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JPSC 14वीं परीक्षा धांधली में CCTV से बड़ा खुलासा, सोते रहे अभ्यर्थी फिर भी मिले 90+ सही जवाब

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CID जांच में कई चौंकाने वाले दावे, TDPL कर्मी की कार्बन कॉपी में 31 उत्तर, मूल OMR में 147

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID के अनुसंधान में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर और चौंकाने वाले तथ्य सामने आने का दावा किया गया है। जांच में परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज, OMR शीट, कार्बन कॉपी, मोबाइल वीडियो, कॉल डिटेल और परीक्षा सामग्री की कस्टडी से जुड़े रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया है। CID जांच के मुताबिक, कुछ ऐसे अभ्यर्थियों की गतिविधियां CCTV फुटेज में सामने आईं, जिनके परीक्षा कक्ष में वास्तविक प्रदर्शन और बाद में OMR में दर्ज उत्तरों के बीच कथित तौर पर बड़ा अंतर मिला। जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ अभ्यर्थी परीक्षा के दौरान कम प्रश्न हल करते या निष्क्रिय नजर आए, लेकिन उनकी OMR शीट में बड़ी संख्या में उत्तर दर्ज पाए गए। हालांकि, इन निष्कर्षों को लेकर अंतिम कानूनी जिम्मेदारी और दोष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगी। किसी अभ्यर्थी का नाम जांच में सामने आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता।

सोते और जम्हाई लेते रहे, OMR में मिले 91 और 92 सही उत्तर
CID जांच में 14वीं JPSC के सफल अभ्यर्थी ओम प्रकाश राणा से जुड़ा मामला खास तौर पर सामने आया है। जांच के अनुसार, परीक्षा केंद्र के CCTV फुटेज में ओम प्रकाश राणा परीक्षा के दौरान कथित तौर पर ज्यादातर समय सोते और जम्हाई लेते दिखाई दिए। इसके बावजूद उनकी दोनों परीक्षाओं की OMR शीट की जांच में क्रमशः 91 और 92 उत्तर सही पाए जाने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी ने CCTV में दिख रही गतिविधियों और OMR में दर्ज उत्तरों के बीच कथित अंतर को जांच का महत्वपूर्ण बिंदु माना है।

वंदना कुमारी के मामले में भी सामने आया बड़ा अंतर
CID के अनुसार, वंदना कुमारी के परीक्षा केंद्र के CCTV फुटेज का भी गहन विश्लेषण किया गया। जांच में दावा किया गया कि उन्होंने दोनों पेपर में लगभग 49 और 30 प्रश्न ही हल किए थे। लेकिन बाद में उनकी OMR शीट में क्रमशः 98 और 92 उत्तर दर्ज मिले। CID के मुताबिक, CCTV फुटेज में दिखाई देने वाली उनकी वास्तविक गतिविधि और OMR शीट में दर्ज उत्तरों के बीच यह अंतर परीक्षा प्रक्रिया में कथित छेड़छाड़ की ओर इशारा करता है।

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OMR में एक भी गोला नहीं, फिर भी मिले 292 अंक
अरविंद कुमार से जुड़ा मामला भी CID जांच में महत्वपूर्ण बताया गया है। जांच के अनुसार, अरविंद कुमार ने परीक्षा के दौरान OMR शीट में कोई गोला नहीं भरा था। इसके बावजूद उन्हें कथित तौर पर 292 अंक दिए गए। जांच में यह भी बताया गया है कि अरविंद कुमार ने बाद में खुद स्वीकार किया कि उन्होंने OMR शीट खाली छोड़ी थी और उसकी कार्बन कॉपी जला दी थी। यदि जांच में सामने आए इन तथ्यों की न्यायिक स्तर पर पुष्टि होती है, तो यह परीक्षा की OMR प्रक्रिया और मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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TDPL कर्मी की कार्बन कॉपी में 31 उत्तर, मूल OMR में 147
CID जांच में परीक्षा एजेंसी TDPL से जुड़े एक कर्मचारी रक्षक सिंह का मामला भी सामने आया है। जांच के मुताबिक, रक्षक सिंह की कार्बन कॉपी में केवल 31 उत्तर दर्ज थे, जबकि मूल OMR शीट में 147 उत्तर पाए गए। इसके अलावा, उसके मोबाइल फोन से मिले एक वीडियो में मूल OMR प्रति कथित तौर पर स्ट्रांग रूम के बाहर TDPL कर्मियों के पास दिखाई देने की बात जांच में कही गई है। CID इस पूरे घटनाक्रम को OMR की सुरक्षा और कस्टडी से जोड़कर देख रही है।

