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RBI MPC Meeting: रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, FY27 में महंगाई 5% रहने का अनुमान; महंगाई बढ़ने का भी अलर्ट

RBI MPC Meeting

रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 6.7% किया गया

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee – MPC) ने बुधवार को अपनी द्विमासिक समीक्षा बैठक के नतीजों की घोषणा करते हुए प्रमुख नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया। आरबीआई ने रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। साथ ही चालू वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर 5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। हालांकि केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी है कि खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के कारण आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

रेपो रेट में नहीं हुआ बदलाव
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही मौद्रिक नीति के रुख (Policy Stance) को भी ‘तटस्थ’ (Neutral) बनाए रखा गया है।आरबीआई का मानना है कि फिलहाल आर्थिक वृद्धि और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। ऐसे में ब्याज दरों में कटौती या बढ़ोतरी के बजाय मौजूदा स्थिति को बनाए रखना अधिक उपयुक्त माना गया।

महंगाई का ग्राफ रहेगा उतार-चढ़ाव वाला
केंद्रीय बैंक के अनुसार चालू वित्त वर्ष में महंगाई का रुख सभी तिमाहियों में एक जैसा नहीं रहेगा। आरबीआई के अनुमान के मुताबिक—

  • दूसरी तिमाही (Q2): महंगाई दर 4.7%
  • तीसरी तिमाही (Q3): बढ़कर 5.9%
  • चौथी तिमाही (Q4): घटकर 5.5%
  • FY28 की पहली तिमाही (Q1): करीब 5.3%
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आरबीआई का कहना है कि खाद्यान्न उत्पादन, मानसून की स्थिति और वैश्विक ऊर्जा कीमतों के आधार पर महंगाई में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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कोर इन्फ्लेशन फिलहाल नियंत्रण में
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि जून महीने में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.4 प्रतिशत हो गई, जबकि इससे पहले लगातार 16 महीनों तक यह आरबीआई के 4 प्रतिशत लक्ष्य से नीचे बनी हुई थी। हालांकि राहत की बात यह है कि कोर इन्फ्लेशन (खाद्य और ईंधन को छोड़कर) मई और जून दोनों महीनों में 3.9 प्रतिशत पर स्थिर रही। यदि कीमती धातुओं को भी अलग कर दिया जाए तो यह दर 2.3 से 2.5 प्रतिशत के बीच रही, जिससे संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में मांग आधारित व्यापक महंगाई का दबाव फिलहाल सीमित है।

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GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ा
आरबीआई ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक रुख अपनाते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार घरेलू मांग में मजबूती, विनिर्माण क्षेत्र में सुधार और निर्यात में बेहतर प्रदर्शन भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है।

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महंगाई पर बने हुए हैं कई बड़े जोखिम
आरबीआई ने स्पष्ट किया कि आने वाले महीनों में कुछ बाहरी और घरेलू कारक महंगाई को प्रभावित कर सकते हैं।

इनमें प्रमुख हैं—

  • अल नीनो के कारण मानसून पर संभावित असर
  • वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
  • पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव
  • खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियां

इन्हीं जोखिमों को देखते हुए आरबीआई ने फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।

फिलहाल इंतजार की रणनीति
आरबीआई का कहना है कि महंगाई के रुझान पर अधिक स्पष्टता आने तक नीतिगत दरों में बदलाव करना जल्दबाजी होगी। यदि आने वाले महीनों में महंगाई नियंत्रण में रहती है और आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तभी आगे की मौद्रिक नीति में बदलाव पर विचार किया जाएगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रेपो रेट स्थिर रहने से फिलहाल बैंक ऋण, होम लोन और अन्य उधार दरों में तत्काल कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा।

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