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JPSC छात्र आंदोलन पर सरकार की पहल, छात्रों से बातचीत के लिए बनेगी हाई लेवल कमेटी

JSSC CGL

CM हेमंत सोरेन के रांची लौटते ही तेज हुई कवायद, आंदोलन खत्म कराने के लिए जल्द शुरू हो सकती है वार्ता

रांची: 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच राज्य सरकार अब समाधान की दिशा में पहल करती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सोमवार को बेंगलुरु से रांची लौटने के बाद सरकार ने आंदोलनरत छात्रों से संवाद स्थापित करने के लिए उच्चस्तरीय कमेटी के गठन पर विचार शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य छात्रों की मांगों को सुनना, उनकी चिंताओं को समझना और बातचीत के माध्यम से आंदोलन का शांतिपूर्ण समाधान निकालना है।

कमेटी में मंत्री, वरिष्ठ IAS अधिकारी और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि हो सकते हैं शामिल
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित कमेटी में राज्य सरकार के दो मंत्री, कैबिनेट सचिवालय सह गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अपर मुख्य सचिव, तीन अन्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को शामिल किए जाने पर विचार किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि विभिन्न पक्षों की भागीदारी से छात्रों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित किया जाए और विवाद का समाधान निकाला जाए।

मंगलवार या बुधवार से शुरू हो सकती है वार्ता
सरकार की योजना है कि आंदोलन लंबा खिंचने से पहले छात्रों को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किए जाने का भरोसा दिया जाए। इसी उद्देश्य से जल्द औपचारिक वार्ता शुरू करने की तैयारी चल रही है। सूत्रों के अनुसार, मंगलवार या बुधवार को प्रस्तावित कमेटी आंदोलनरत छात्रों से बातचीत कर सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।

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अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठे हैं अभ्यर्थी
JPSC की 14वीं पीटी परीक्षा में कथित गड़बड़ी के विरोध में अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरना और सत्याग्रह पर बैठे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच शामिल है। आंदोलन के दौरान मशाल जुलूस और विभिन्न विरोध कार्यक्रम भी आयोजित किए जा चुके हैं।

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JSSC CGL जांच पर पूर्व महाधिवक्ता ने उठाए सवाल
इधर, झारखंड के पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार ने JSSC CGL परीक्षा-2023 के कथित पेपर लीक मामले की CID जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अभ्यर्थियों के नाम जारी अपने संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार, JSSC और CID ने जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों को सार्वजनिक नहीं किया है। उन्होंने जांच प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार या CID की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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छात्रों और सरकार के बीच बातचीत पर टिकी निगाहे
JPSC परीक्षा विवाद और JSSC CGL जांच को लेकर राज्य में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज है। ऐसे में प्रस्तावित उच्चस्तरीय कमेटी और छात्रों के बीच होने वाली संभावित वार्ता को इस पूरे विवाद के समाधान की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। यदि बातचीत सकारात्मक रहती है, तो लंबे समय से जारी छात्र आंदोलन के समाधान की संभावना बन सकती है।

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JPSC जांच और आंदोलन से बढ़ा राजनीतिक दबाव
JPSC की 14वीं पीटी परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच राज्य में राजनीतिक माहौल भी लगातार गर्म होता जा रहा है। एक ओर CID परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर जांच का दायरा बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न छात्र संगठनों, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों का जवाब देना और दूसरी ओर आंदोलनरत छात्रों के भरोसे को कायम रखते हुए जल्द से जल्द समाधान निकालना। ऐसे में प्रस्तावित उच्चस्तरीय कमेटी की भूमिका पूरे विवाद के समाधान में अहम मानी जा रही है।

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