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पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 5 गुना बढ़ी, ₹2.50 हुई; डीजल पर ₹7.50 की कटौती, जानें वजह

Petrol Export Duty

नई दिल्ली: देश में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनाए रखने और घरेलू बाजार में ईंधन की संभावित कमी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने पेट्रोल पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी को बढ़ाकर ₹2.50 प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में ₹7.50 प्रति लीटर की कटौती की गई है। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव के जरिए घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता को प्राथमिकता देने की कोशिश की जा रही है।

पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी पांच गुना बढ़ी
सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी में बड़ा इजाफा किया है। नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी ₹2.50 प्रति लीटर कर दी गई है। यह पहले की तुलना में करीब पांच गुना अधिक है। एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से घरेलू बाजार की तुलना में विदेशों में पेट्रोल भेजना निर्यातकों के लिए अपेक्षाकृत कम आकर्षक हो सकता है। इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी ₹7.50 घटी
वहीं, डीजल के मामले में सरकार ने इसके उलट फैसला लिया है। डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में ₹7.50 प्रति लीटर की कमी की गई है। इस बदलाव का असर रिफाइनरियों और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर पड़ सकता है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग ड्यूटी संरचना तय की है, जिसके पीछे घरेलू ईंधन उपलब्धता और बाजार की परिस्थितियां महत्वपूर्ण कारक माने जा रहे हैं।

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देश में फ्यूल की कमी रोकना क्यों जरूरी?
पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू उपलब्धता सरकार के लिए अहम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई से जुड़े जोखिम बढ़ने की स्थिति में निर्यात बढ़ने से घरेलू बाजार में उपलब्धता पर दबाव आ सकता है। ऐसे में पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का उद्देश्य घरेलू बाजार में पेट्रोल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना हो सकता है। हालांकि, पेट्रोल पंप पर ग्राहकों को मिलने वाली कीमत केवल एक्सपोर्ट ड्यूटी से तय नहीं होती। इसमें कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनिंग लागत, टैक्स, परिवहन और अन्य बाजार कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा असर?
एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल या डीजल की खुदरा कीमतों में तत्काल उतनी ही राशि का बदलाव होगा। घरेलू पंप कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं। पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से निर्यात की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है, जबकि डीजल पर ड्यूटी घटने से निर्यातकों को राहत मिल सकती है। वास्तविक असर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति तथा तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा।

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सरकार की नजर घरेलू फ्यूल सप्लाई पर
पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में पांच गुना वृद्धि और डीजल पर ₹7.50 की कटौती को सरकार की व्यापक पेट्रोलियम नीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता और सप्लाई व्यवस्था को प्रभावित होने से बचाना बताया जा रहा है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनिंग मार्जिन और पेट्रोलियम उत्पादों की वैश्विक मांग के आधार पर इस फैसले का असर स्पष्ट होगा।

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