीं मिला। 12 दिन बीत जाने के बावजूद बच्चों का पता नहीं चल पाया है।

इनाम बढ़ा, कई राज्यों में तलाश
मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस ने पहले घोषित 51 हजार रुपये के इनाम को बढ़ाकर कुल 4 लाख रुपये कर दिया है—अब दोनों बच्चों की सूचना देने पर प्रति बच्चे 2-2 लाख रुपये मिलेंगे। रांची पुलिस की एसआईटी की कई टीमें झारखंड के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र में जांच कर रही हैं। झारखंड CID की टीम भी इस पूरे मामले में रांची पुलिस को सहयोग दे रही है।

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बढ़ता दबाव, तेज हुई जांच
NCPCR के हस्तक्षेप के बाद मामले में प्रशासनिक दबाव बढ़ गया है। अब उम्मीद की जा रही है कि बच्चों की तलाश और जांच प्रक्रिया और तेज होगी तथा जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

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