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Starlink विवाद पर रिलायंस का जवाब—प्रतिस्पर्धा से नहीं डरते, मस्क ने अंबानी पर उठाए थे सवाल

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सरकार ने पक्षपात के आरोपों को किया खारिज

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट बाजार पर नजर

New Delhi: एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक की भारत में लॉन्चिंग में हो रही देरी को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज और मस्क के बीच जुबानी टकराव तेज हो गया है। मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने साफ कहा है कि वह प्रतिस्पर्धा से कभी नहीं डरी और भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन बाजार में स्टारलिंक का स्वागत करती है। कंपनी ने यह भी कहा कि भारतीय और विदेशी, सभी कंपनियों को देश के कानूनों और नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।

रिलायंस ने क्या कहा?
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 16 अक्टूबर को जारी बयान में कहा कि भारत ऐसा बाजार है, जहां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेश तथा नवाचार का स्वागत किया जाता है। कंपनी के मुताबिक, सरकार सभी आवेदकों पर समान प्रक्रिया लागू करने की बात कह चुकी है और Jio की अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं भी जरूरी मंजूरियों का इंतजार कर रही हैं। रिलायंस ने अपने बयान में कहा, “हमने कभी प्रतिस्पर्धा से डर महसूस नहीं किया।” कंपनी ने प्रतिस्पर्धा को ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने की कसौटी बताया और कहा कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन क्षेत्र में स्टारलिंक समेत सभी कंपनियों का स्वागत है।

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एलन मस्क ने मुकेश अंबानी पर क्या आरोप लगाए?
स्टारलिंक की भारत में व्यावसायिक सेवाएं शुरू होने में हो रही देरी के बीच एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित उनकी कंपनी की भारतीय बाजार में एंट्री रोकने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद मस्क ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी का नाम लेते हुए सवाल उठाया कि क्या भारत में फैसलों पर अंबानी का असाधारण प्रभाव है। ये मस्क के आरोप और टिप्पणियां हैं; रिलायंस ने किसी तरह की बाधा खड़ी करने के आरोप को स्वीकार नहीं किया है।

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Jio और Starlink दोनों को मंजूरी का इंतजार
रिलायंस ने अपने जवाब में यह भी रेखांकित किया कि Jio की सैटेलाइट सेवाएं भी अभी जरूरी सरकारी मंजूरियों की प्रतीक्षा कर रही हैं। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के इच्छुक प्रमुख खिलाड़ियों में स्टारलिंक, Jio Satellite Communications और भारती समूह समर्थित Eutelsat OneWeb शामिल हैं।

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रिपोर्टों के अनुसार, इन कंपनियों को सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए लाइसेंस संबंधी अनुमति मिली है, लेकिन व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने के लिए जरूरी सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन जैसी प्रक्रियाएं अहम बनी हुई हैं।

सरकार ने पक्षपात के आरोपों को किया खारिज
स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी को लेकर उठे सवालों पर भारत सरकार ने कहा है कि भारतीय और विदेशी कंपनियों के लिए नियामकीय प्रक्रिया समान है। संचार मंत्रालय के अनुसार, संबंधित कंपनियां सुरक्षा मंजूरी की प्रक्रिया में हैं और किसी एक कंपनी के साथ भेदभाव किए जाने का आरोप सही नहीं है।

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट बाजार पर नजर
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं से दूरदराज और ऐसे क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने की संभावना है, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क या फाइबर कनेक्शन पहुंचाना मुश्किल है। इस क्षेत्र में स्टारलिंक, Jio और OneWeb जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी भविष्य में प्रतिस्पर्धा को बढ़ा सकती है।

हालांकि, कंपनियों के व्यावसायिक लॉन्च का समय सरकारी मंजूरियों, सुरक्षा शर्तों और स्पेक्ट्रम आवंटन पर निर्भर करेगा। फिलहाल रिलायंस ने स्टारलिंक का स्वागत किया है, जबकि मस्क के आरोपों और भारत में नियामकीय मंजूरियों को लेकर बहस जारी है।

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