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E20 के बाद PNG में हाइड्रोजन की एंट्री! 5% ब्लेंडिंग से सस्ती होगी गैस या बढ़ेगा खर्च?

Hydrogen blending in PNG

नई दिल्ली: भारत में ऊर्जा के क्षेत्र में पेट्रोल और प्राकृतिक गैस के बाद अब हाइड्रोजन को लेकर भी नई संभावनाओं पर काम तेज हो रहा है। पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग के बाद अब PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस में हाइड्रोजन मिलाने की तैयारी की चर्चा है। प्रस्तावित योजना के तहत PNG नेटवर्क में करीब 5 फीसदी तक हाइड्रोजन ब्लेंडिंग का परीक्षण किए जाने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम करने, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने और भविष्य में कम-कार्बन ईंधन व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना है। हालांकि, PNG में हाइड्रोजन मिलाने से आम उपभोक्ताओं के लिए गैस की कीमत घटेगी या बढ़ेगी, यह कई तकनीकी और आर्थिक कारकों पर निर्भर करेगा।

E20 पेट्रोल के बाद अब गैस में हाइड्रोजन ब्लेंडिंग
भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति के बाद अब ऊर्जा क्षेत्र में हाइड्रोजन को लेकर भी प्रयोग किए जा रहे हैं। हाइड्रोजन को भविष्य के स्वच्छ ईंधन के तौर पर देखा जा रहा है और इसे प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने की संभावनाओं का परीक्षण किया जा रहा है। PNG नेटवर्क में हाइड्रोजन ब्लेंडिंग का मकसद मौजूदा गैस इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए वैकल्पिक ईंधन को इस्तेमाल में लाना हो सकता है। हालांकि, इसके लिए पाइपलाइन, मीटर, उपकरण और अंतिम उपभोक्ता के गैस उपकरणों की तकनीकी अनुकूलता भी महत्वपूर्ण होगी।

PNG में 5% हाइड्रोजन मिलाने की तैयारी क्यों?
प्राकृतिक गैस के साथ हाइड्रोजन मिलाने से गैस मिश्रण में हाइड्रोजन की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सकती है। इससे लंबे समय में प्राकृतिक गैस की खपत को कुछ हद तक कम करने और ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटाने की संभावना बनती है। लेकिन हाइड्रोजन की लागत, उत्पादन का तरीका, परिवहन और ब्लेंडिंग के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दे इस पूरी व्यवस्था की आर्थिक व्यवहार्यता तय करेंगे। इसलिए केवल 5 फीसदी हाइड्रोजन ब्लेंडिंग के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे PNG सीधे सस्ती हो जाएगी।

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क्या गैस के दाम कम होंगे?
यह सबसे बड़ा सवाल है। PNG की कीमत पर सिर्फ ब्लेंडिंग प्रतिशत का असर नहीं पड़ता। प्राकृतिक गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमत, घरेलू गैस की उपलब्धता, आयात लागत, हाइड्रोजन उत्पादन की लागत, वितरण खर्च और सरकारी टैक्स जैसे कई कारक अंतिम कीमत तय करते हैं। अगर हाइड्रोजन की उत्पादन लागत प्राकृतिक गैस की तुलना में अधिक होती है और ब्लेंडिंग के लिए अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पड़ती है, तो शुरुआती चरण में लागत बढ़ भी सकती है। वहीं, यदि भविष्य में कम लागत वाली ग्रीन हाइड्रोजन उपलब्ध होती है और बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन शुरू होता है, तो लंबे समय में इसका आर्थिक लाभ मिल सकता है। E20 से अलग है हाइड्रोजन ब्लेंडिंग का मामलापेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग और PNG में हाइड्रोजन ब्लेंडिंग को एक जैसा नहीं माना जा सकता। दोनों ईंधनों की भौतिक और रासायनिक विशेषताएं अलग हैं और इनके इस्तेमाल के लिए अलग तकनीकी मानकों की जरूरत होती है। PNG में हाइड्रोजन मिलाने के लिए पाइपलाइन नेटवर्क, गैस की गुणवत्ता, दबाव, मीटरिंग और उपभोक्ताओं के उपकरणों की सुरक्षा जैसे पहलुओं का परीक्षण जरूरी होगा।

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उपभोक्ताओं की सुरक्षा भी अहम
घरेलू PNG कनेक्शन में हाइड्रोजन ब्लेंडिंग शुरू करने से पहले सुरक्षा मानकों का पालन सबसे महत्वपूर्ण होगा। हाइड्रोजन की विशेषताओं को देखते हुए पाइपलाइन और गैस उपकरणों की अनुकूलता की जांच करनी होगी। इसलिए यदि 5 फीसदी ब्लेंडिंग की योजना को आगे बढ़ाया जाता है, तो इसे चरणबद्ध परीक्षण और नियामकीय मानकों के आधार पर लागू किए जाने की संभावना होगी।

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भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए क्यों अहम है यह प्रयोग?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में तेल और गैस का आयात करता है। ऐसे में वैकल्पिक ईंधन और घरेलू ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। हाइड्रोजन ब्लेंडिंग का प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में प्राकृतिक गैस आधारित ऊर्जा व्यवस्था में धीरे-धीरे कम-कार्बन ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, इसे बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले लागत, सुरक्षा, तकनीकी अनुकूलता और पर्यावरणीय लाभ का विस्तृत आकलन जरूरी होगा।

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