झारखंड में मेडिको सिटी की तैयारी, ₹284 करोड़ के प्रस्ताव से आधुनिक इलाज की उम्मीद
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी बोले—गरीबों और आदिवासियों को भी मिले बड़े शहरों जैसी चिकित्सा सुविधा
परियोजना का प्रस्ताव मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के लिए तैयार
रांची, झारखंड: झारखंड में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रस्तावित झारखंड मेडिको सिटी परियोजना को लेकर राज्य सरकार की तैयारी जारी है। स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेज के अनुसार, परियोजना के आधारभूत ढांचे के निर्माण के लिए ₹284 करोड़ 17 लाख 24 हजार 900 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति का प्रस्ताव मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए तैयार किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा है कि इस परियोजना का उद्देश्य झारखंड में आधुनिक अस्पतालों और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के विकास का रास्ता खोलना है, ताकि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे राज्यों पर मरीजों की निर्भरता कम हो सके। हालांकि, प्रस्तावित परियोजना की अंतिम स्वीकृति, निर्माण की समयसीमा और उपलब्ध होने वाली सुविधाओं का स्वरूप संबंधित सरकारी निर्णयों और विस्तृत परियोजना योजना पर निर्भर करेगा।
मेडिको सिटी के लिए ₹284.17 करोड़ का प्रस्ताव
स्वास्थ्य विभाग की योजना के तहत रांची में मेडिको सिटी के आधारभूत ढांचे को विकसित करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा सेवाओं, सुपर स्पेशियलिटी उपचार और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश के लिए अनुकूल आधार तैयार करना है। अगस्त 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों में भी ₹284.17 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति का प्रस्ताव मंत्रिपरिषद के समक्ष भेजे जाने की जानकारी दी गई थी। इन रिपोर्टों के अनुसार, परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग स्तर पर तैयारी की जा रही थी। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रस्तावित राशि आधारभूत संरचना के निर्माण से संबंधित है। इसे पूरे अस्पताल नेटवर्क, सभी चिकित्सा उपकरणों और भविष्य में संचालित होने वाली प्रत्येक सुविधा की कुल लागत नहीं माना जाना चाहिए, जब तक विस्तृत वित्तीय विवरण जारी न हो।
डॉ. इरफान अंसारी ने बताया अपना विजन
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के अनुसार, मेडिको सिटी परियोजना पर पिछले दो वर्षों से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड में ऐसी चिकित्सा व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जिसमें गरीब, आदिवासी, ग्रामीण और जरूरतमंद परिवारों को भी आधुनिक इलाज के विकल्प उपलब्ध हों। मंत्री ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अपने चिकित्सकीय अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि गंभीर बीमारी के दौरान मरीजों और उनके परिजनों को उपचार के साथ आर्थिक तथा दूसरी व्यावहारिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। डॉ. अंसारी के मुताबिक, राज्य में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का विकास होने से मरीजों को अपने घर के नजदीक उपचार के विकल्प मिल सकते हैं। इससे दूसरे शहरों की यात्रा, रहने और परिजनों के अतिरिक्त खर्च का बोझ कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
वेल्लोर, दिल्ली और मुंबई जाने की मजबूरी कम करने का लक्ष्य
झारखंड के कुछ मरीज जटिल बीमारियों और सुपर स्पेशियलिटी उपचार के लिए दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, वेल्लोर और दूसरे शहरों का रुख करते हैं। ऐसे मामलों में इलाज के खर्च के अलावा यात्रा, ठहरने और मरीज के साथ जाने वाले परिजनों के खर्च भी परिवारों पर पड़ते हैं। मेडिको सिटी की परिकल्पना राज्य में उन्नत चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने से जुड़ी है। यदि परियोजना के तहत पर्याप्त विशेषज्ञ, आधुनिक उपकरण और प्रभावी उपचार व्यवस्था विकसित होती है, तो मरीजों को झारखंड में ही अधिक विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, दूसरे राज्यों पर निर्भरता कितनी कम होगी, यह परियोजना के वास्तविक क्रियान्वयन, इलाज की गुणवत्ता, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और उपचार की लागत पर निर्भर करेगा।
रोबोटिक सर्जरी से डिजिटल हेल्थ तक, आधुनिक सुविधाओं की संभावना
स्वास्थ्य मंत्री ने आधुनिक चिकित्सा तकनीक और सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया है। मेडिको सिटी के तहत किस प्रकार की सुविधाएं विकसित होंगी, इसका अंतिम स्वरूप विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, स्वीकृत डिजाइन और निवेश संबंधी निर्णयों से स्पष्ट होगा। प्रस्तावित स्वास्थ्य ढांचे में भविष्य में निम्नलिखित क्षेत्रों के विकास की संभावनाएं हो सकती हैं:
- सुपर स्पेशियलिटी उपचार: हृदय रोग, कैंसर, न्यूरोलॉजी, किडनी रोग और अन्य जटिल बीमारियों के लिए विशेषज्ञ सेवाएं।
