ILS छात्रों ने रांची विश्वविद्यालय पर किया केस, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

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Ranchi: इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (ILS) के छात्रों ने अपने शैक्षणिक भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों को लेकर रांची विश्वविद्यालय के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। लंबे समय से चल रहे विरोध और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कथित तौर पर छात्रों की मांगों की अनदेखी के बाद अब यह मामला न्यायिक दखल तक पहुंच गया है।

छात्रों का मुख्य आरोप है कि उन्हें जो डिग्रियां प्रदान की जा रही हैं, वे यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट के बजाय “इंस्टिट्यूट” के नाम से जारी की जा रही हैं, जो नियमों के विरुद्ध है। छात्रों का कहना है कि यदि यह वास्तव में विश्वविद्यालय का डिपार्टमेंट है, तो फिर डिग्री में इंस्टिट्यूट का नाम क्यों दर्शाया जा रहा है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क है कि यह एक डिपार्टमेंट है, जिसे केवल “इंस्टिट्यूट” के नाम से संचालित किया जा रहा है, लेकिन इसी बिंदु पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

छात्रों का आरोप है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों के अनुसार यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट में HOD का प्रावधान होता है, डायरेक्टर का नहीं, जबकि ILS में डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर जैसे पद मौजूद हैं। इससे संस्थान की वैधानिक स्थिति को लेकर गंभीर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

इसके अलावा छात्रों ने कई अन्य बुनियादी कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि संस्थान में मूट कोर्ट की समुचित व्यवस्था नहीं है, फैकल्टी की संख्या मात्र 6 है जबकि नियमानुसार कम से कम 10 फैकल्टी होनी चाहिए। साथ ही अब तक स्थायी (परमानेंट) डायरेक्टर की नियुक्ति भी नहीं की गई है, जो शैक्षणिक मानकों के खिलाफ है।

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छात्रों का दावा है कि उन्होंने पिछले कई महीनों में विश्वविद्यालय के डीन, रजिस्ट्रार और अन्य पदाधिकारियों से कई बार मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। इसी कारण मजबूर होकर छात्रों को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

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मामले की पहली सुनवाई आज माननीय न्यायमूर्ति जस्टिस राजेश कुमार के समक्ष हुई। कोर्ट ने छात्रों की याचिका पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा हेतु उपयुक्त कार्रवाई की जाएगी। न्यायालय ने विपक्षी पक्ष—जिसमें डीन, सीवीएस, डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर, रजिस्ट्रार, रांची विश्वविद्यालय सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं—को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जवाब में यह बताना होगा कि इस पूरे मामले में कहां और किस स्तर पर त्रुटि हुई है, छात्रों के भविष्य से कथित खिलवाड़ के लिए कौन जिम्मेदार है, और नियमों का उल्लंघन यदि हुआ है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी।

इस याचिका में मुख्य रूप से अंबेश चौबे, आर्यन देव, तुषार दुबे, देवेश नंद तिवारी सहित ILS के अन्य छात्र याचिकाकर्ता के रूप में शामिल हैं। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हैं, जिससे ILS के सैकड़ों छात्रों के भविष्य की दिशा तय होगी।

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