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पाकुड़ में पत्थर खनन घोटाला: लीज सीमा से बाहर अवैध खुदाई, खनन विभाग की चुप्पी से करोड़ों के राजस्व का नुकसान

पाकुड़ में पत्थर खनन घोटाला पाकुड़ में पत्थर खनन घोटाला

हिरणपुर के बेलडीहा और मानसिंहपुर में खनन माफिया की खुलेआम लूट, विभागीय संरक्षण का आरोप

रिपोर्ट: सुमित भगत, पाकुड़/ अमित, रांची
पाकुड़:
पाकुड़ जिले के हिरणपुर अंचल के बेलडीहा और मानसिंहपुर गांवों में एक बड़ा खनन घोटाला सामने आया है, जिसने खनन विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लीजधारी पत्थर कंपनियों द्वारा अपने स्वीकृत लीज क्षेत्र की सीमा से बाहर निकलकर करोड़ों के पत्थर की अवैध खुदाई की जा रही है। और यह सब कुछ खनन विभाग की आंखों के सामने हो रहा है।

चार बीघा से अधिक में अवैध खनन
सूत्रों के मुताबिक, ‘संजू’, ‘मुस्कान’ और ‘राजा’ नामक व्यक्तियों के साथ-साथ फोर स्टार स्टोन वर्क्स नामक कंपनी द्वारा कम से कम चार बीघा जमीन पर लीज सीमा के बाहर पत्थर की खुदाई कर ली गई है। यह उत्खनन क्षेत्र सरकारी लीज रिकॉर्ड में शामिल नहीं है। यानी जो खुदाई हो रही है, वह पूरी तरह गैरकानूनी है।

विभाग को पहले से जानकारी, फिर भी चुप्पी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध गतिविधि की जानकारी जिला खनन विभाग को पहले से थी। लेकिन, कार्रवाई के नाम पर सिर्फ “फाइल घुमाने” की रस्म अदायगी की जा रही है। विभागीय अधिकारियों की चुप्पी को “मौन समर्थन” के तौर पर देखा जा रहा है।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन माफियाओं और विभागीय अधिकारियों के बीच “सेटिंग-गेटिंग” का ऐसा मजबूत गठजोड़ बन चुका है कि कोई शिकायत करने की हिम्मत नहीं करता।

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लीज में फर्जीवाड़ा: दस्तावेज भी संदेह के घेरे में
मानसिंहपुर गांव में फोर स्टार स्टोन वर्क्स नामक कंपनी द्वारा लीज प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने का भी गंभीर आरोप लगा है। कहा जा रहा है कि खनन विभाग के अधिकारियों की मदद से सारे कागजात “ठीक-ठाक” करवा लिए गए ताकि लीज स्वीकृत हो सके। यह न सिर्फ सरकारी नियमों की अवहेलना है बल्कि राजस्व चोरी का सुनियोजित तरीका भी।

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वर्षों से चलता आ रहा है ‘सेटिंग-सिस्टम’
यह पहली बार नहीं है जब पाकुड़ में खनन माफिया लीज क्षेत्र से बाहर खुदाई करते पकड़े गए हैं। यह वर्षों पुरानी कार्यशैली है—लीज से बाहर खनन करो, हिस्सा विभाग को दो, और मामला दबा दो। कई बार शिकायतें भी हुईं, लेकिन कार्रवाई वहीं की वहीं रह जाती है।

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एक स्थानीय ग्रामीण का कहना है, “यहां तो सबकुछ सेट है। पत्थर माफिया खुदाई करता है, ट्रैक्टर पर भरकर ले जाता है और विभागीय अधिकारी सिर्फ खिड़की से देखते हैं।”

करोड़ों का नुकसान, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा
सरकारी खजाने को अब तक करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है, लेकिन न तो जिलाधिकारी कोई संज्ञान ले रहे हैं और न ही खनन विभाग के आला अफसर कोई जवाब दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है—क्या यह लूट सरकारी संरक्षण में हो रही है?

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता लगातार इस घोटाले को उजागर करने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों की मांग है कि डीसी स्तर की उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर पूरे मामले की जांच कराई जाए और दोषियों पर आपराधिक मामला दर्ज हो।

जब सरकार “मिनरल पॉलिसी” और खनन क्षेत्र में पारदर्शिता की बात करती है, तब पाकुड़ जैसे जिले में हो रहे इस तरह के खुल्लमखुल्ला लूट की घटनाएं उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करती हैं। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में राजस्व घाटा और भी गहरा होगा।

तो क्या वाकई खनन माफिया बेलगाम हो चुके हैं? और क्या विभाग ने जानबूझकर आंखें मूंद रखी हैं? यह जांच का विषय है, लेकिन एक बात तय है—झोला तैयार रखना वाली कहानी यहां सच साबित हो रही है।

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