- आधुनिक सर्जरी: उपयुक्त चिकित्सा जरूरतों के अनुसार उन्नत और मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल तकनीक।
- डिजिटल हेल्थ: इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल जांच रिपोर्ट और मरीजों की जानकारी के बेहतर प्रबंधन की व्यवस्था।
- टेलीमेडिसिन: दूरदराज के इलाकों के मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श उपलब्ध कराने के विकल्प।
- आपातकालीन और क्रिटिकल केयर: गंभीर मरीजों के उपचार के लिए जरूरी सुविधाओं का विकास।
- चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण: डॉक्टरों, नर्सों तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के कौशल विकास के अवसर।
इनमें से प्रत्येक सुविधा को परियोजना का स्वीकृत हिस्सा तभी माना जा सकेगा, जब इसकी पुष्टि आधिकारिक दस्तावेज या विस्तृत परियोजना रिपोर्ट से हो।
अस्पतालों के विकास के लिए आधारभूत सुविधाएं जरूरी
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि आधुनिक चिकित्सा संस्थानों के विकास के लिए केवल भवन निर्माण पर्याप्त नहीं है। बिजली, पानी, सड़क संपर्क, डिजिटल कनेक्टिविटी, चिकित्सा उपकरण, प्रशिक्षित मानव संसाधन और रखरखाव की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। मेडिको सिटी को मेडिकल टूरिज्म से जोड़ने की योजना के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, मरीजों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण उपचार और पारदर्शी व्यवस्था भी आवश्यक होगी। परियोजना के माध्यम से निजी स्वास्थ्य संस्थानों और निवेशकों को आकर्षित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई है। हालांकि, निवेश, अस्पताल समूहों के साथ समझौते और सेवाओं की शुरुआत से संबंधित दावों की पुष्टि अलग-अलग आधिकारिक घोषणाओं से की जानी चाहिए।
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की भी महत्वपूर्ण भूमिका
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह सहित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका परियोजना को प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण होगी। मेडिको सिटी जैसी बड़ी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए नीति निर्धारण, वित्तीय नियोजन, आधारभूत संरचना, विशेषज्ञ संस्थानों के साथ समन्वय और समयबद्ध क्रियान्वयन जरूरी होगा। परियोजना की सफलता केवल स्वीकृत राशि पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि इस बात पर भी निर्भर होगी कि निर्माण कार्य कब शुरू होता है, अस्पतालों का संचालन कैसे होता है और आम लोगों को सेवाएं किस कीमत पर उपलब्ध कराई जाती हैं।
RIMS के साथ स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार की दिशा में पहल
रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) झारखंड की प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थाओं में शामिल है। राज्य में RIMS-2 जैसी बड़ी परियोजना को भी मंजूरी मिल चुकी है। जुलाई 2026 में राज्य मंत्रिमंडल ने RIMS-2 के लिए ₹4,189.41 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी थी। ऐसे में मेडिको सिटी का प्रस्ताव राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और नए चिकित्सा निवेश की संभावनाओं से जुड़ा है। हालांकि, RIMS-2 और मेडिको सिटी अलग-अलग परियोजनाएं हैं, जिनकी लागत, उद्देश्य और क्रियान्वयन व्यवस्था का स्वतंत्र रूप से आकलन किया जाना चाहिए।
“20 साल पहले शुरू होता यह काम तो झारखंड आज बहुत आगे होता”
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि झारखंड में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जाती रही है। उनके मुताबिक, यदि इस दिशा में पहले पहल की गई होती, तो राज्य चिकित्सा क्षेत्र में और आगे हो सकता था। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर ठोस काम करने की जरूरत है। उनका कहना है कि गरीबों, आदिवासियों और ग्रामीण परिवारों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना स्वास्थ्य व्यवस्था के विकास का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए। मंत्री ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह और स्वास्थ्य विभाग की टीम के सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया।
अब परियोजना की स्वीकृति और क्रियान्वयन पर नजर
झारखंड मेडिको सिटी परियोजना से आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, सुपर स्पेशियलिटी उपचार और मेडिकल टूरिज्म के विकास की संभावनाएं जुड़ी हैं। लेकिन इसके वास्तविक लाभों का आकलन तभी किया जा सकेगा, जब परियोजना को आवश्यक मंजूरी मिले, निर्माण और निवेश की प्रक्रिया आगे बढ़े तथा चिकित्सा सेवाएं शुरू हों। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण अगला कदम प्रस्ताव की आधिकारिक स्थिति, मंत्रिपरिषद की मंजूरी, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और निर्माण की समयसीमा की पुष्टि है।
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