ट्रंप के लिए खतरे की घंटी! मिडटर्म चुनाव से पहले पोल में डेमोक्रेट्स आगे, हाथ से निकल सकता है हाउस
पोल में ट्रंप के खिलाफ बढ़ता असंतोष, हाउस में डेमोक्रेट्स को बहुमत का अनुमान
US Midterm Election 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए मिडटर्म इलेक्शन से ठीक एक हफ्ते पहले जनमत सर्वेक्षणों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। कई चुनावी अनुमानों में डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। अगर ये अनुमान चुनाव नतीजों में बदलते हैं तो ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के अगले दो साल काफी मुश्किल हो सकते हैं। मध्यावधि चुनाव अमेरिका की राजनीति में इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि इनसे यह तय होता है कि राष्ट्रपति को कांग्रेस में कितनी राजनीतिक ताकत हासिल रहेगी। हाउस या सीनेट में विपक्षी पार्टी का नियंत्रण होने पर राष्ट्रपति के लिए अपनी नीतियों को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।
पोल में ट्रंप के खिलाफ बढ़ता असंतोष
चुनाव से पहले सामने आए सर्वेक्षणों में ट्रंप के कामकाज को लेकर मतदाताओं में असंतोष दिखाई दे रहा है। RealClearPolitics के आंकड़ों के मुताबिक करीब 38.2 फीसदी संभावित मतदाता ट्रंप के कामकाज से संतुष्ट हैं, जबकि करीब 60.2 फीसदी असंतुष्ट बताए गए हैं। आर्थिक मुद्दा भी ट्रंप के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। सर्वेक्षण के मुताबिक करीब 57 फीसदी लोगों का मानना है कि ट्रंप की नीतियों के कारण उनकी आर्थिक स्थिति खराब हुई है। टैरिफ नीति, महंगाई, ईंधन की कीमत और विदेश नीति से जुड़े फैसले चुनावी बहस के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
हाउस में डेमोक्रेट्स को बहुमत का अनुमान
435 सदस्यों वाले अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स को लेकर अलग-अलग चुनावी अनुमानों में डेमोक्रेट्स को बढ़त मिल रही है। RealClearPolitics के अनुमान में डेमोक्रेट्स को करीब 227 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। वहीं Cook Political Report के आकलन में डेमोक्रेट्स को करीब 220 सीटें मिल सकती हैं, जबकि कई सीटों पर मुकाबला अभी भी बेहद करीबी है। CBS News के अनुमान में डेमोक्रेट्स को 229 सीटें, जबकि रिपब्लिकन्स को 206 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। हालांकि, इन सभी आंकड़ों को अंतिम चुनाव परिणाम नहीं माना जा सकता। चुनावी पोल में बदलाव संभव है और करीबी सीटों पर अंतिम नतीजे अलग हो सकते हैं।
‘रिपब्लिकन के लिए रास्ता लगभग खत्म’?
Cook Political Report की हाउस चुनाव संपादक एरिन कोवे के आकलन के मुताबिक हाउस में रिपब्लिकन बहुमत बनाए रखने का रास्ता बेहद मुश्किल दिखाई दे रहा है। अगर डेमोक्रेट्स हाउस में बहुमत हासिल कर लेते हैं तो ट्रंप प्रशासन की कई नीतियों और फैसलों पर कांग्रेस में कड़ा विरोध देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में बजट, कानून, प्रशासनिक निगरानी और कई प्रमुख नीतिगत फैसलों पर ट्रंप को डेमोक्रेट्स से टकराव का सामना करना पड़ सकता है।
सीनेट में तस्वीर अभी साफ नहीं
हाउस के मुकाबले सीनेट की लड़ाई ज्यादा अनिश्चित बनी हुई है। इस बार सीनेट की करीब एक तिहाई सीटों पर चुनाव हो रहा है। CBS News के अनुमान के मुताबिक चुनाव नहीं होने वाली सीटों को मिलाकर डेमोक्रेट्स के पास 46 और रिपब्लिकन्स के पास 44 सीटें हैं। बाकी मुकाबले वाली सीटों के कारण सीनेट में स्पष्ट तस्वीर अभी सामने नहीं आई है। यही वजह है कि ट्रंप के लिए हाउस और सीनेट दोनों के नतीजे बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
रिपब्लिकन नेताओं में भी दिख रही दूरी
