JPSC मेधा घोटाला: CID के शिकंजे में आया पूर्व चेयरमैन का करीबी, 15 तक पहुंची गिरफ्तार आरोपियों की संख्या
धर्मेंद्र हिरासत में, टीडीपीएल और बिचौलियों के नेटवर्क की परतें खुल रहीं; करोड़ों के ‘सेटिंग सिंडिकेट’ की जांच तेज

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित मेधा घोटाले और परीक्षा अनियमितताओं की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पूरे नेटवर्क से जुड़े नए चेहरे सामने आ रहे हैं। झारखंड पुलिस की अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने बुधवार को मामले में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए धर्मेंद्र नामक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि धर्मेंद्र लंबे समय तक पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के आवासीय कार्यालय में कार्यरत रहा है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसकी भूमिका केवल कार्यालयी कार्यों तक सीमित थी या वह कथित परीक्षा सिंडिकेट की गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ था।
तीन और बिचौलियों की गिरफ्तारी के बाद बढ़ा जांच का दायरा
इससे पहले मंगलवार को CID ने इस मामले में उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, इन तीनों पर परीक्षा संचालन करने वाली निजी एजेंसी टीडीपीएल (TSR Data Processing Pvt. Ltd.) के साथ मिलकर अभ्यर्थियों की कथित ‘सेटिंग-गेटिंग’ कराने का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक, इन नई गिरफ्तारियों के बाद JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। हालांकि, इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि CID की ओर से अभी नहीं की गई है।

पूर्व चेयरमैन के करीबी की भूमिका खंगाल रही CID
धर्मेंद्र की हिरासत को जांच में एक अहम कड़ी माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय तक एल. ख्यांग्ते के आवासीय कार्यालय में कार्यरत था और कई प्रशासनिक गतिविधियों से परिचित था। CID अब यह जांच कर रही है कि परीक्षा संचालन, दस्तावेजों की आवाजाही या अन्य संवेदनशील प्रक्रियाओं में उसकी कोई भूमिका थी या नहीं। अधिकारियों का मानना है कि उससे पूछताछ के बाद कई और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
रिमांड पर लिए गए तीन मुख्य आरोपियों से कड़ी पूछताछ
इधर, मंगलवार को कोर्ट से रिमांड पर लिए गए तीन मुख्य आरोपियों से CID ने पूरे दिन गहन पूछताछ की। इनमें शामिल हैं—
- रामवीर सिंह – टीडीपीएल के निदेशक
- अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी – कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर
- मोहम्मद उस्मान – प्रोग्रामर
पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने OMR शीट में कथित टेंपरिंग, परीक्षा परिणाम में हेरफेर और डेटा प्रोसेसिंग से जुड़े कई तकनीकी सवाल पूछे।

OMR टेंपरिंग और पैसों के लेनदेन की जांच
CID अब केवल परीक्षा प्रक्रिया तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे आर्थिक नेटवर्क की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर परीक्षा पास कराने के नाम पर कितने अभ्यर्थियों से धन वसूला गया, यह रकम किन-किन लोगों तक पहुंची और इसका बंटवारा किस प्रकार किया गया। जांच अधिकारी बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन, मोबाइल चैट और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच कर रहे हैं, ताकि पूरे नेटवर्क का वित्तीय ढांचा सामने आ सके।

बढ़ सकती हैं और गिरफ्तारियां
सूत्रों का कहना है कि अब तक मिले साक्ष्यों और पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर आने वाले दिनों में कई और लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। CID की जांच अब कथित बिचौलियों, परीक्षा एजेंसी, पूर्व अधिकारियों और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के बीच संबंधों को जोड़ने पर केंद्रित है। जांच एजेंसी का मानना है कि जैसे-जैसे डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों का विश्लेषण आगे बढ़ेगा, इस कथित परीक्षा सिंडिकेट से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।






