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‘वोट चोरी’ के आरोप पर राहुल गांधी को BJP का पलटवार, प्रदीप वर्मा बोले- संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना बंद करें

भाजपा नेता प्रदीप कुमार वर्मा का राहुल गांधी और वोट चोरी के आरोपों पर बयान

‘SIR के आंकड़ों से 2024 के चुनाव को अवैध बताना तर्कहीन’

रांची : नई दिल्ली के रामलीला मैदान में राहुल गांधी के भाषण को लेकर भाजपा ने तीखा पलटवार किया है। भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री, उत्तर प्रदेश के सह-प्रभारी और राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने राहुल गांधी पर ‘वोट चोरी’ के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप लगाया है। डॉ. वर्मा ने कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं का ठीकरा निर्वाचन आयोग समेत संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ने की कोशिश कर रही है। उनके मुताबिक, निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर आरोप लगाकर जनता के बीच संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करना जिम्मेदार राजनीति नहीं है।

‘SIR के आंकड़ों से 2024 के चुनाव को अवैध बताना तर्कहीन’
डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2025-26 के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में सामने आई मतदाता प्रविष्टियों को आधार बनाकर 2024 के लोकसभा चुनाव की वैधता पर सवाल उठाना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि SIR के दौरान करीब 13.39 करोड़ मतदाता प्रविष्टियों को चिह्नित किया गया, जिनमें मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और दोहरे पंजीकरण जैसी श्रेणियां शामिल हैं।भाजपा नेता ने सवाल उठाया कि बाद में हुए मतदाता पुनरीक्षण के आंकड़े अपने आप में 2024 के चुनाव में ‘वोट चोरी’ का प्रमाण कैसे हो सकते हैं। उन्होंने कांग्रेस से कहा कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है तो पार्टी को बूथवार साक्ष्य सामने रखना चाहिए।डॉ. वर्मा ने यह भी दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को बिहार में SIR की वैधानिकता को स्वीकार किया था। हालांकि, SIR और इससे जुड़े न्यायिक आदेशों की सटीक कानूनी स्थिति अलग-अलग आदेशों और कार्यवाही के संदर्भ में देखी जानी चाहिए।

ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी के आरोप पर सवाल
डॉ. वर्मा ने निर्वाचन आयोग के मौजूदा नेतृत्व को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणियों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान राजीव कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे, जबकि ज्ञानेश कुमार ने 15 मार्च 2024 को चुनाव आयुक्त के तौर पर पदभार संभाला था और बाद में 19 फरवरी 2025 को मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने। भाजपा नेता ने इसी आधार पर राहुल गांधी के आरोपों को तर्कहीन बताया और कहा कि किसी व्यक्ति या संस्था को चुनाव परिणाम के लिए इस तरह जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

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‘जेल भेजने की घोषणा संवैधानिक मर्यादा के खिलाफ’
डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने ज्ञानेश कुमार को जेल भेजने से जुड़ी राहुल गांधी की टिप्पणी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक तरफ राहुल गांधी ‘मोहब्बत की दुकान’ की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ किसी संवैधानिक पदाधिकारी को बिना दोषसिद्धि जेल भेजने की घोषणा करते हैं। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति को अपराधी घोषित करने और सजा देने का अधिकार न्यायपालिका के पास है, किसी राजनीतिक मंच या भीड़ के पास नहीं। डॉ. वर्मा ने कहा कि निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जे या मिलीभगत जैसे आरोप गंभीर हैं और ऐसे आरोपों को ठोस तथ्यों के साथ ही सामने रखा जाना चाहिए।

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1 नवंबर की रैली को लेकर भी साधा निशाना
भाजपा नेता ने 1 नवंबर को आयोजित INDIA गठबंधन की रैली की तारीख को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि दीपावली के अवसर पर रविवार को कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला सिख समुदाय की भावनाओं और व्यापारियों के हितों के प्रति कांग्रेस की सोच को दर्शाता है। यह टिप्पणी भाजपा नेता की राजनीतिक प्रतिक्रिया है। कार्यक्रम की तारीख और आयोजन से जुड़े अन्य पक्षों पर विपक्ष की अपनी राजनीतिक दलीलें हैं।

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आपातकाल का हवाला देकर कांग्रेस पर हमला
डॉ. वर्मा ने कांग्रेस के इतिहास का जिक्र करते हुए 12 जून 1975 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले और उसके बाद लगे आपातकाल का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का निर्वाचन निरस्त किया था और इसके कुछ ही दिनों बाद देश में आपातकाल लागू हुआ। भाजपा नेता ने आपातकाल के दौरान विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी, प्रेस सेंसरशिप और नागरिक अधिकारों के दमन का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस के शासनकाल में आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हुए, वही पार्टी आज लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा की बात कर रही है।

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‘संविधान किसी परिवार की जागीर नहीं’
डॉ. वर्मा ने कहा कि संविधान किसी राजनीतिक परिवार की जागीर नहीं है और राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाते समय मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक बयानबाजी संवैधानिक मर्यादाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में होनी चाहिए। भाजपा नेता ने कांग्रेस से ‘वोट चोरी’ के आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण सामने रखने और संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवाद का केंद्र बनाने से बचने की अपील की।

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