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पढ़ाई छूटी तो नहीं टूटा हौसला, आज ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहीं जया कच्छप

Jaya Kachhap

पलाश उत्तम एग्रो प्रोसेसिंग सेंटर से बदली दिशा, मदर डेयरी में अकाउंटेंट की नौकरी से शुरू हुआ सफर

रांची: आर्थिक तंगी के कारण कभी पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हुईं रांची के पुरियान गांव की जया कच्छप आज पलाश उत्तम एग्रो प्रोसेसिंग सेंटर में सेंटर इंचार्ज की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। किसान परिवार से आने वाली जया के जीवन में आर्थिक कठिनाइयों और पारिवारिक जिम्मेदारियों ने कई चुनौतियां खड़ी कीं, लेकिन बेहतर भविष्य का सपना उन्होंने कभी नहीं छोड़ा। आज जया न सिर्फ अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ी हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने और आजीविका के नए अवसरों से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

मदर डेयरी में अकाउंटेंट की नौकरी से शुरू हुआ सफर
जया कच्छप के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में पहला बड़ा कदम तब आया, जब उन्हें मदर डेयरी में अकाउंटेंट के रूप में काम करने का अवसर मिला। इस नौकरी के दौरान उन्होंने पेशेवर कार्यप्रणाली को समझा, नए कौशल सीखे और अपने भीतर आत्मविश्वास विकसित किया। इसके बाद उन्होंने बेड़ो क्लस्टर लेवल फेडरेशन के साथ काम किया। यहां उन्हें सामुदायिक संस्थाओं और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को करीब से समझने का अवसर मिला। यही अनुभव आगे चलकर उनके नेतृत्व कौशल को मजबूत करने में मददगार बना।

पलाश उत्तम एग्रो प्रोसेसिंग सेंटर से बदली दिशा
जया के जीवन में एक और महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब उन्हें पलाश उत्तम एग्रो प्रोसेसिंग सेंटर के बारे में जानकारी मिली। अधिक जिम्मेदारियां संभालने और अपने अनुभव को आगे बढ़ाने की इच्छा के साथ उन्होंने सेंटर इंचार्ज के पद के लिए आवेदन किया। चयन होने के बाद उनके काम का दायरा भी बढ़ गया। अब वह सेंटर के संचालन की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को आजीविका और सामूहिक उद्यमों से जोड़ने के लिए भी काम कर रही हैं।

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गांव-गांव जाकर महिलाओं को कर रहीं प्रेरित
सेंटर इंचार्ज के रूप में जया गांव-गांव जाकर महिलाओं को सेंटर की गतिविधियों और उपलब्ध अवसरों की जानकारी देती हैं। वह महिलाओं को सामूहिक उद्यमों और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। उनका प्रयास है कि ग्रामीण महिलाएं अपनी क्षमता को पहचानें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाएं। जया का मानना है कि अवसर मिलने पर महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकती हैं, बल्कि अपने समुदाय में भी सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।

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बेटियों के लिए मां ही बनीं सबसे बड़ी प्रेरणा
जया की इस यात्रा का असर उनके परिवार पर भी दिखाई देता है। उनकी बेटियां अपनी मां को अपना आदर्श मानती हैं। स्कूल में जब उनसे भविष्य के सपनों के बारे में पूछा जाता है, तो वे अपनी मां की तरह बनने की इच्छा जाहिर करती हैं। जया के लिए बेटियों की यह सोच उनकी पूरी यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। संघर्षों के बीच आगे बढ़ते हुए उन्होंने अपनी बेटियों के सामने यह उदाहरण रखा है कि परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का रास्ता बनाया जा सकता है।

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मेहनत से बनाया अपना घर
वर्षों की मेहनत और आत्मनिर्भरता के बाद जया ने अपना खुद का घर भी बनाया है। यह घर उनके लिए सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि उनके संघर्ष, मेहनत और आर्थिक आत्मनिर्भरता की कहानी का प्रतीक है। पढ़ाई छूटने से लेकर एक संस्थान की जिम्मेदारी संभालने तक का उनका सफर आसान नहीं रहा। लेकिन हर पड़ाव पर मिले अवसरों और अपने प्रयासों के जरिए उन्होंने अपनी राह खुद बनाई।

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दूसरी ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं उदाहरण
जया कच्छप की कहानी सिर्फ व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है। यह इस बात का उदाहरण भी है कि सही अवसर, सहयोग और दृढ़ संकल्प मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपनी परिस्थितियों को बदल सकती हैं। कभी आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ने वाली जया आज खुद नेतृत्व की भूमिका में हैं और दूसरी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनने की राह दिखा रही हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि आत्मनिर्भरता केवल व्यक्तिगत बदलाव नहीं, बल्कि परिवार और समाज में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत भी हो सकती है।

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