रांची में CARA की बड़ी पहल, दिव्यांग बच्चों को परिवार दिलाने के लिए 175 हितधारकों ने किया मंथन
दत्तक ग्रहण की बाधाओं को दूर करने पर जोर, बाल संरक्षण, स्वास्थ्य और दत्तक ग्रहण एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी
रांची: विशेष आवश्यकता वाले बच्चों यानी दिव्यांग बच्चों को सुरक्षित, स्थायी और स्नेहपूर्ण पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने महत्वपूर्ण पहल की है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन CARA ने झारखंड सरकार और राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी (SARA), झारखंड के सहयोग से 27 अक्टूबर 2026 को रांची में पूर्वी क्षेत्र की पांचवीं क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला का मुख्य फोकस परिवार-आधारित देखभाल को मजबूत करना और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के दत्तक ग्रहण एवं गैर-संस्थागत पुनर्वास के अवसरों का विस्तार करना रहा। इसमें पूर्वी क्षेत्र के विभिन्न राज्यों और जिलों से जुड़े बाल संरक्षण एवं दत्तक ग्रहण से संबंधित अधिकारियों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
175 से अधिक हितधारकों ने लिया हिस्सा
यह कार्यशाला दत्तक ग्रहण जागरूकता अभियान 2025 के तहत आयोजित की गई। अभियान का विषय “विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (दिव्यांग बच्चों) के गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देना” है। पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम शामिल हैं। क्षेत्र की भौगोलिक और प्रशासनिक विविधता को देखते हुए कार्यशाला में झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के करीब 115 जिलों से लगभग 175 हितधारकों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला के माध्यम से विभिन्न राज्यों और विभागों के बीच संवाद, सफल कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समावेशी और परिवार-आधारित पुनर्वास की साझा रणनीति तैयार करने पर चर्चा हुई।
दत्तक ग्रहण की बाधाओं को दूर करने पर जोर
कार्यशाला को संबोधित करते हुए CARA की CEO भावना सक्सेना ने लक्षित जागरूकता अभियानों और हितधारकों की सक्रिय भागीदारी से हुई प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं को दूर करने के साथ-साथ संभावित दत्तक माता-पिता के लिए आवश्यक सहयोग को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने निरंतर जागरूकता और संवेदनशील, बाल-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया, ताकि अधिक से अधिक विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को स्थायी परिवार मिल सके।
बाल संरक्षण, स्वास्थ्य और दत्तक ग्रहण एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी
DWCD&SS के सचिव उमाशंकर सिंह ने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पारिवारिक जीवन, देखभाल और अपनत्व के समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए केवल जागरूकता पर्याप्त नहीं है। इसके लिए लगातार और परिणामोन्मुखी कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने बाल संरक्षण प्राधिकरणों, स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों और दत्तक ग्रहण एजेंसियों के बीच निरंतर सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय से बच्चों के लिए सार्थक परिणाम सुनिश्चित किए जा सकते हैं।
चिकित्सा और कानूनी प्रक्रियाओं पर भी हुआ मंथन
कार्यशाला में राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियों (SARAs), विशिष्ट दत्तक ग्रहण एजेंसियों (SAAs), बाल देखभाल संस्थानों (CCIs), जिला बाल संरक्षण इकाइयों (DCPUs), मुख्य चिकित्सा पदाधिकारियों (CMOs), बाल कल्याण समितियों (CWCs), स्वास्थ्य संस्थानों और बाल संरक्षण से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान दत्तक ग्रहण प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार किया गया। इनमें शामिल रहे—
- बच्चों का चिकित्सकीय आकलन
- कानूनी और प्रक्रियात्मक आवश्यकताएं
- वित्तीय पहलू
- शिकायत निवारण व्यवस्था
- अंतर-विभागीय समन्वय
- स्वास्थ्य संस्थानों और बाल संरक्षण प्रणाली के बीच बेहतर तालमेल
विशेष जोर इस बात पर रहा कि बच्चों का समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन हो, उनके लिए उपयुक्त देखभाल योजना तैयार की जाए और दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया को अनावश्यक देरी से बचाया जा सके।
समूह चर्चा में तैयार किए गए व्यावहारिक सुझाव
कार्यशाला में समूह चर्चाओं के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों की चुनौतियों की पहचान की गई। हितधारकों ने व्यावहारिक, क्रियान्वयन योग्य और समयबद्ध सुझाव तैयार किए। इन चर्चाओं में जन-जागरूकता और पहुंच बढ़ाने, संस्थागत क्षमता मजबूत करने, प्रक्रियात्मक बाधाओं को कम करने और दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया के दौरान विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को बेहतर सहयोग देने जैसे विषय प्रमुख रहे।

सफल दत्तक ग्रहण पर बनी लघु फिल्म का अनावरण
कार्यशाला में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के सफल दत्तक ग्रहण पर आधारित एक लघु वृत्तचित्र फिल्म का भी अनावरण किया गया। वास्तविक जीवन की घटना पर आधारित इस फिल्म के जरिए परिवार-आधारित देखभाल के सकारात्मक प्रभाव को सामने रखा गया। फिल्म में यह संदेश दिया गया कि एक स्नेहपूर्ण और सहयोगी परिवार बच्चों को सुरक्षा, भावनात्मक सहयोग, गरिमा और स्थायी अपनत्व प्रदान कर सकता है।
रांची के साथ पांच क्षेत्रीय कार्यशालाओं की श्रृंखला पूरी
रांची में आयोजित कार्यशाला के साथ CARA ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित क्षेत्रीय परामर्श कार्यशालाओं की श्रृंखला में पांचवीं कार्यशाला पूरी की। इससे पहले उत्तरी क्षेत्र के लिए राजस्थान, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए असम, केंद्रीय क्षेत्र के लिए मध्य प्रदेश और पश्चिमी क्षेत्र के लिए महाराष्ट्र में क्षेत्रीय परामर्श आयोजित किए जा चुके हैं। इन कार्यशालाओं का उद्देश्य क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों की पहचान करना, बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करना और दत्तक ग्रहण तथा बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।

भविष्य की नीतियों को मिल सकती है दिशा
रांची में आयोजित पूर्वी क्षेत्र की कार्यशाला से सामने आई सिफारिशों से भविष्य में दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। खासकर स्वास्थ्य सेवाओं और बाल संरक्षण व्यवस्था के बीच समन्वय मजबूत करने तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए परिवार-आधारित पुनर्वास के अवसर बढ़ाने में इन सुझावों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। CARA का जोर बाल-केंद्रित और समावेशी दत्तक ग्रहण व्यवस्था को मजबूत करने पर है। इसका मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चे को केवल संस्थागत देखभाल ही नहीं, बल्कि ऐसे परिवार में रहने और बढ़ने का अवसर मिले, जहां उसे प्यार, सम्मान, अपनत्व और जरूरी सहयोग प्राप्त हो।
प्रमुख अधिकारी रहे मौजूद
कार्यशाला में CARA की CEO भावना सक्सेना, DWCD&SS के सचिव उमाशंकर सिंह, राज्य दिव्यांगजन आयुक्त कीर्ति श्री जी, झारखंड की समाज कल्याण निदेशक किरण पासी, JSCPS के निदेशक एवं सदस्य सचिव विजय कुमार सिन्हा समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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