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ईरान का भारत को बड़ा भरोसा! स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरेंगे भारतीय जहाज, चीन समेत 4 देशों को छूट

ईरान ने भारतीय जहाजों को होर्मुज से गुजरने की दी छूट

भारत के समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम फैसला, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कूटनीतिक संदेश

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान ने भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम फैसला लिया है। ईरान ने भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लागू ट्रांजिट प्रतिबंधों से छूट देने की घोषणा की है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात-मुकद्दम ने बताया कि इन चार देशों के जहाज जलमार्ग से गुजर सकते हैं और अमेरिकी पक्ष भी इनके आवागमन में बाधा नहीं डाल रहा है। यह फैसला भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा और समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत की बड़ी मात्रा में ऊर्जा आपूर्ति इसी समुद्री क्षेत्र से होकर आती है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत के करीब 90 प्रतिशत LPG आयात और कतर तथा UAE से आने वाले LNG का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इस जलमार्ग से गुजरता है।

भारत को क्यों मिली विशेष छूट?
ईरानी सांसद अमीर हयात-मुकद्दम के अनुसार, भारत को यह छूट ईरान में दवाओं के आयात को सुगम बनाने के उद्देश्य से दी गई है। यानी भारत से आवश्यक दवाओं की आपूर्ति ईरान तक जारी रखने के लिए भारतीय जहाजों के आवागमन को प्रतिबंधों से अलग रखा गया है। ईरान ने चीन को भी विशेष छूट दी है। हयात-मुकद्दम के मुताबिक चीन के जहाजों को यह सुविधा मुख्य रूप से बीजिंग से राजनीतिक समर्थन बनाए रखने के उद्देश्य से दी गई है। हालांकि, छूट का अर्थ यह नहीं है कि सभी जहाज बिना किसी शुल्क के गुजर रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भारत और चीन के जहाजों से ट्रांजिट फीस ली जा रही है, जबकि कतर के जहाजों को शुल्क से छूट दी गई है। इराकी जहाजों के लिए फीस की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।

भारत के समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम फैसला
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित है और वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया से समुद्री रास्ते से होने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब एक चौथाई हिस्सा इस जलमार्ग से जुड़ा है। भारत के लिए इसका महत्व और बढ़ जाता है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। हालांकि भारत ने हाल के वर्षों में रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और UAE जैसे स्रोतों से आयात बढ़ाकर होर्मुज पर निर्भरता कम करने की कोशिश की है, फिर भी LPG और LNG की आपूर्ति के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण बना हुआ है।

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अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कूटनीतिक संदेश
भारतीय जहाजों को छूट देने का फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। इसी बीच कतर की मध्यस्थता से संभावित शांति पहल को लेकर भी तेहरान में राजनीतिक स्तर पर चर्चा चल रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के राजनीतिक नेतृत्व का एक वर्ग कतर की ओर से आए प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करने की पैरवी कर रहा है, जबकि सैन्य नेतृत्व के बीच अमेरिका के साथ संभावित टकराव को लेकर चिंता बनी हुई है। इससे साफ है कि एक तरफ ईरान रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अपने नियंत्रण और सुरक्षा हितों को लेकर सख्त रुख बनाए हुए है, वहीं दूसरी तरफ भारत, चीन, इराक और कतर जैसे देशों के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक हितों को भी ध्यान में रख रहा है।

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भारत के लिए राहत, लेकिन समुद्री सुरक्षा की चुनौती बरकरार
ईरान की इस घोषणा से भारतीय व्यापारिक जहाजों के लिए होर्मुज से आवाजाही की स्थिति फिलहाल बेहतर हो सकती है। भारत सरकार भी पश्चिम एशिया में समुद्री सुरक्षा और भारतीय जहाजों की आवाजाही पर लगातार नजर रख रही है। हालांकि, क्षेत्र में तनाव को देखते हुए इसे पूर्ण जोखिम-मुक्त स्थिति नहीं माना जा सकता। भारतीय जहाजों और समुद्री कर्मियों की सुरक्षा के लिए निगरानी और सुरक्षा प्रोटोकॉल महत्वपूर्ण बने रहेंगे। भारत के समुद्री प्रशासन ने भी होर्मुज और आसपास के क्षेत्र में जहाजों की निगरानी तथा सुरक्षा को लेकर पहले से कई व्यवस्थाएं लागू की हैं।

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