रांची के धुर्वा से लापता अंश-अंशिका: 8 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं, पुलिस पर सवाल

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रांची : राजधानी रांची के धुर्वा इलाके से 2 जनवरी को रहस्यमय तरीके से गायब हुए दो मासूम भाई-बहन अंश और अंशिका को लापता हुए 8 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पुलिस को कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। बच्चों की सुरक्षित वापसी को लेकर परिवार की उम्मीदें टूटती जा रही हैं और पूरे इलाके में भय व आक्रोश का माहौल है।

मां की हालत नाजुक, बार-बार हो रही बेहोश
बच्चों के लापता होने के बाद से उनकी मां की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। परिजनों के अनुसार, मां ने खाना-पीना तक छोड़ दिया है और बच्चों की याद में बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। रिश्तेदार ने बताया कि मां एक कमरे में बेसुध पड़ी रहती हैं और किसी तरह खुद को संभाल नहीं पा रही हैं।

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परिवार और बस्ती में पुलिस के प्रति गुस्सा
आठ दिन बीत जाने के बावजूद कोई सुराग नहीं मिलने से स्थानीय लोगों में रांची पुलिस के प्रति गहरा आक्रोश है। बस्तीवासियों का आरोप है कि यदि पुलिस ने 2 जनवरी को ही पूरी गंभीरता से कार्रवाई शुरू की होती, तो शायद आज दोनों बच्चे सुरक्षित घर लौट आए होते।

स्थानीय निवासी ने बताया कि बच्चे दोपहर करीब ढाई बजे घर से निकले थे। परिजनों ने घंटों तलाश के बाद शाम 6 बजे धुर्वा थाना में सूचना दी, लेकिन पुलिस ने तत्काल खोज अभियान शुरू करने के बजाय परिजनों से ही सवाल-जवाब में समय गंवा दिया।

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पिता बोले – सिर्फ आश्वासन मिल रहा
बच्चों के पिता सुनील कुमार ने कहा कि परिवार की किसी से कोई दुश्मनी नहीं है। वे डेढ़ साल पहले रांची आए और दूध का कारोबार शुरू किया। बच्चे छह महीने पहले ही रांची आए थे और नियमित रूप से स्कूल व दुकान जाया करते थे।
उन्होंने कहा,

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“पुलिस बस आश्वासन दे रही है, लेकिन हमारे बच्चों का कोई पता नहीं चल रहा।”

पुलिस ने अब तक क्या-क्या किया?
बच्चों की तलाश में पुलिस ने व्यापक स्तर पर कार्रवाई की है—

  • 51,000 रुपये का इनाम घोषित
  • धुर्वा इलाके में हाउस सर्च अभियान
  • डॉग स्क्वॉड की तैनाती, बच्चों के कपड़ों से सर्च
  • रांची, हटिया, टाटीसिलवे, नामकुम रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड की जांच
  • 1000 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले
  • कॉल डंप और FSL जांच, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं

इसके बावजूद पुलिस को अब तक कोई निर्णायक सुराग नहीं मिला है।

SIT गठित, हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT (विशेष जांच दल) का गठन किया गया है, जिसमें ग्रामीण एसपी, सिटी एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर और तकनीकी सेल को शामिल किया गया है।
हटिया डीएसपी प्रमोद मिश्रा स्वयं बच्चों की तलाश में लगातार जुटे हुए हैं।

इस बीच झारखंड हाईकोर्ट ने भी इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है, जिससे पुलिस पर दबाव और बढ़ गया है। राज्य की डीजीपी तदाशा मिश्रा लगातार जांच की निगरानी कर रही हैं।

दहशत में बस्ती, बच्चों पर कड़ी निगरानी
घटना के बाद पूरे इलाके में डर का माहौल है। अब माता-पिता अपने बच्चों को अकेले स्कूल या दुकान भेजने से बच रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि वर्षों में पहली बार ऐसी घटना हुई है, जिसने पूरे मोहल्ले को झकझोर दिया है।

सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम
आखिर अंश और अंशिका कहां हैं? आठ दिन की गहन जांच, तकनीकी संसाधन और पुलिस बल के बावजूद खाली हाथ रहना, जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पूरा राज्य अब इन मासूमों की सुरक्षित वापसी की प्रार्थना कर रहा है।

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