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अभय तिवारी तीन परीक्षाओं में सफल होने का दावा
जांच में अभय तिवारी का नाम भी महत्वपूर्ण बताया गया है। CID के अनुसार, अभय तिवारी खुद तीन अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं—ACF, FRO और खाद्य सुरक्षा अधिकारी—में सफल रहा। जांच में यह भी दावा किया गया है कि उसकी पत्नी, भाई और साला भी कथित सेटिंग के माध्यम से 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए। इन दावों की वास्तविकता और संबंधित लोगों की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

बुदेश्वर भगत के लैपटॉप में मिली 24 नामों की सूची
CID जांच में एजेंट बताए जा रहे बुदेश्वर भगत के लैपटॉप से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने का दावा किया गया है। जांच के मुताबिक, बुदेश्वर भगत से जुड़े 11 अभ्यर्थी 14वीं JPSC PT में सफल हुए। इसके अलावा उसके लैपटॉप में 24 अभ्यर्थियों की सूची मिली थी। जांच एजेंसी के अनुसार, यह सूची परिणाम जारी होने से करीब दो महीने पहले की थी। उस समय OMR शीट कथित तौर पर TDPL के पास थीं। CID इस तथ्य को परीक्षा परिणाम और कथित नेटवर्क के बीच संभावित संबंध की जांच के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देख रही है।

जहां OMR स्कैन हुई, वहां CCTV को लेकर भी सवाल
CID जांच में OMR और आंसर शीट की स्कैनिंग प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच के अनुसार, जिन स्थानों पर OMR और आंसर शीट की स्कैनिंग की जा रही थी, वहां CCTV कैमरे कथित तौर पर फंक्शनल नहीं थे या उनकी पर्याप्त निगरानी नहीं की गई। CID का दावा है कि इससे परीक्षा सामग्री में कथित छेड़छाड़ का अवसर पैदा हुआ और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित नहीं रह सके।

करीब दो महीने तक एजेंसी के पास कॉपियां रखने का दावा
जांच में OMR शीट की चेन ऑफ कस्टडी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। CID के अनुसार, स्कैनिंग के दौरान परीक्षा की कॉपियां बिना पर्याप्त प्राधिकृत प्रक्रिया के करीब दो महीने तक एजेंसी के पास रखी गईं। जांच में इसे निर्धारित कस्टडी प्रक्रिया के विपरीत बताया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, स्ट्रांग रूम तथा OMR और आंसर शीट की कस्टडी परीक्षा नियंत्रक और JPSC अध्यक्ष के निर्देशन में थी। इस दौरान CCTV व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं।

एल. ख्यांग्ते और आरोपियों के बीच लगातार संपर्क का दावा
JPSC परीक्षा अनियमितता मामले की जांच में तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के संपर्कों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। CID के अनुसार, ख्यांग्ते की आरोपी धर्मेंद्र कुमार से कई बार फोन पर बातचीत हुई। जांच में उनके अभय तिवारी समेत अन्य आरोपियों और सह-अभियुक्तों से संपर्क का भी दावा किया गया है। जांच के मुताबिक, परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से 304 बार, सह-अभियुक्त सोनू कुमार से 139 बार, अभय तिवारी से 12 बार और उमेश कुमार से 2 बार संपर्क होने की बात सामने आई है। हालांकि, केवल फोन कॉल की संख्या अपने आप में किसी अपराध में संलिप्तता का निर्णायक प्रमाण नहीं होती। इन संपर्कों की प्रकृति, बातचीत का विषय और अन्य साक्ष्यों के साथ उनका संबंध जांच और अदालत में महत्वपूर्ण होगा।

CCTV, OMR और कॉल डिटेल से जुड़ रही जांच की कड़ियां
CID जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह बताया जा रहा है कि एजेंसी ने केवल एक साक्ष्य पर निर्भर रहने के बजाय CCTV फुटेज, OMR शीट, कार्बन कॉपी, मोबाइल वीडियो, कॉल डिटेल और परीक्षा सामग्री की कस्टडी से जुड़े रिकॉर्ड को आपस में मिलाने की कोशिश की है। जांच में यदि CCTV में दिखाई देने वाली अभ्यर्थियों की गतिविधियां और उनकी OMR शीट के उत्तरों के बीच अंतर स्थापित होता है, तो यह परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकता है। फिलहाल इन सभी दावों का अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

JPSC परीक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
CID जांच में सामने आए इन कथित तथ्यों ने JPSC की परीक्षा व्यवस्था, OMR की सुरक्षा, स्ट्रांग रूम की निगरानी, स्कैनिंग प्रक्रिया, एजेंसी की भूमिका और परीक्षा सामग्री की चेन ऑफ कस्टडी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि परीक्षा केंद्र में किसी अभ्यर्थी की गतिविधि और उसकी OMR शीट में दर्ज उत्तरों के बीच इतना बड़ा अंतर था, तो मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान इसे क्यों नहीं पकड़ा गया? अब जांच का अगला चरण यह तय करने पर केंद्रित होगा कि कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और परीक्षा परिणाम को प्रभावित करने के लिए किस तरह की व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया।

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