रांची के सभी अस्पतालों और क्लीनिकों को 7 दिन का अल्टीमेटम, फीस और डॉक्टरों की डिग्री करनी होगी सार्वजनिक
सिविल सर्जन ने जारी किया आदेश; निबंधन प्रमाणपत्र, इलाज की दर सूची, डॉक्टरों की योग्यता और मरीजों के अधिकार प्रदर्शित करना अनिवार्य
सोशल एक्टिविस्ट ज्योति शर्मा के अनुरोध के बाद जारी हुआ आदेश
रांची: राजधानी रांची में संचालित अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिकों और अन्य संबंधित चिकित्सा प्रतिष्ठानों को मरीजों के लिए जरूरी जानकारियां सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होंगी। सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, रांची के कार्यालय ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए सभी संबंधित संस्थानों को सात दिनों के भीतर निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। कार्यालय आदेश संख्या 5236, दिनांक 29 अक्टूबर 2026 के अनुसार, चिकित्सा प्रतिष्ठानों को अपना वैध निबंधन प्रमाणपत्र, विभिन्न चिकित्सा सेवाओं की दर सूची, डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण का विवरण, विशेषज्ञता और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करनी होगी। इस निर्देश का उद्देश्य मरीजों को इलाज से जुड़ी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना, स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और लागू नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना है।
अस्पतालों को रिसेप्शन पर दिखाना होगा वैध निबंधन प्रमाणपत्र
आदेश के मुताबिक, प्रत्येक संबंधित अस्पताल, नर्सिंग होम और क्लीनिक को सक्षम प्राधिकार द्वारा जारी वैध एवं अद्यतन निबंधन प्रमाणपत्र या लाइसेंस ऐसी जगह प्रदर्शित करना होगा, जहां मरीज और उनके परिजन उसे आसानी से देख सकें। इसके लिए रिसेप्शन या परिसर में किसी अन्य प्रमुख स्थान का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे मरीजों को संबंधित संस्थान के निबंधन की स्थिति जानने में सुविधा होगी। निर्देश लागू नियमों के दायरे में आने वाले चिकित्सा प्रतिष्ठानों पर लागू होंगे। संबंधित संस्थानों को प्रमाणपत्र के प्रदर्शन की व्यवस्था लगातार बनाए रखनी होगी।
इलाज की फीस और जांच की दरें करनी होंगी सार्वजनिक
इस आदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू चिकित्सा सेवाओं की दरों को सार्वजनिक करना है। अस्पतालों और क्लीनिकों को अद्यतन एवं मदवार रेट चार्ट प्रदर्शित करना होगा, ताकि मरीज इलाज से पहले या उपचार के दौरान लागू शुल्क की जानकारी प्राप्त कर सकें।
दर सूची में संबंधित सेवाओं के अनुसार निम्नलिखित शुल्क शामिल किए जाने हैं:
- डॉक्टरों की परामर्श फीस
- विभिन्न जांचों के शुल्क
- चिकित्सा प्रक्रियाओं की दरें
- बेड और अन्य लागू सेवा शुल्क
- संस्थान में उपलब्ध अन्य संबंधित चिकित्सा सेवाओं की दरें
यहां ध्यान देने वाली बात है कि आदेश में किसी एक समान फीस को सभी अस्पतालों पर लागू करने का निर्देश नहीं बताया गया है। इसके बजाय संस्थानों को अपनी लागू दरों का स्पष्ट और अद्यतन विवरण प्रदर्शित करना होगा। इस व्यवस्था से मरीजों और उनके परिजनों को संभावित खर्च का अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, बिलिंग और सेवा शुल्क को लेकर भ्रम की स्थिति कम करने में भी यह उपयोगी साबित हो सकती है।
डॉक्टरों की डिग्री, विशेषज्ञता और रजिस्ट्रेशन की जानकारी भी जरूरी
सिविल सर्जन कार्यालय के निर्देश के अनुसार, चिकित्सा प्रतिष्ठानों को वहां कार्यरत डॉक्टरों से संबंधित जरूरी जानकारी भी सार्वजनिक करनी होगी। इसमें डॉक्टर का नाम, शैक्षणिक योग्यता, संबंधित मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण का विवरण, विशेषज्ञता और परामर्श या ड्यूटी का समय शामिल है। इससे मरीजों को यह जानने में सुविधा होगी कि संबंधित संस्थान में कौन-से डॉक्टर उपलब्ध हैं, उनकी विशेषज्ञता क्या है और उनसे परामर्श किस समय लिया जा सकता है। डॉक्टरों की योग्यता और पंजीकरण की जानकारी का सार्वजनिक प्रदर्शन मरीजों को अपनी चिकित्सा जरूरतों के अनुरूप विकल्प चुनने में भी मदद कर सकता है।
