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हजारीबाग में आदित्य साहू ने MMDR संशोधन का किया बचाव, कोयला और खनिज राजस्व को लेकर सरकार पर लगाए आरोप

Aditya Sahu MMDR Amendmentv

हजारीबाग: खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) यानी MMDR संशोधन अधिनियम 2026 को लेकर झारखंड में राजनीतिक बयानबाजी तेज है। सोमवार को हजारीबाग परिसदन में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने प्रेसवार्ता कर केंद्र सरकार के संशोधन का पक्ष रखा और झारखंड सरकार पर कई आरोप लगाए। आदित्य साहू ने कहा कि भाजपा राज्यभर में MMDR कानून को लेकर जागरूकता अभियान चला रही है। पार्टी ने 19 से 30 सितंबर तक प्रेसवार्ता, नुक्कड़ सभाओं और प्रखंड स्तर पर चर्चा के जरिए कानून के प्रावधानों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की बात कही है।

कोयला चोरी और टैक्स को लेकर सरकार पर आरोप
प्रेसवार्ता के दौरान आदित्य साहू ने राज्य सरकार पर कोयले की चोरी और टैक्स चोरी से जुड़े आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कोयले की चोरी की जा रही है और इसके लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं। साहू ने दावा किया कि MMDR संशोधन के बाद अवैध खनन और खनिज संपदा से जुड़ी अनियमितताओं पर नियंत्रण में मदद मिलेगी। इससे पहले भी वह MMDR कानून को लेकर राज्य सरकार और विपक्षी दलों पर आरोप लगा चुके हैं। हालांकि, कोयला चोरी और टैक्स चोरी से जुड़े उनके आरोपों को भाजपा नेता के राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

खनिज संपदा पर केंद्र की भूमिका का किया बचाव
MMDR संशोधन का बचाव करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों में मौजूद खनिज संपदा को केवल किसी एक राज्य तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने केंद्र सरकार की भूमिका को राष्ट्रीय स्तर पर खनिज संसाधनों के प्रबंधन और नियमन से जोड़ते हुए संशोधन को उचित बताया। भाजपा पहले भी दावा करती रही है कि संशोधन के बावजूद राज्यों के रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) और GST से जुड़े हित सुरक्षित हैं। पार्टी का कहना है कि कानून से खनन क्षेत्र में पारदर्शिता, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है।

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MMDR कानून पर झारखंड में सियासी टकराव
MMDR संशोधन को लेकर झारखंड में भाजपा और सत्तारूढ़ दलों के बीच लगातार राजनीतिक मतभेद सामने आ रहे हैं। भाजपा जहां संशोधन को राज्य के हित में बता रही है, वहीं झामुमो और कांग्रेस इसके प्रावधानों को लेकर आपत्ति जता रहे हैं। कांग्रेस की ओर से हजारीबाग में आयोजित प्रेसवार्ता में संशोधन को राज्यों के अधिकारों और खनिज संसाधनों से जुड़े हितों के लिए चिंता का विषय बताया गया था। दूसरी ओर, भाजपा का कहना है कि विपक्ष कानून को लेकर भ्रम पैदा कर रहा है।

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राज्य के खनिज राजस्व को लेकर भी बहस
MMDR संशोधन का मुद्दा केवल खनन व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के राजस्व और खनिज संसाधनों से मिलने वाली आय को लेकर भी बहस का विषय बना हुआ है। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सितंबर में कहा था कि MMDR Amendment Act और GST से जुड़े बदलावों के कारण राज्य को संभावित राजस्व नुकसान की चिंता है। उन्होंने राजस्व संग्रह बढ़ाने और संभावित लीकेज को रोकने के निर्देश भी दिए थे। वहीं, भाजपा का तर्क है कि संशोधन के बावजूद राज्यों के राजस्व हित प्रभावित नहीं होंगे। आदित्य साहू ने भी पार्टी के इसी पक्ष को आगे रखते हुए कानून के बारे में लोगों को जानकारी देने की बात कही है।

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30 सितंबर तक चलेगा भाजपा का जागरूकता अभियान
भाजपा ने MMDR कानून को लेकर 19 से 30 सितंबर तक राज्यव्यापी जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा की है। पार्टी के मुताबिक इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस, प्रखंड मुख्यालयों पर कार्यक्रम, नुक्कड़ सभाएं और गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। आदित्य साहू के अनुसार, अभियान के जरिए लोगों को कानून के प्रावधानों और भाजपा के पक्ष की जानकारी दी जाएगी। पार्टी ने यह भी कहा है कि वह विपक्ष की ओर से कानून को लेकर किए जा रहे दावों का जवाब देगी। फिलहाल MMDR संशोधन 2026 को लेकर झारखंड में राजनीतिक बहस जारी है। एक तरफ भाजपा इसे खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और अवैध खनन पर नियंत्रण से जोड़ रही है, जबकि राज्य सरकार और विपक्षी दल इसके राजस्व तथा राज्यों के अधिकारों पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इन राजनीतिक दावों के बीच कानून के वास्तविक प्रावधानों और उनके प्रभाव को लेकर सार्वजनिक चर्चा भी जारी है।

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