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JPSC-JSSC घोटाले में CID का बड़ा खुलासा, TDPL के मास्टरमाइंड ने पिता समेत रिश्तेदारों को भी दिलाई परीक्षा!

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रांची: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और घोटाले की जांच कर रही CID को एक और अहम जानकारी मिली है। जांच एजेंसी के अनुसार, TDPL के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय तिवारी ने कथित तौर पर अपने परिवार के कई सदस्यों को भी परीक्षा दिलाई थी। अब जांच का दायरा उसके पिता तक पहुंच गया है। CID की जांच में सामने आया है कि अभय तिवारी के भाई, भाभी, साला, साली और पत्नी के अलावा उसके पिता सुखदेव तिवारी ने भी परीक्षा दी थी। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन परीक्षाओं में अभय तिवारी की कथित सेटिंग का कोई प्रभाव था या नहीं।

पिता ने 2024 में दी थी JPSC की FRO-ACF PT परीक्षा
जांच में सामने आया है कि अभय तिवारी के पिता सुखदेव तिवारी ने वर्ष 2024 में TDPL के माध्यम से आयोजित JPSC की Forest Range Officer (FRO) और Assistant Conservator of Forest (ACF) की प्रारंभिक परीक्षा दी थी। अब CID इस पूरे मामले में परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सुखदेव तिवारी ने सामान्य प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी थी या उन्हें भी अभय तिवारी की कथित ‘सेटिंग’ का कोई लाभ मिला था। हालांकि, अभी तक जांच एजेंसी की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सुखदेव तिवारी परीक्षा में सफल हुए या नहीं और उनके चयन की स्थिति क्या रही। इसलिए इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

भाई-भाभी से लेकर पत्नी तक के परीक्षा रिकॉर्ड की जांच
CID अब अभय तिवारी के परिवार के अन्य सदस्यों की परीक्षा और चयन से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। जांच एजेंसी के सामने यह जानकारी आई है कि उसके भाई, भाभी, साला, साली और पत्नी ने भी अलग-अलग परीक्षाएं दी थीं। अब जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि इन परीक्षाओं में किसी अभ्यर्थी को कथित तौर पर अनुचित लाभ मिला या नहीं। जांच एजेंसी परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के आवेदन, रोल नंबर, परीक्षा केंद्र, परिणाम और चयन से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर सकती है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित अभ्यर्थियों का अभय तिवारी के साथ किस तरह का संपर्क था।

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परीक्षा में ‘सिस्टम मैनिपुलेट’ करने का दावा?
CID की जांच में अभय तिवारी पर गंभीर आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, वह कथित तौर पर अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाता था कि सिस्टम मैनिपुलेट कर उन्हें परीक्षा में पास कराया जा सकता है। जांच में यह बात भी सामने आने का दावा किया गया है कि अभ्यर्थियों से प्रारंभिक परीक्षा यानी PT में पास कराने के नाम पर करीब 5 लाख रुपये लिए जाते थे। वहीं, अंतिम चयन कराने के नाम पर कथित तौर पर 10 लाख से लेकर 25 लाख रुपये तक की रकम मांगे जाने की बात जांच में सामने आई है। इन आरोपों की जांच CID कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वास्तव में कितने अभ्यर्थियों से रकम ली गई और उनमें से कितने लोगों को कथित तौर पर लाभ पहुंचाया गया।

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कितने अभ्यर्थियों को पहुंचा फायदा? CID तलाश रही जवाब
अब जांच का सबसे अहम हिस्सा यह है कि अभय तिवारी के कथित प्रभाव और नेटवर्क से कितने अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचा। CID यह पता लगाने में जुटी है कि क्या केवल उसके रिश्तेदार ही परीक्षा में शामिल हुए थे या उसके संपर्क में रहने वाले अन्य अभ्यर्थियों ने भी कथित सेटिंग का लाभ उठाया। इसके लिए जांच एजेंसी परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ संदिग्ध अभ्यर्थियों के संपर्क और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।

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परिवार के सदस्यों की भूमिका भी जांच के दायरे में
अभय तिवारी के परिवार के सदस्यों के परीक्षा देने की जानकारी सामने आने के बाद अब जांच एजेंसी इस पहलू को भी गंभीरता से देख रही है। खास तौर पर उसके पिता द्वारा 2024 में दी गई FRO-ACF PT परीक्षा को लेकर CID यह जानने का प्रयास कर रही है कि क्या इस परीक्षा में किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी। हालांकि, किसी रिश्तेदार का परीक्षा देना अपने आप में अपराध या परीक्षा में गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है। इस मामले में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए जांच एजेंसी को कथित सेटिंग या अनुचित लाभ से जुड़े ठोस साक्ष्य सामने लाने होंगे। फिलहाल CID की जांच जारी है और अभय तिवारी के परिवार के सदस्यों के परीक्षा रिकॉर्ड की पड़ताल से इस पूरे कथित नेटवर्क की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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