डेमोक्रेट्स ने जीता कांग्रेस का कंट्रोल, ट्रंप बोले- ‘Mr. Veto’; अब कैसे चलेगी अमेरिका की सियासत?
ट्रंप बोले- वीटो से समझौते का रास्ता खुलेगा
वॉशिंगटन: अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगने और डेमोक्रेटिक पार्टी के कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल करने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना अगला राजनीतिक रुख साफ करने के संकेत दिए हैं। चुनावी नतीजों के बाद ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों के जरिए राष्ट्रपति के वीटो अधिकार को प्रमुखता से सामने रखा है। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर साझा की, जिसमें वह डेस्क के ऊपर झुके हुए नजर आ रहे हैं। तस्वीर के साथ उन्होंने “MR. VETO” लिखा। यह पोस्ट ऐसे समय आई है जब डेमोक्रेट्स हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों पर नियंत्रण हासिल कर चुके हैं।
चुनावी हार के बाद ट्रंप का ‘Mr. Veto’ संदेश
ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके थे कि अगर डेमोक्रेट्स कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल करते हैं तो वह खुद को “Mr. Veto” के रूप में पेश करेंगे। चुनाव से पहले एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि डेमोक्रेट्स की ओर से आने वाले विधेयकों को वह वीटो कर सकते हैं और बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना बन सकती है। चुनाव के बाद ट्रंप ने भी वीटो अधिकार को अपनी रणनीति के प्रमुख हिस्से के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के पास मौजूद वीटो एक मजबूत अधिकार है और इसका इस्तेमाल वह डेमोक्रेटिक कांग्रेस द्वारा भेजे जाने वाले कानूनों के मामले में कर सकते हैं।
डेमोक्रेट्स के हाथ में कांग्रेस के दोनों सदन
2026 के मध्यावधि चुनाव के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इससे राष्ट्रपति ट्रंप के सामने अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए एक अलग तरह की राजनीतिक चुनौती पैदा हुई है। NPR और CBS News की रिपोर्टों के अनुसार, डेमोक्रेट्स हाउस और सीनेट दोनों में बहुमत हासिल करने में सफल रहे हैं। इस बदले राजनीतिक समीकरण का मतलब है कि ट्रंप प्रशासन को आने वाले समय में कांग्रेस में डेमोक्रेटिक बहुमत के साथ काम करना होगा। डेमोक्रेट्स अब कानून बनाने के साथ-साथ प्रशासन की नीतियों और कामकाज पर कांग्रेस के अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए निगरानी बढ़ा सकते हैं।
आखिर कितना ताकतवर है राष्ट्रपति का वीटो?
अमेरिकी संविधान के तहत राष्ट्रपति के पास कांग्रेस द्वारा पारित विधेयक को वीटो करने का अधिकार है। हालांकि यह अधिकार पूर्ण नहीं है। अगर कांग्रेस के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत किसी विधेयक के पक्ष में हो तो राष्ट्रपति के वीटो को ओवरराइड किया जा सकता है। यानी डेमोक्रेट्स के पास दोनों सदनों में बहुमत होने के बावजूद हर विधेयक को राष्ट्रपति की आपत्ति के बावजूद कानून में बदलने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत होना अलग सवाल है। इसी वजह से ट्रंप का वीटो अधिकार अगले राजनीतिक दौर में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
ट्रंप बोले- वीटो से समझौते का रास्ता खुलेगा
ट्रंप ने अपने बयानों में सिर्फ विधेयकों को रोकने की बात नहीं की, बल्कि वीटो के जरिए बातचीत और समझौते की संभावना का भी संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि यदि डेमोक्रेट्स ऐसे विधेयक भेजते हैं जिन्हें वह स्वीकार नहीं करते तो वह उन्हें वीटो कर सकते हैं और लगातार वीटो के बाद दोनों पक्ष किसी समझौते तक पहुंच सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच टकराव के साथ-साथ राजनीतिक सौदेबाजी की स्थिति भी बन सकती है।
ट्रंप ने चुनाव परिणाम स्वीकारने की बात भी कही
मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि वह चुनाव परिणाम स्वीकार करेंगे और डेमोक्रेट्स के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि डेमोक्रेट्स ने अच्छा प्रदर्शन किया। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने वीटो अधिकार को अपनी राजनीतिक ताकत के तौर पर सामने रखा। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह चुनावी हार को व्यक्तिगत हार के तौर पर नहीं देखते, क्योंकि वह खुद इस चुनाव में मतपत्र पर उम्मीदवार नहीं थे।
आगे क्या होगा?
अब अमेरिकी राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप प्रशासन और डेमोक्रेटिक बहुमत वाली कांग्रेस के बीच संबंध किस दिशा में जाते हैं। डेमोक्रेट्स के पास कानून बनाने और कांग्रेस की निगरानी संबंधी शक्तियां होंगी, जबकि राष्ट्रपति के पास वीटो और कार्यकारी अधिकार मौजूद रहेंगे। ऐसे में ट्रंप का “Mr. Veto” संदेश आने वाले विधायी संघर्ष की ओर संकेत करता है। हालांकि वीटो के बाद भी कांग्रेस के पास संवैधानिक प्रक्रिया के तहत दो-तिहाई बहुमत से उसे पलटने का विकल्प मौजूद रहेगा। इस तरह 2026 के मध्यावधि चुनाव के बाद अमेरिका में सत्ता का संतुलन बदल गया है। एक तरफ कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक नियंत्रण है, तो दूसरी तरफ व्हाइट हाउस में ट्रंप राष्ट्रपति के रूप में अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करने की तैयारी का संकेत दे रहे हैं। आने वाले महीनों में कानून, जांच और कार्यकारी शक्तियों को लेकर व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच टकराव तथा समझौते—दोनों की संभावनाएं बनी रहेंगी।
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