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87.5 MT उत्पादन तक पहुंचा CCL, खनन से सौर ऊर्जा और CSR तक बदली तस्वीर

CCL coal production

मेगा खनन परियोजनाओं, रेल कॉरिडोर, आधुनिक तकनीक और सौर ऊर्जा पर जोर

वित्तीय प्रदर्शन से सामाजिक योजनाओं तक कंपनी ने बढ़ाया दायरा

रांची: सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड यानी CCL ने पिछले एक दशक में कोयला उत्पादन के साथ-साथ खनन तकनीक, कोयला निकासी, रेल अवसंरचना, कोकिंग कोयला, नवीकरणीय ऊर्जा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में अपने काम का विस्तार किया है। कोयला मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का उत्पादन वित्त वर्ष 2013-14 के करीब 50 मिलियन टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 87.5 मिलियन टन तक पहुंच गया। यह लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि है। कोयला क्षेत्र के आधिकारिक आंकड़े और रिपोर्ट मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

मेगा परियोजनाओं से बढ़ी उत्पादन क्षमता
CCL के उत्पादन विस्तार में नई और बड़ी खनन परियोजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अमरापाली, मगध, चंद्रगुप्त ओपनकास्ट परियोजना और कोट्रे बसंतपुर पचमो जैसी परियोजनाओं ने कंपनी की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में योगदान दिया है। इसके साथ ही कारो, कोनार और उत्तरी उरीमारी जैसे क्षेत्रों में भी खनन क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम किया गया है। कंपनी की ओर से कई नई परियोजनाओं और विस्तार योजनाओं पर भी काम जारी है। देश के कुल कोयला उत्पादन में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। कोयला मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल कोयला उत्पादन 1,047.523 मिलियन टन रहा, जो इससे पिछले वित्त वर्ष के 997.826 मिलियन टन से करीब 4.98 प्रतिशत अधिक था।

उत्पादन बढ़ा तो निकासी के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर भी बढ़ा
कोयला उत्पादन बढ़ने के साथ उसकी तेज और व्यवस्थित निकासी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी को देखते हुए CCL ने रेल नेटवर्क, Coal Handling Plant यानी CHP, साइलो, फास्ट लोडिंग सिस्टम और First Mile Connectivity जैसी परियोजनाओं पर जोर दिया है। उत्तरी करणपुरा क्षेत्र में तोरी-शिवपुर रेल कॉरिडोर को कोयला परिवहन क्षमता बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जाता है। वहीं उत्तरी उरीमारी में 7.5 MTY क्षमता वाले CHP के संचालन के साथ अन्य क्षेत्रों में भी कोल हैंडलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। CCL की यह रणनीति उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खदान से कोयला उपभोक्ता तक पहुंचाने की क्षमता को मजबूत करने पर केंद्रित है।

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कोकिंग कोयले पर भी फोकस
स्टील उद्योग के लिए कोकिंग कोयला महत्वपूर्ण कच्चा माल है। इसी जरूरत को देखते हुए CCL की ओर से कोकिंग कोयले की गुणवत्ता और उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। कंपनी पांच नई कोकिंग कोल वाशरियां विकसित कर रही है, जिनकी कुल प्रस्तावित क्षमता 14.50 MTY बताई गई है। इसका उद्देश्य घरेलू स्तर पर गुणवत्तापूर्ण धुले कोकिंग कोयले की उपलब्धता बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करने के राष्ट्रीय प्रयासों में योगदान देना है। कोयला मंत्रालय ने भी देश में घरेलू कच्चे कोकिंग कोयले का उत्पादन बढ़ाने और वाशिंग क्षमता के विस्तार को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का घरेलू कच्चा कोकिंग कोयला उत्पादन 59.6 मिलियन टन रहा।

