गोड्डा के महागामा में 51.49 करोड़ का पशु आहार कारखाना, पशुपालकों को मिलेगी राहत की उम्मीद
5.22 एकड़ जमीन पर स्थापित होगी औद्योगिक इकाई, लंबे समय से उठ रही थी कारखाने की मांग
रांची, झारखंड: झारखंड के गोड्डा जिले के पशुपालकों और डेयरी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण पहल की गई है। महागामा प्रखंड के गोविंदपुर मौजा में करीब 51 करोड़ 49 लाख रुपये की लागत से पशु आहार कारखाना स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में रांची में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस परियोजना को मंजूरी दी गई है। प्रस्तावित कारखाने की शुरुआती उत्पादन क्षमता 50 मीट्रिक टन प्रतिदिन (MTPD) होगी। भविष्य में इसे बढ़ाकर 100 मीट्रिक टन प्रतिदिन करने की योजना है। परियोजना के लिए 5.22 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। कारखाने की स्थापना झारखंड मिल्क फेडरेशन के माध्यम से की जाएगी।
पशु आहार कारखाने के लिए 51.49 करोड़ रुपये की स्वीकृति
राज्य मंत्रिमंडल ने महागामा के गोविंदपुर में 50 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाले पशु आहार कारखाने की स्थापना के लिए 51 करोड़ 49 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। परियोजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 30 करोड़ रुपये खर्च करने की स्वीकृति का भी प्रस्ताव दिया गया है। यह राशि परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण होगी। स्थानीय स्तर पर पशु आहार उत्पादन की सुविधा विकसित होने से गोड्डा और आसपास के क्षेत्रों में पशुपालन तथा डेयरी गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
गोड्डा के पशुपालकों को क्या होगा फायदा?
पशु आहार की उपलब्धता पशुओं के पोषण और दुग्ध उत्पादन से सीधे जुड़ी होती है। महागामा में कारखाना स्थापित होने से क्षेत्र के पशुपालकों को संतुलित पशु आहार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इस परियोजना से संभावित रूप से कई लाभ मिल सकते हैं:
- पशु आहार की उपलब्धता: गोड्डा और आसपास के क्षेत्रों में पशु आहार की आपूर्ति बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
- दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा: दुधारू पशुओं के लिए संतुलित आहार की उपलब्धता से डेयरी गतिविधियों को समर्थन मिल सकता है।
- उत्पादन लागत पर नियंत्रण: स्थानीय स्तर पर आपूर्ति उपलब्ध होने से पशुपालकों को परिवहन और खरीद से जुड़ी लागत में राहत मिलने की संभावना है।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती: पशुपालन आधारित आजीविका और डेयरी व्यवसाय के विस्तार को प्रोत्साहन मिल सकता है।
- भविष्य में उत्पादन क्षमता का विस्तार: मांग और जरूरत के अनुसार कारखाने की क्षमता 50 से बढ़ाकर 100 मीट्रिक टन प्रतिदिन की जा सकती है।
हालांकि, इन लाभों का वास्तविक प्रभाव कारखाने के चालू होने, उत्पादन लागत, पशु आहार की कीमत और स्थानीय बाजार में इसकी उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
5.22 एकड़ जमीन पर स्थापित होगी औद्योगिक इकाई
प्रस्तावित कारखाने के लिए महागामा प्रखंड के गोविंदपुर मौजा में 5.22 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। शुरुआती चरण में प्रतिदिन 50 मीट्रिक टन पशु आहार उत्पादन की क्षमता विकसित की जाएगी। भविष्य में उत्पादन क्षमता को दोगुना कर 100 मीट्रिक टन प्रतिदिन तक ले जाने की योजना है। इससे बढ़ती मांग के अनुसार पशु आहार की आपूर्ति का विस्तार किया जा सकेगा। परियोजना के निर्माण की समयसीमा, काम शुरू होने की तारीख और कारखाने के संचालन की संभावित तारीख की जानकारी सामने आने पर इसके क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट होगी।
लंबे समय से उठ रही थी कारखाने की मांग
महागामा और गोड्डा जिले के किसानों तथा पशुपालकों की ओर से क्षेत्र में पशु आहार कारखाना स्थापित करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। अब राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद इस परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। स्थानीय स्तर पर पशु आहार की उपलब्धता बेहतर होने से पशुपालकों को अपने पशुओं के लिए संतुलित आहार जुटाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने और ग्रामीण परिवारों की आजीविका मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।
डेयरी क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
झारखंड में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐसे में पशु आहार उत्पादन की स्थानीय व्यवस्था विकसित करना डेयरी क्षेत्र के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। महागामा के गोविंदपुर में प्रस्तावित कारखाने का महत्व केवल उत्पादन क्षमता तक सीमित नहीं है। इसके प्रभाव का आकलन इस आधार पर भी होगा कि पशुपालकों को उचित कीमत पर गुणवत्तापूर्ण आहार कितनी नियमितता से उपलब्ध होता है और इससे दुग्ध उत्पादन तथा उनकी आय में कितना सुधार आता है। फिलहाल परियोजना को राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई है। अब निर्माण, बजट के उपयोग और कारखाने को चालू करने से जुड़े अगले कदमों पर नजर रहेगी।
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