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WhatsApp पर आया फर्जी RTO चालान और खाली हो गया खाता! जामताड़ा में साइबर गिरोह के 2 आरोपी गिरफ्तार

Jamtara cyber fraud

जामताड़ा: झारखंड के जामताड़ा में साइबर पुलिस ने फर्जी RTO ई-चालान के नाम पर लोगों को APK फाइल भेजकर साइबर ठगी करने के आरोप में दो युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी व्हाट्सऐप के जरिए लोगों को फर्जी ई-चालान भेजते थे और उसे डाउनलोड करने के बाद मोबाइल की जानकारी हासिल कर वित्तीय धोखाधड़ी करते थे। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक को मिली गुप्त सूचना के आधार पर कर्माटांड़ थाना क्षेत्र के सुंदरजोड़ी गांव में की गई। साइबर थाना प्रभारी राजेश मंडल के अनुसार, पुलिस टीम ने सुंदरजोड़ी गांव में सोनू कुमार मंडल के घर पर छापेमारी की, जहां दोनों आरोपियों को कथित तौर पर साइबर अपराध करते हुए पकड़ा गया।

दो आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गौतम कुमार मंडल, पिता बलराम मंडल और सोनू कुमार मंडल, पिता रंजीत मंडल, दोनों निवासी सुंदरजोड़ी गांव के रूप में की है। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी कथित तौर पर फर्जी RTO ई-चालान के नाम पर लोगों को निशाना बना रहे थे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से चार मोबाइल फोन और तीन सिम कार्ड बरामद किए हैं। बरामद मोबाइल और सिम कार्ड की तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इन उपकरणों के जरिए कितने लोगों को फर्जी संदेश भेजे गए और किन-किन खातों में साइबर ठगी से जुड़ा लेनदेन हुआ।

व्हाट्सऐप पर भेजते थे फर्जी ई-चालान
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी लोगों के व्हाट्सऐप नंबर पर फर्जी RTO ई-चालान का APK फाइल या लिंक भेजते थे। संदेश इस तरह तैयार किया जाता था कि प्राप्तकर्ता उसे वास्तविक ट्रैफिक चालान समझकर संबंधित फाइल डाउनलोड कर ले। पुलिस का दावा है कि फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करने के बाद आरोपियों को पीड़ित के मोबाइल तक पहुंच बनाने का मौका मिल जाता था। इसके जरिए वे मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारी और वित्तीय गतिविधियों से संबंधित डेटा हासिल करने की कोशिश करते थे। इसके बाद कथित तौर पर ई-वॉलेट और अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर पीड़ितों के खातों से रकम निकाल ली जाती थी।

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अलग-अलग राज्यों के लोगों को बनाते थे निशाना
जामताड़ा साइबर पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार दोनों आरोपी केवल झारखंड तक सीमित लोगों को निशाना नहीं बनाते थे। पुलिस का दावा है कि गिरोह देश के अलग-अलग राज्यों में रहने वाले लोगों को फर्जी RTO ई-चालान के नाम पर संदेश भेजकर ठगी करता था। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर उनके संभावित नेटवर्क और संपर्कों की जानकारी जुटा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं और फर्जी ई-चालान तैयार करने तथा लोगों के मोबाइल नंबर हासिल करने में किन माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था।

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APK फाइल को लेकर पुलिस की चेतावनी
इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने लोगों को अनजान नंबरों से आने वाले RTO चालान, बैंक, बिजली बिल या अन्य सरकारी सेवा से जुड़े संदिग्ध लिंक और APK फाइलों को लेकर सावधान रहने की सलाह दी है। किसी भी अनजान APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल करने से मोबाइल की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। खासकर ऐसे संदेश जिनमें तुरंत भुगतान करने, जुर्माना भरने या किसी लिंक पर क्लिक करने का दबाव बनाया जाता है, उनकी सत्यता आधिकारिक माध्यम से जांचना जरूरी है।

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साइबर नेटवर्क की जांच जारी
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच से साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़ी और जानकारी सामने आ सकती है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों को अपना निशाना बनाया और ठगी की कुल रकम कितनी है। फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस उनके संपर्क में रहे अन्य संदिग्धों की पहचान करने में जुटी है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद गिरोह के नेटवर्क और साइबर ठगी से जुड़े अन्य मामलों के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

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