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2003 से चली आ रही परंपरा, 7 नवंबर से धुर्वा में सजेगा मां काली का दरबार; 5 दिन होंगे खास कार्यक्रम

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भव्य आयोजन की तैयारी में जुटी समिति, सांस्कृतिक प्रतिभाओं को मिलेगा मंच

रांची: मां काली की भक्ति और आराधना में धुर्वा एक बार फिर सराबोर होने जा रहा है। नवयुवक काली पूजा समिति, धुर्वा की ओर से 7 से 11 नवंबर 2026 तक पांच दिवसीय काली पूजा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। सेक्टर-2, साइट-5 स्थित महावीर मंदिर के पास होने वाले इस आयोजन में धार्मिक अनुष्ठान के साथ भव्य जागरण और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। समिति के मुताबिक, वर्ष 2003 में स्थापित नवयुवक काली पूजा समिति की यह परंपरा लगातार जारी है। हर वर्ष की तरह इस बार भी आयोजन को भव्य और व्यवस्थित बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। समिति की कोर कमेटी की बैठक में कार्यक्रमों की रूपरेखा और अलग-अलग पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा की गई।

7 नवंबर को प्रतिमा स्थापना के साथ शुरू होगा महोत्सव
पांच दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत 7 नवंबर को मां काली की प्रतिमा स्थापना के साथ होगी। इसके बाद 8 नवंबर को विशेष पूजा-अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा। समिति ने पांचों दिनों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम तय किए हैं, जिसमें धार्मिक आयोजन के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को भी प्रमुखता दी गई है। पांच दिनों में होंगे ये प्रमुख कार्यक्रम

  • 7 नवंबर: मां काली की प्रतिमा स्थापना के साथ महोत्सव का शुभारंभ।
  • 8 नवंबर: मां काली की विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान।
  • 9 नवंबर: भव्य जागरण और भक्ति संगीत का आयोजन।
  • 10 नवंबर: सांस्कृतिक कार्यक्रम, जिसमें भारतीय परंपरा और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलेगा।
  • 11 नवंबर: प्रतिमा विसर्जन के साथ पांच दिवसीय महोत्सव का समापन।

भक्ति के साथ संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश
समिति के संरक्षक डॉ. संजय सिंह ने कहा कि मां काली की आराधना शक्ति, साहस और धर्मनिष्ठा का प्रतीक मानी जाती है। उनके अनुसार वर्ष 2003 से लगातार आयोजित हो रहा यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को आस्था और एकजुटता के सूत्र में जोड़ने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के जरिए धार्मिक चेतना के साथ सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलती है।

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भव्य आयोजन की तैयारी में जुटी समिति
समिति के अध्यक्ष मुन्ना सिंह ने कहा कि इस वर्ष भी मां काली की पूजा श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित की जाएगी। पांच दिवसीय महोत्सव में धार्मिक अनुष्ठान, जागरण और सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्य आकर्षण होंगे। उन्होंने क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं से आयोजन में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि सामूहिक सहभागिता से यह आयोजन सामाजिक सौहार्द और सहयोग का उत्सव बनेगा।

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सांस्कृतिक प्रतिभाओं को मिलेगा मंच
समिति के मीडिया प्रभारी डॉ. धीरज सिंह सूर्यवंशी उर्फ बिनु सिंह ने कहा कि मां काली की उपासना भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में शक्ति और आत्मविश्वास का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि समिति का प्रयास है कि धार्मिक आयोजन के साथ स्थानीय सांस्कृतिक प्रतिभाओं को भी मंच मिले। जागरण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए लोगों को अपनी संस्कृति और परंपरा से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।

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इन पदाधिकारियों की रहेगी प्रमुख भूमिका
पांच दिवसीय आयोजन की तैयारियों में समिति के अध्यक्ष मुन्ना सिंह, संरक्षक डॉ. संजय सिंह, संस्थापक मनीष कुमार सिंह, सचिव अर्चित आनंद (अनु भैया), उपाध्यक्ष संतोष गुप्ता, पिंटू सिंह और अनुरंजिता सिंह, संयुक्त सचिव पुरुषोत्तम राठौड़, व्यवस्थापक संतोष कुमार सिंह और मनीष कुमार सिंह शामिल हैं। इसके अलावा मीडिया प्रभारी डॉ. धीरज सिंह सूर्यवंशी उर्फ बिनु सिंह, समिति सलाहकार श्याम किशोर सिंह, सांस्कृतिक सचिव गिरिजा शंकर और हरीश उर्फ लला तथा कार्यसमिति सदस्य प्रवीण सिंह और अंकित सिंह भी आयोजन की तैयारियों में भूमिका निभा रहे हैं। धुर्वा में आयोजित होने वाला यह पांच दिवसीय काली पूजा महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ संगीत, संस्कृति और सामूहिक सहभागिता का संगम बनेगा। 7 नवंबर से शुरू होने वाले इस आयोजन को लेकर समिति की ओर से तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

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