ट्रंप की घटती लोकप्रियता का असर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। कुछ रिपब्लिकन उम्मीदवार अपने प्रचार में ट्रंप से अलग रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। न्यू हैम्पशायर के रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवार जॉन सुनुनु ने अपने एक विज्ञापन में कहा कि जब राष्ट्रपति की नीतियां न्यू हैम्पशायर के हित में नहीं होंगी, तो वह उनका विरोध करेंगे। यह संकेत देता है कि कुछ रिपब्लिकन उम्मीदवार स्थानीय मतदाताओं के बीच अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
ट्रंप ने चुनाव को बताया ‘जनमत संग्रह’
डोनाल्ड ट्रंप खुद इन मध्यावधि चुनावों को अपने दूसरे प्रशासन के शुरुआती करीब 20 महीनों पर ‘जनमत संग्रह’ के तौर पर पेश कर चुके हैं। ट्रंप अपने समर्थकों से रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में वोट करने की अपील कर रहे हैं। उनकी चुनावी रैलियों का फोकस कई रिपब्लिकन-समर्थक राज्यों पर है। ट्रंप का लक्ष्य इन राज्यों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों को मजबूत करना और पार्टी के आधार को मतदान केंद्रों तक पहुंचाना है।
करीब 3 करोड़ लोग पहले ही कर चुके वोट
अमेरिका में अर्ली वोटिंग शुरू हो चुकी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सोमवार तक करीब 3 करोड़ मतदाता पोस्टल बैलेट या मतदान केंद्रों के जरिए अपना वोट डाल चुके थे। अमेरिका में मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति चुनाव की तुलना में मतदान प्रतिशत आमतौर पर कम रहता है। 2022 में मतदान करीब 46.2 फीसदी, जबकि 2018 में करीब 50 फीसदी रहा था। इस बार अंतिम मतदान प्रतिशत भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करने वाला बड़ा फैक्टर हो सकता है।
ट्रंप की नीतियां बनीं चुनावी मुद्दा
ट्रंप प्रशासन की आर्थिक नीतियां और विदेश नीति भी चुनावी अभियान में प्रमुख मुद्दा बन गई हैं। टैरिफ को लेकर अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर पड़ने वाले प्रभाव पर बहस जारी है। वहीं ईंधन की कीमतों को लेकर भी ट्रंप के पुराने चुनावी वादों की तुलना मौजूदा कीमतों से की जा रही है। यही वजह है कि रिपब्लिकन पार्टी के लिए इस बार सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के प्रति जनता के रुख का भी बड़ा संकेत माना जा रहा है।
अगर हाउस गया तो ट्रंप के लिए क्या बदलेगा?
अगर डेमोक्रेट्स हाउस पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं तो ट्रंप प्रशासन को कई मुद्दों पर विपक्ष के दबाव का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस की समितियां प्रशासनिक फैसलों की जांच कर सकती हैं, बजट और कानूनों पर राजनीतिक टकराव बढ़ सकता है और ट्रंप की कई नीतियों को लागू कराने में मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। इसलिए मिडटर्म चुनाव का नतीजा सिर्फ कांग्रेस की सीटों का गणित नहीं होगा। यह तय करेगा कि ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल के बाकी दो साल कितनी राजनीतिक ताकत के साथ चला पाएंगे।
चुनावी तस्वीर का सार
- हाउस: कई पोल में डेमोक्रेट्स को बढ़त
- सीनेट: मुकाबला अभी भी अनिश्चित
- ट्रंप अप्रूवल: RCP के अनुसार 38.2%
- ट्रंप से असंतुष्ट: करीब 60.2%
- आर्थिक स्थिति खराब होने की बात: 57% मतदाता
- अर्ली वोटिंग: करीब 3 करोड़ वोट डाले जा चुके थे
- मुख्य मुद्दे: अर्थव्यवस्था, महंगाई, टैरिफ, ईंधन और विदेश नीति
फिलहाल पोल डेमोक्रेट्स के पक्ष में संकेत दे रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला अमेरिकी मतदाता ही करेंगे। करीबी सीटों पर छोटे-छोटे बदलाव भी हाउस और सीनेट के पूरे राजनीतिक समीकरण को बदल सकते हैं।
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