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सरला बिरला विश्वविद्यालय में ‘कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम’, भारतीय संस्कृति और शिक्षा के मूल्यों पर हुआ मंथन

Krishnam Vande Jagadgurum

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और शिक्षक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा

कर्मयोग और मानवीय मूल्यों पर वक्ताओं ने रखे विचार

रांची: सरला बिरला विश्वविद्यालय (SBU) में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और शिक्षक दिवस के अवसर पर ‘कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षा में मानवीय मूल्यों की भूमिका पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस दौरान विद्यार्थियों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम को आकर्षक बना दिया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के माननीय महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि समाज के लिए उपयोगी और जिम्मेदार नागरिक बनना है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में भी शिक्षक का विवेक, प्रेरणा और आत्मीयता महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

AI के दौर में भी शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण
प्रो. गोपाल पाठक ने विद्यार्थियों से श्रीकृष्ण के कर्मयोग के संदेश से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी विद्यार्थियों को अपने कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए। उन्होंने शिक्षा को जीवन से जोड़ते हुए कहा कि ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास करना और उसे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने योग्य बनाना है। तकनीक शिक्षा के तरीकों को बदल सकती है, लेकिन शिक्षक द्वारा दी जाने वाली प्रेरणा और मानवीय मार्गदर्शन का महत्व बना रहेगा।

भारतीय संस्कृति और परंपराओं से प्रेरणा लेने का आह्वान
विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. सी. जगनाथन ने कहा कि भारत की संस्कृति और परंपराएं विश्व में अद्वितीय हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय मूल्यों को समझने और महान व्यक्तित्वों के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को सावित्रीबाई फुले, हेलेन केलर, ऐनी सुलिवन और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन व्यक्तित्वों का जीवन संघर्ष, शिक्षा, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति का उदाहरण है।

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शिक्षक दिखाता है सही रास्ता, निर्णय विद्यार्थी की जिम्मेदारी
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. एस. बी. दंडिन ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स तथा योग एवं नेचुरोपैथी विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को सही और गलत के बीच अंतर समझने का मार्ग दिखाता है, लेकिन सही निर्णय लेना अंततः विद्यार्थी की जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने निर्णयों के प्रति सजग और जिम्मेदार रहने का आह्वान किया।

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श्रीकृष्ण और डॉ. राधाकृष्णन से जुड़ा शिक्षक दिवस का संदेश
कार्यक्रम में प्रो. नीलिमा पाठक ने कहा कि श्रीकृष्ण ने मानव जीवन में धर्म और कर्तव्य का मार्ग दिखाया, वहीं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने शिक्षक की गरिमा को स्थापित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल विद्यार्थियों को ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उनके भीतर आशा, विश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा पैदा करना भी है। एक शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मार्गदर्शक होता है।

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विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए सांस्कृतिक कार्यक्रम
‘कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम’ कार्यक्रम में सरला बिरला विश्वविद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और शिक्षक दिवस के संदेश को जोड़ते हुए आयोजित कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और शिक्षा के मूल्यों की झलक देखने को मिली। इस अवसर पर SBU के माननीय प्रतिकुलाधिपति श्री बी. के. दलान और माननीय राज्यसभा सांसद सह निदेशक, प्लानिंग एंड डेवलपमेंट डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने भी शिक्षक दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर को शुभकामना संदेश प्रेषित किया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और जीवन में कर्तव्य एवं मानवीय मूल्यों के महत्व से जोड़ने का प्रयास किया गया।

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