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झारखंड में MBBS सीटें तीन गुनी, अब दो साल में डॉक्टरों की कमी दूर करने का लक्ष्य

झारखंड में एमबीबीएस सीटों के विस्तार और डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने की स्वास्थ्य विभाग की योजना

सात वर्षों में MBBS सीटें 580 से बढ़कर 1,650, निजी मेडिकल कॉलेजों ने भी बढ़ाए अवसर

रांची : झारखंड में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार ने अपना लक्ष्य दोहराया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के बीच करीब चार घंटे तक चली बैठक में मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों की संख्या, चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता, अस्पतालों के बुनियादी ढांचे और भविष्य में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आने वाले दो वर्षों में झारखंड में डॉक्टरों की कमी दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करने का लक्ष्य है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा का विस्तार स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की बुनियाद बताया। हालांकि, डॉक्टरों की कमी पूरी तरह समाप्त होना मेडिकल सीटों के विस्तार के साथ नियुक्तियों, प्रशिक्षण, अस्पतालों में रिक्त पदों को भरने और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की तैनाती पर भी निर्भर करेगा।

सात वर्षों में MBBS सीटें 580 से बढ़कर 1,650
झारखंड में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार से जुड़ा एक प्रमुख आंकड़ा एमबीबीएस सीटों की संख्या में वृद्धि है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2019-20 में राज्य के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में कुल 580 एमबीबीएस सीटें थीं। शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए यह संख्या बढ़कर 1,650 हो गई है। यानी सात वर्षों में सीटों की संख्या लगभग तीन गुनी हो गई। इस विस्तार से झारखंड में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए अवसर बढ़े हैं। हालांकि, अधिक सीटों का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त शिक्षक, आधुनिक प्रयोगशालाएं, अस्पतालों में मरीजों के उपचार की सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण व्यावहारिक प्रशिक्षण भी उपलब्ध हों।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बढ़ीं सीटें
राज्य के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों का विस्तार हुआ है।

  • RIMS, रांची: सीटें 180 से बढ़कर 250 हुईं।
  • शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज, धनबाद: 50 से बढ़कर 100 सीटें।
  • एमजीएम मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर: 50 से बढ़कर 150 सीटें।
  • दुमका, पलामू और हजारीबाग के मेडिकल कॉलेज: प्रत्येक में 100 सीटें दर्ज हैं।
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ये आंकड़े चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की तस्वीर पेश करते हैं। राज्य में निजी मेडिकल कॉलेजों की बढ़ती क्षमता ने भी कुल सीटों की संख्या में योगदान दिया है।

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निजी मेडिकल कॉलेजों ने भी बढ़ाए अवसर
झारखंड में निजी मेडिकल संस्थानों के विस्तार से भी एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ी है। उपलब्ध 2026-27 के सीट मैट्रिक्स में मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर में 250 सीटें, लक्ष्मी चंद्रवंशी मेडिकल कॉलेज, पलामू में 150 सीटें और नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, सरायकेला में 200 सीटें दर्ज हैं। निजी संस्थानों में सीटों का विस्तार मेडिकल शिक्षा के विकल्प बढ़ाता है, लेकिन विद्यार्थियों के लिए फीस, आर्थिक सहायता और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण तक पहुंच भी महत्वपूर्ण मुद्दे बने रहते हैं।

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“आने वाले दो वर्षों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना लक्ष्य”
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य में लंबे समय से डॉक्टरों की कमी स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती रही है। उनका कहना है कि इसका स्थायी समाधान निकालने के लिए मेडिकल कॉलेजों की क्षमता बढ़ाने, एमबीबीएस सीटों का विस्तार करने और चिकित्सा शिक्षा को आधुनिक बनाने पर काम करना होगा। मंत्री के मुताबिक, झारखंड के विद्यार्थियों को अपने राज्य में मेडिकल शिक्षा के अधिक अवसर मिलने चाहिए, ताकि भविष्य में प्रशिक्षित चिकित्सक राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दे सकें। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रशिक्षण पर जोर देते हुए कहा कि उद्देश्य केवल सीटों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसे डॉक्टर तैयार करना भी है जो मरीजों को बेहतर उपचार दे सकें।

डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए भर्ती भी जरूरी
एमबीबीएस सीटों में वृद्धि के बावजूद राज्य में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए भर्ती और नियुक्ति प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी। अक्टूबर 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग लगभग 1,700 डॉक्टरों की भर्ती और उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। इसमें 506 डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और दूसरे राज्यों से लगभग 1,200 डॉक्टरों को झारखंड लाने के प्रयास शामिल बताए गए थे। यह तथ्य बताता है कि चिकित्सा शिक्षा का विस्तार और मौजूदा अस्पतालों में डॉक्टरों की नियुक्ति दो अलग लेकिन एक-दूसरे से जुड़े काम हैं। मेडिकल सीटों पर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को डॉक्टर बनने में कई वर्ष लगते हैं, जबकि वर्तमान रिक्त पदों को भरने के लिए तत्काल भर्ती, नियुक्ति और तैनाती की जरूरत होती है। इसलिए अगले दो वर्षों में डॉक्टरों की कमी दूर करने का लक्ष्य पूरा करने के लिए शिक्षा, भर्ती और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरतों के बीच समन्वय अहम होगा।

अपर मुख्य सचिव ने गुणवत्ता और प्रशिक्षण पर दिया जोर
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ मेडिकल कॉलेजों के आधारभूत ढांचे, शिक्षकों की उपलब्धता, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और विद्यार्थियों के व्यावहारिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना आवश्यक है। चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता का सीधा संबंध मरीजों को मिलने वाली सेवाओं से है। यदि मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त शिक्षक, क्लिनिकल प्रशिक्षण और अस्पतालों में जरूरी संसाधन उपलब्ध हों, तो विद्यार्थियों को बेहतर प्रशिक्षण मिल सकता है। राज्य के लिए चुनौती यह भी है कि डॉक्टरों की उपलब्धता केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में चिकित्सकों की तैनाती, अस्पतालों में जरूरी सुविधाएं और नियमित स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं तक डॉक्टर पहुंचाना बड़ी चुनौती
झारखंड में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने का लाभ तभी व्यापक होगा, जब इसका असर जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचे। ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की तैनाती, जरूरी दवाओं की उपलब्धता, जांच सुविधाएं और मरीजों को समय पर रेफरल सेवाएं मिलना स्वास्थ्य व्यवस्था की गुणवत्ता के प्रमुख मानक हैं। मेडिकल कॉलेजों की सीटों में वृद्धि भविष्य के लिए डॉक्टर तैयार करने में मदद कर सकती है। वहीं, मौजूदा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए भर्ती, बेहतर कार्य परिस्थितियां, संसाधन और तैनाती की नीति जरूरी होगी।

टीमवर्क से स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने का दावा
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। मंत्री ने कहा, “पहले इंसान, फिर डॉक्टर, उसके बाद नेता—जनता की सेहत मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”उन्होंने राज्य में अधिक डॉक्टर, बेहतर मेडिकल शिक्षा, आधुनिक अस्पताल और जरूरतमंद लोगों तक गुणवत्तापूर्ण इलाज पहुंचाने का लक्ष्य दोहराया।

आगे की राह: सीटों के साथ नियुक्ति और गुणवत्तापूर्ण इलाज
झारखंड में एमबीबीएस सीटों की संख्या 580 से बढ़कर 1,650 होना चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का महत्वपूर्ण संकेत है। लेकिन डॉक्टरों की कमी दूर करने का आकलन केवल सीटों की संख्या से नहीं किया जा सकता। इसके लिए मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता, डॉक्टरों की भर्ती, सरकारी अस्पतालों में रिक्त पदों की स्थिति, ग्रामीण क्षेत्रों में तैनाती और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के आंकड़ों पर भी नजर रखनी होगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने अगले दो वर्षों में डॉक्टरों की उपलब्धता में सुधार का लक्ष्य रखा है। अब इस लक्ष्य की सफलता भर्ती की प्रगति, चिकित्सा शिक्षा के मानकों और राज्य के अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सेवाओं से आंकी जाएगी।

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