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निष्कासन रद्द होने के तीन महीने बाद फिर नोटिस, हेमंत सोरेन पर बयान से योगेंद्र साव घिरे

Yogendra Sao

रांची: झारखंड कांग्रेस में पूर्व मंत्री और पार्टी नेता योगेंद्र साव के सार्वजनिक बयान को लेकर एक बार फिर अनुशासन का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर हालिया टिप्पणी को लेकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति ने साव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। समिति के अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव की ओर से जारी नोटिस में योगेंद्र साव से तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। इसके साथ ही उन्हें समिति के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताने के लिए कहा गया है कि पार्टी संविधान के तहत उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।

हजारीबाग में दिए बयान को लेकर विवाद
मामला हजारीबाग के हुरहुरू इलाके में खासमहल जमीन पर प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान दिए गए योगेंद्र साव के बयान से जुड़ा बताया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रशासन की कार्रवाई के दौरान अधिकारियों के साथ विवाद के बीच साव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार को लेकर टिप्पणी की थी। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, साव ने मुख्यमंत्री के खिलाफ बेहद तीखी टिप्पणी की थी। कांग्रेस ने उनके हालिया सार्वजनिक बयानों को पार्टी नेतृत्व के निर्देशों और संगठनात्मक अनुशासन के विपरीत माना है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि योगेंद्र साव के खिलाफ अभी केवल कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है। कांग्रेस की ओर से इस मामले में अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई का फैसला अभी सामने नहीं आया है।

कांग्रेस ने तीन दिन में मांगा जवाब
अनुशासन समिति ने साव को तीन दिनों के भीतर अपना लिखित पक्ष रखने का निर्देश दिया है। इसके अलावा उन्हें समिति के सामने स्वयं उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। नोटिस में पार्टी संविधान के तहत संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा गया है। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा के मुताबिक, पार्टी में नेताओं को अपने विचार रखने की स्वतंत्रता है, लेकिन संगठनात्मक अनुशासन का पालन भी जरूरी है।

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मार्च में भी हुई थी कार्रवाई
योगेंद्र साव इससे पहले मार्च 2026 में भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गठबंधन सरकार के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी को लेकर कांग्रेस की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उस समय कांग्रेस ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तीन साल के लिए निष्कासित किया था। उनके खिलाफ कार्रवाई उनके सार्वजनिक बयानों को पार्टी विरोधी और गठबंधन विरोधी मानते हुए की गई थी। इसके बाद जून 2026 में प्रदेश कांग्रेस ने उनका निष्कासन रद्द कर दिया और उनकी पार्टी में वापसी हुई। पार्टी की ओर से उस समय उनके लंबे संगठनात्मक योगदान को फैसले के कारणों में शामिल बताया गया था।

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वापसी के बाद फिर अनुशासन का मामला
निष्कासन रद्द होने के कुछ महीनों बाद ही योगेंद्र साव के खिलाफ फिर कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है। कांग्रेस की अनुशासन समिति ने नोटिस में पूर्व की कार्रवाई का भी उल्लेख किया है और हालिया बयान को गंभीरता से लिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर नजर इस बात पर है कि योगेंद्र साव तीन दिनों के भीतर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और कांग्रेस अनुशासन समिति उनके जवाब पर क्या फैसला लेती है।

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अंतिम फैसला अभी बाकी
फिलहाल कांग्रेस ने योगेंद्र साव से जवाब मांगा है। नोटिस जारी होना अपने आप में अंतिम अनुशासनात्मक फैसला नहीं है। साव का लिखित स्पष्टीकरण और समिति के समक्ष उनका पक्ष सामने आने के बाद ही कांग्रेस की ओर से आगे की कार्रवाई तय होगी। झारखंड में कांग्रेस और झामुमो के गठबंधन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर कांग्रेस नेता की सार्वजनिक टिप्पणी ने इस मामले को राजनीतिक रूप से भी चर्चा में ला दिया है। झामुमो की ओर से भी साव के बयान पर आपत्ति जताए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।

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