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JSSC-CGL फर्जीवाड़े की जांच में देवघर से सरकारी कर्मचारी गिरफ्तार, अभ्यर्थियों के चेक-प्रमाण पत्र बरामद होने का दावा

JSSC CGL Case Deoghar

रिखिया थाना क्षेत्र में छापेमारी के दौरान सुधाकर यादव पकड़ा गया

करीब दो दर्जन अभ्यर्थियों से ‘सेटिंग’ के कथित कनेक्शन की जांच

देवघर : झारखंड में JSSC-CGL नियुक्ति में कथित फर्जीवाड़े की जांच के बीच देवघर से एक सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी की खबर सामने आई है। रिखिया थाना क्षेत्र के बैजनाथपुर बंधा इलाके में पुलिस ने छापेमारी कर सुधाकर यादव नामक युवक को पकड़ा है। उसके पास से कई अभ्यर्थियों के चेक, प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज बरामद होने की बात सामने आई है। हालांकि, स्थानीय पुलिस की ओर से फिलहाल गिरफ्तारी और बरामदगी को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में आरोपी की कथित भूमिका और बरामद दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

2018 से रांची सचिवालय में था लिपिक
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुधाकर यादव मूल रूप से बिहार के बांका जिले के जयपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। वह वर्ष 2018 से रांची सचिवालय में लिपिक के पद पर कार्यरत था। पूछताछ में उसके द्वारा यह जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है कि बाद में उसका तबादला दुमका कर दिया गया था। इसके बाद वह देवघर में रह रहा था। पुलिस को आशंका है कि जांच एजेंसी की कार्रवाई की भनक आरोपी को पहले ही लग गई थी और इसी वजह से वह देवघर में रह रहा था। हालांकि, यह पुलिस की प्रारंभिक आशंका है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

करीब दो दर्जन अभ्यर्थियों से जुड़ा कनेक्शन?
जांच में अब एक और अहम कड़ी सामने आने की बात कही जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ के आधार पर सुधाकर यादव पर करीब दो दर्जन अभ्यर्थियों की नौकरी में कथित ‘सेटिंग’ कराने का आरोप सामने आया है। पुलिस और जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुट सकती है कि इन अभ्यर्थियों के साथ उसका संपर्क किस माध्यम से हुआ था और कथित तौर पर नौकरी दिलाने के नाम पर किसी तरह का लेन-देन हुआ था या नहीं। यदि बरामद चेक और प्रमाण पत्र वास्तव में अभ्यर्थियों से संबंधित पाए जाते हैं, तो जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि ये दस्तावेज आरोपी के पास किस उद्देश्य से थे।

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हजारीबाग में 1200 अभ्यर्थियों की तैयारी का भी दावा
JSSC-CGL मामले की जांच के दौरान हजारीबाग में करीब 1200 अभ्यर्थियों को एक जगह रखकर परीक्षा की तैयारी कराने की जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि इन अभ्यर्थियों को कथित तौर पर सवाल-जवाब रटाए गए थे। जांच एजेंसी अब इस पहलू की भी पड़ताल कर सकती है कि इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को किसके निर्देश पर एकत्र किया गया था और उनकी तैयारी के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था। हालांकि, इस संबंध में भी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

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देवघर पहुंच सकती है CID की टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए CID की टीम के देवघर पहुंचकर जांच आगे बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। स्थानीय पुलिस से पूछताछ के बाद आरोपी को रांची ले जाया जा सकता है, जहां जांच एजेंसी उससे कथित नेटवर्क और अन्य लोगों की भूमिका को लेकर पूछताछ कर सकती है। जांच का एक अहम बिंदु यह होगा कि सुधाकर यादव की भूमिका केवल अभ्यर्थियों तक सीमित थी या वह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था। साथ ही, उसके संपर्क में रहे अभ्यर्थियों और अन्य संदिग्ध लोगों की भी जांच की जा सकती है।

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जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
JSSC-CGL नियुक्ति से जुड़े कथित फर्जीवाड़े में जांच एजेंसियां पहले से ही अलग-अलग कड़ियों की पड़ताल कर रही हैं। देवघर से सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी और अभ्यर्थियों से जुड़े दस्तावेज मिलने की बात सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है। फिलहाल सुधाकर यादव की कथित ‘सेटिंग’ में भूमिका, दस्तावेजों की बरामदगी और करीब दो दर्जन अभ्यर्थियों से उसके कनेक्शन की आधिकारिक पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही होगी। आरोपी को दोषी साबित होने से पहले इन आरोपों को जांच के दायरे में मौजूद दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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