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JPSC आंदोलन में जयराम महतो की एंट्री, छात्रों के समर्थन में अनशन का ऐलान; विधानसभा सत्र के बीच बढ़ा सियासी दबाव

Student Protest Jharkhand

JPSC-JSSC विवाद पर और गरमाई राजनीति, विधायक बोले- छात्रों की लड़ाई अब हमारी भी लड़ाई

रांची: झारखंड में JPSC, JSSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन अब नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले कई दिनों से चल रहे आंदोलन के बीच डुमरी विधायक जयराम महतो ने छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने का ऐलान किया है। उनके इस फैसले से आंदोलन को नया राजनीतिक और जनसमर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है। जयराम महतो के इस ऐलान के साथ ही JPSC-JSSC विवाद अब केवल छात्रों का आंदोलन नहीं रह गया है, बल्कि यह झारखंड की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। खास बात यह है कि इसी समय झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र भी चल रहा है, ऐसे में सदन के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर सियासी घमासान तेज होने के आसार हैं।

छात्रों की मांगों को बताया जायज
जयराम महतो ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि छात्र जिस लड़ाई को लड़ रहे हैं, वह केवल उनकी नहीं बल्कि पूरे झारखंड के युवाओं के भविष्य की लड़ाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे आंदोलन के साथ खड़े रहेंगे और जरूरत पड़ने पर स्वयं भी अनशन करेंगे।

CBI जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग
आंदोलनरत छात्र लगातार आरोप लगा रहे हैं कि JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि विवादित परीक्षाओं को रद्द किया जाए, पूरे मामले की CBI जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। रांची में कई दिनों से छात्र धरना, प्रदर्शन और भूख हड़ताल के माध्यम से अपनी मांगें उठा रहे हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार स्पष्ट और लिखित निर्णय नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा।

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देवेंद्र नाथ महतो के अनशन से बढ़ा था दबाव
इससे पहले छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो आमरण अनशन पर बैठे थे। उनके अनशन के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखा, जिससे सरकार और प्रशासन पर दबाव बढ़ा। बाद में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आग्रह पर उन्होंने जल ग्रहण किया, लेकिन आंदोलन समाप्त नहीं किया।

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सरकार ने दिया जांच का भरोसा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले ही कह चुके हैं कि सरकार पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने कहा कि कथित अनियमितताओं की जांच CID कर रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने छात्रों से संवाद के लिए चार मंत्रियों और एक अपर मुख्य सचिव की उच्चस्तरीय कमेटी भी बनाई है। हालांकि छात्र अब भी अपनी प्रमुख मांगों पर कायम हैं और निष्पक्ष जांच तथा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग दोहरा रहे हैं।

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विधानसभा सत्र में भी गूंजेगा मुद्दा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष JPSC-JSSC विवाद को प्रमुख मुद्दा बनाएगा। भाजपा पहले ही आंदोलन का समर्थन कर चुकी है और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी भी धरनास्थल पहुंचकर छात्रों के साथ एकजुटता जता चुके हैं। अब जयराम महतो के अनशन के ऐलान के बाद सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ सकता है।

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बढ़ सकता है आंदोलन का दायरा
विश्लेषकों का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि भी सीधे आंदोलन में शामिल होने लगते हैं तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। इससे सरकार पर जल्द समाधान निकालने का दबाव भी बढ़ेगा। फिलहाल सभी की निगाहें सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हैं। यदि बातचीत से कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तो JPSC-JSSC विवाद झारखंड में एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन का रूप ले सकता है।

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