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AI और आधुनिक तकनीक से बदल रहा खनन
CCL ने खनन कार्यों में तकनीक के इस्तेमाल को भी बढ़ाया है। कंपनी की ओर से AI आधारित Integrated Command and Control Centre जैसी प्रणालियों का इस्तेमाल निगरानी और सुरक्षा के लिए किया जा रहा है। सतही खनन उपकरणों और Continuous Miner जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है। इन तकनीकों का उद्देश्य उत्पादन प्रक्रिया को अधिक तकनीक आधारित बनाना और खनन कार्यों में सुरक्षा तथा दक्षता बढ़ाना है। कोयला क्षेत्र में तकनीकी बदलाव के साथ डिजिटल निगरानी और डेटा आधारित ऑपरेशन का महत्व भी बढ़ रहा है।

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सौर ऊर्जा में भी बढ़ा CCL का कदम
CCL अब केवल कोयला उत्पादन तक सीमित नहीं है। कंपनी ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। कंपनी के पास 32 मेगावाट से अधिक स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता होने की जानकारी दी गई है। वहीं गिरिडीह में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के साथ 100 मेगावाट क्षमता की मेगा सौर परियोजना निर्माणाधीन है। इसके अलावा खनन क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन, पौधरोपण, ओवरबर्डन का वैज्ञानिक पुनर्स्थापन और खदान सुधार जैसी गतिविधियों पर भी काम किया जा रहा है। यह बदलाव कोयला कंपनियों के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसमें पारंपरिक खनन गतिविधियों के साथ पर्यावरणीय प्रबंधन और वैकल्पिक ऊर्जा क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

वित्तीय प्रदर्शन में भी बड़ा बदलाव
उत्पादन विस्तार के साथ CCL के वित्तीय प्रदर्शन में भी वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कंपनी का कर पश्चात लाभ यानी PAT वित्त वर्ष 2017-18 में 808 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 4,035 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में कंपनी की नेटवर्थ भी 3,816 करोड़ रुपये से बढ़कर 16,464 करोड़ रुपये तक पहुंचने की जानकारी दी गई है। इस तरह उत्पादन क्षमता के विस्तार के साथ कंपनी की वित्तीय स्थिति में भी उल्लेखनीय बदलाव दर्ज हुआ है।

CSR पर भी बढ़ा जोर
CCL के विस्तार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सामाजिक विकास से जुड़ी योजनाएं भी हैं। कंपनी ने शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य और स्थानीय समुदायों से जुड़े CSR कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने CSR के तहत करीब 86 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि लक्ष्य लगभग 74 करोड़ रुपये का बताया गया है।

‘CCL के लाल’ और ‘CCL की लाडली’
शिक्षा के क्षेत्र में ‘CCL के लाल’ और ‘CCL की लाडली’ जैसी योजनाएं चर्चा में रही हैं। इन योजनाओं के तहत विद्यार्थियों को आवासीय शिक्षा और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। रांची के खेलगांव में झारखंड सरकार के सहयोग से संचालित खेल अकादमी के जरिए युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, शिक्षा और जीवन कौशल विकास का अवसर भी दिया जा रहा है। कोयला मंत्रालय की रिपोर्टों में CCL समेत कोल इंडिया की सहायक कंपनियों के CSR खर्च और गतिविधियों का विवरण दर्ज है।

कोयला कंपनी से बहुआयामी ऊर्जा संस्थान की ओर
पिछले एक दशक में CCL का विस्तार केवल उत्पादन के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा। खदानों की क्षमता बढ़ाने के साथ कंपनी ने रेल कनेक्टिविटी, कोयला निकासी, वाशरी, डिजिटल निगरानी, आधुनिक खनन तकनीक, सौर ऊर्जा, पर्यावरण प्रबंधन और CSR जैसे क्षेत्रों में भी अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। 2013-14 में करीब 50 मिलियन टन उत्पादन से 2024-25 में 87.5 मिलियन टन तक पहुंचना इस बदलाव का एक प्रमुख संकेतक है। अब आने वाले वर्षों में नई खनन परियोजनाओं, कोकिंग कोल वाशरियों, फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के जरिए CCL की आगे की दिशा तय होगी।

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