मरीजों के अधिकार और शिकायत व्यवस्था की जानकारी भी प्रदर्शित करनी होगी
आदेश में अस्पतालों और क्लीनिकों को उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं तथा सुविधाओं की जानकारी भी उचित स्थान पर प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, मरीजों के अधिकारों, शिकायत निवारण की व्यवस्था और लागू नियमों के तहत आवश्यक अन्य जानकारियां भी सार्वजनिक करनी होंगी। इससे मरीजों और उनके परिजनों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी सेवा, शुल्क या अन्य समस्या के मामले में शिकायत कहां और कैसे दर्ज कराई जा सकती है। स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि मरीजों को न केवल इलाज मिले, बल्कि उन्हें उपचार से संबंधित जरूरी जानकारी और अपनी शिकायत रखने का उपयुक्त माध्यम भी उपलब्ध हो।
सोशल एक्टिविस्ट ज्योति शर्मा के अनुरोध के बाद जारी हुआ आदेश
सिविल सर्जन कार्यालय के अनुसार, यह निर्देश सोशल एक्टिविस्ट ज्योति शर्मा के आधिकारिक ई-मेल के माध्यम से प्राप्त अनुरोध के संदर्भ में जारी किया गया है। अनुरोध में क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट (Clinical Establishments Act—CEA) के प्रावधानों के अनुपालन का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद रांची जिले में संचालित संबंधित चिकित्सा प्रतिष्ठानों को जरूरी जानकारियां प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया। आदेश की प्रतिलिपि रांची के उपायुक्त को जानकारी के लिए, संबंधित अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों को अनुपालन के लिए तथा निरीक्षण अधिकारियों को निगरानी और सत्यापन के लिए भेजी गई है। ज्योति शर्मा को भी उनके अनुरोध के संदर्भ में इसकी प्रतिलिपि भेजी गई।
सात दिनों में अनुपालन, निरीक्षण में होगी जांच
कार्यालय आदेश में संबंधित चिकित्सा प्रतिष्ठानों को आदेश जारी होने की तारीख से सात दिनों के भीतर निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके बाद भी संबंधित जानकारियों को प्रदर्शित रखने की व्यवस्था जारी रखनी होगी। निरीक्षण प्राधिकारियों और नामित अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान यह जांचने की जिम्मेदारी दी गई है कि संस्थान निर्देशों का पालन कर रहे हैं या नहीं। यदि किसी अस्पताल या क्लीनिक में कमी या नियमों के उल्लंघन की स्थिति पाई जाती है, तो इसकी जानकारी सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को दी जाएगी। इसके बाद लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार उचित कार्रवाई की जा सकती है।
मरीजों के लिए क्या बदलेगा?
यदि निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन होता है, तो मरीजों को अस्पताल में प्रवेश करते ही कुछ बुनियादी सवालों के जवाब आसानी से मिल सकेंगे—संस्थान का निबंधन वैध है या नहीं, कौन-से डॉक्टर उपलब्ध हैं, उनकी योग्यता क्या है और विभिन्न सेवाओं की लागू दरें कितनी हैं। इससे मरीजों को उपचार के विकल्पों की तुलना करने, संभावित खर्च समझने और जरूरत पड़ने पर शिकायत दर्ज कराने में मदद मिल सकती है। हालांकि, आदेश का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अस्पताल और क्लीनिक कितनी गंभीरता से निर्देशों का पालन करते हैं और निरीक्षण व्यवस्था कितनी प्रभावी रहती है।
रांची में अब अस्पतालों और क्लीनिकों के लिए केवल चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि मरीजों को जरूरी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण होगा। सात दिनों की समयसीमा के बाद होने वाले निरीक्षण से पता चलेगा कि जिले के चिकित्सा प्रतिष्ठान इन निर्देशों का कितना अनुपालन करते हैं।





