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झारखंड DGP नियुक्ति नियमावली पर सुप्रीम कोर्ट में 22 सितंबर को सुनवाई

Jharkhand DGP appointment

रांची: झारखंड में DGP की नियुक्ति से जुड़ी नियमावली को लेकर चल रहे मामले में सुप्रीम कोर्ट में 22 सितंबर को सुनवाई होने वाली है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ करेगी। यह मामला झारखंड सरकार की ओर से बनाई गई DGP नियुक्ति नियमावली की वैधता से जुड़ा है। इस नियमावली को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पहुंचा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में राज्य की DGP नियुक्ति प्रक्रिया और नियमावली की शीर्ष अदालत के पूर्व निर्देशों के अनुरूपता पर सुनवाई हो रही है।

DGP नियुक्ति नियमावली को लेकर क्या है मामला?
झारखंड सरकार ने DGP की नियुक्ति को लेकर अपनी नियमावली तैयार की है। बाबूलाल मरांडी की ओर से इस नियमावली को सुप्रीम कोर्ट के DGP नियुक्ति से संबंधित पूर्व दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं होने का दावा करते हुए चुनौती दी गई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में दिए गए दिशा-निर्देश भी महत्वपूर्ण हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों में पुलिस प्रमुख की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया और अधिकारियों की पात्रता से जुड़े दिशा-निर्देश पहले निर्धारित किए हैं। झारखंड से जुड़े मामले में अब अदालत के सामने यह सवाल है कि राज्य की मौजूदा नियुक्ति नियमावली शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप है या नहीं।

एमिकस क्यूरी ने रखी अपनी राय
मामले में सुप्रीम कोर्ट की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) ने भी अपनी रिपोर्ट/नोट अदालत के समक्ष रखा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, एमिकस क्यूरी ने झारखंड की DGP नियुक्ति से जुड़े नियमों के कुछ प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं माना है। रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि नियुक्ति नियमावली की दो धाराओं को लेकर आपत्ति जताई गई है। हालांकि, एमिकस क्यूरी की राय अदालत का अंतिम फैसला नहीं है। इन आपत्तियों पर राज्य सरकार का पक्ष सुनने और मामले के सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट आगे का आदेश देगा।

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अब राज्य सरकार को रखना है अपना पक्ष
एमिकस क्यूरी की ओर से राय सामने आने के बाद अब झारखंड सरकार को मामले में अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। सरकार की ओर से यह बताया जा सकता है कि राज्य की DGP नियुक्ति नियमावली किस आधार पर तैयार की गई है और उसमें शामिल प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुरूप किस तरह हैं। 22 सितंबर की सुनवाई में इसी कानूनी और संवैधानिक पहलू पर आगे की बहस होने की संभावना है।

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तदाशा मिश्रा की नियुक्ति भी मामले से जुड़ी
मामला झारखंड की DGP नियुक्ति प्रक्रिया के व्यापक संदर्भ से जुड़ा है। सितंबर में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एमिकस क्यूरी की ओर से झारखंड की तत्कालीन DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, तदाशा मिश्रा को 30 दिसंबर 2025 को DGP नियुक्त किया गया था, जबकि उनकी सेवानिवृत्ति अगले दिन थी। एमिकस क्यूरी ने इस नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट के उस सिद्धांत से जोड़कर देखा जिसमें DGP पद पर नियुक्ति के समय अधिकारी के पास कम से कम छह महीने की सेवा शेष होने की बात कही गई है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि नियुक्ति से जुड़े इन पहलुओं पर अंतिम कानूनी स्थिति सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ही स्पष्ट होगी।

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22 सितंबर की सुनवाई पर रहेगी नजर
झारखंड DGP नियुक्ति नियमावली से जुड़े मामले में अब 22 सितंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण है। अदालत के समक्ष राज्य सरकार का पक्ष, एमिकस क्यूरी की राय और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व दिशा-निर्देशों के संदर्भ में नियमावली की वैधता पर विचार होगा।सुनवाई के बाद अदालत की ओर से जारी आदेश से यह स्पष्ट होगा कि DGP नियुक्ति नियमावली को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।

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