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महंगाई भी नहीं रोक पाई खरीदारी! अक्टूबर में GST 23% उछला, कार बिक्री और UPI ने बनाए रिकॉर्ड

GST Collection

UPI से एक महीने में 25.47 अरब डिजिटल ट्रांजैक्शन, बिजली की खपत में भी करीब 22% की बढ़ोतरी

New Delhi: महंगाई, महंगे सामान और दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद अक्टूबर में भारतीय बाजार में खरीदारी की रफ्तार तेज रही। नवरात्र, दशहरा और दिवाली की तैयारियों के बीच लोगों ने जमकर खरीदारी की, जिसका असर अब देश के आर्थिक आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। अक्टूबर में वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन में सालाना आधार पर करीब 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, कारों की बिक्री, डिजिटल भुगतान और बिजली की खपत ने भी नए रिकॉर्ड बनाए। अक्टूबर के ये आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि त्योहारी सीजन में बाजार में मांग मजबूत रही। हालांकि, इन आंकड़ों को पूरी अर्थव्यवस्था की सेहत का अकेला पैमाना नहीं माना जा सकता, लेकिन उपभोक्ता खर्च और कारोबारी गतिविधियों में तेजी जरूर दिखाई दे रही है।

GST कलेक्शन 23% बढ़कर 2.31 लाख करोड़ रुपये पहुंचा
अक्टूबर में देश का सकल GST कलेक्शन बढ़कर 2,31,290 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल अक्टूबर की तुलना में इसमें 22.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह जुलाई 2017 में GST लागू होने के बाद के सबसे ऊंचे मासिक संग्रहों में शामिल है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, घरेलू लेनदेन से GST राजस्व करीब 1.59 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें सालाना आधार पर 15.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, आयात से मिलने वाला GST राजस्व 42.2 प्रतिशत बढ़कर 72,246 करोड़ रुपये पहुंच गया। अक्टूबर में GST रिफंड भी बढ़कर 27,934 करोड़ रुपये रहा। रिफंड घटाने के बाद शुद्ध GST कलेक्शन करीब 2.03 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 25.6 प्रतिशत अधिक है। अप्रैल से अक्टूबर 2026 के बीच कुल सकल GST कलेक्शन 14.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। इसमें पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 13.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा देश में आर्थिक गतिविधियों और टैक्स संग्रह की स्थिति को दर्शाता है।

कार कंपनियों की बल्ले-बल्ले, पहली बार 5 लाख के पार पहुंची थोक बिक्री
त्योहारी सीजन का सबसे बड़ा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर में दिखाई दिया। अक्टूबर में देश में यात्री वाहनों की घरेलू थोक बिक्री पहली बार पांच लाख यूनिट के पार पहुंचने का अनुमान है। उद्योग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में कार कंपनियों ने डीलरों को लगभग 5.25 से 5.30 लाख यात्री वाहन भेजे। यह पिछले साल के मुकाबले करीब 12 से 13 प्रतिशत अधिक है। इस बढ़ोतरी के पीछे नवरात्र और दशहरा के दौरान बढ़ी मांग के साथ डीलरशिप पर त्योहारी बिक्री के लिए पहले से वाहनों का स्टॉक पहुंचाना भी एक महत्वपूर्ण कारण रहा। मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, महिंद्रा, हुंडई और किआ जैसी प्रमुख कंपनियों ने अक्टूबर में अपनी घरेलू बिक्री में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया। मारुति सुजुकी ने घरेलू यात्री वाहन बिक्री में बढ़त बनाए रखी, जबकि टाटा मोटर्स और महिंद्रा की बिक्री में भी तेजी रही। हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि थोक बिक्री का मतलब कंपनियों की ओर से डीलरों को भेजे गए वाहन हैं। यह ग्राहकों को वास्तव में बेचे गए वाहनों की संख्या से अलग आंकड़ा होता है।

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UPI से एक महीने में 25.47 अरब डिजिटल ट्रांजैक्शन
डिजिटल भुगतान के मामले में भी अक्टूबर ऐतिहासिक रहा। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में UPI के जरिए कुल 25.47 अरब यानी 2,547 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए। पिछले साल की तुलना में इसमें करीब 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इन ट्रांजैक्शन का कुल मूल्य 31.53 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर लगभग 16 प्रतिशत अधिक है। अक्टूबर में UPI के जरिए औसतन प्रतिदिन करीब 82.2 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए। वहीं, प्रतिदिन भुगतान की औसत रकम पहली बार लगभग 1.01 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई। त्योहारी खरीदारी, ऑनलाइन शॉपिंग, बाजारों में भुगतान और रोजमर्रा के लेनदेन में डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल ने इस रिकॉर्ड में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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बिजली की खपत में भी करीब 22% की बढ़ोतरी
अक्टूबर में बिजली की खपत के आंकड़ों ने भी आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत दिया। देश में बिजली की कुल खपत सालाना आधार पर 21.88 प्रतिशत बढ़कर 159.76 अरब यूनिट पहुंच गई। अक्टूबर 2025 में यह आंकड़ा 131.07 अरब यूनिट था। बिजली की मांग बढ़ने के पीछे त्योहारी सीजन में व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी के साथ कई क्षेत्रों में कूलिंग उपकरणों का लगातार इस्तेमाल भी प्रमुख कारण रहा। अक्टूबर में देश की अधिकतम बिजली मांग 260.73 गीगावाट तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 210.82 गीगावाट थी। बिजली की खपत में यह बढ़ोतरी बाजारों, उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बढ़ी गतिविधियों को भी दर्शाती है।

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क्या भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूत हो रही है घरेलू मांग?
GST कलेक्शन, कारों की थोक बिक्री, UPI ट्रांजैक्शन और बिजली की खपत के आंकड़ों को एक साथ देखें तो अक्टूबर में भारतीय बाजार में मजबूत गतिविधियां दिखाई देती हैं। त्योहारी खरीदारी ने उपभोक्ता बाजार को गति दी और कारोबारियों से लेकर ऑटोमोबाइल कंपनियों तक को इसका लाभ मिला। हालांकि, बाजार की तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। कारों के मामले में कंपनियों की ओर से डीलरों को भेजे गए वाहनों की संख्या और ग्राहकों की की वास्तविक खरीदारी में अंतर है। इसी तरह बिजली की अधिक खपत को केवल आर्थिक विकास का संकेत नहीं माना जा सकता, क्योंकि मौसम और तापमान भी इसमें भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद अक्टूबर के आंकड़े बताते हैं कि महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत में त्योहारी सीजन की खपत मजबूत रही। अब आर्थिक जानकारों की नजर नवंबर और दिसंबर के आंकड़ों पर रहेगी। इनसे पता चलेगा कि अक्टूबर की तेजी आगे भी बनी रहती है या त्योहारी मांग के बाद बाजार की रफ्तार सामान्य हो जाती है।

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