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JPSC-JSSC सुधार पर फिर गरजे छात्र, 7 अक्टूबर तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो महाजुटान

Exam Reform

रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छात्रों ने परीक्षा कैलेंडर, आयोगों में खाली पद भरने और अमिताभ कौशल कमेटी के पूर्ण गठन समेत कई मांगें उठाईं

रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, नियमित नियुक्ति और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्रों ने रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। छात्र प्रतिनिधियों ने सरकार से परीक्षा सुधार को लेकर किए गए फैसलों को तेजी से लागू करने की मांग की और कहा कि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। छात्र प्रतिनिधियों हर्षित सिंह और खूंटी की अभ्यर्थी निषाद प्रवीण ने कहा कि आंदोलन स्थगित करने के दौरान परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में कमेटी बनाने की बात कही गई थी। छात्रों का आरोप है कि करीब दो महीने बाद भी कमेटी का पूर्ण स्वरूप और सदस्यों की नियुक्ति स्पष्ट नहीं है। सरकार ने 18 अगस्त को अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार समिति बनाने की घोषणा की थी। बाद की रिपोर्टों में भी यह सामने आया कि अध्यक्ष तय होने के बावजूद समिति की पूरी टीम के गठन में देरी हुई।

JPSC अध्यक्ष और बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति की मांग
छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि 22 जुलाई को JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते के इस्तीफे के बाद आयोग में नेतृत्व से जुड़े पदों को लेकर स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। खियांग्ते का इस्तीफा परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर CID जांच के बीच हुआ था। छात्रों का कहना है कि आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली रहने से परीक्षा प्रक्रिया, साक्षात्कार और परीक्षा कैलेंडर प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से रिक्त पदों पर जल्द नियुक्ति की मांग की।

UPSC की तर्ज पर वार्षिक परीक्षा कैलेंडर की मांग
प्रतियोगी छात्रों ने JPSC और JSSC के लिए UPSC की तर्ज पर वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि परीक्षा की तारीख, आवेदन, प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा, इंटरव्यू और अंतिम परिणाम की प्रक्रिया को पहले से निर्धारित किया जाना चाहिए। छात्रों ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में लंबे अंतराल के कारण अभ्यर्थियों को लगातार अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है।

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प्रीलिम्स से लेकर इंटरव्यू तक बदलाव की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों ने परीक्षा के अलग-अलग चरणों में सुधार के लिए कई सुझाव रखे। इनमें प्रीलिम्स में ई-ऑप्शन और नेगेटिव मार्किंग, श्रेणीवार कटऑफ और मार्कशीट जारी करना तथा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के बाद मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए कम से कम 90 दिन का समय देने की मांग शामिल है। छात्रों ने मुख्य परीक्षा में ऑब्जेक्टिव प्रश्नों की जगह शॉर्ट आंसर आधारित प्रश्नों को शामिल करने और परीक्षा में झारखंड से जुड़े विषयों को प्राथमिकता देने की मांग भी रखी।

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क्षेत्रीय भाषाओं और कॉपियों की जांच पर भी जोर
अभ्यर्थियों ने क्षेत्रीय भाषाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में स्केलिंग पैटर्न लागू करने की मांग की। इसके साथ ही उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गोपनीयता सुनिश्चित करने की बात कही गई। छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे अभ्यर्थियों को मूल्यांकन प्रक्रिया पर भरोसा रहे।

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इंटरव्यू देने वालों के लिए भी रोजगार को लेकर मांग
छात्रों ने ऐसी व्यवस्था की मांग की है जिसके तहत इंटरव्यू तक पहुंचने लेकिन अंतिम मेरिट सूची में जगह नहीं बना पाने वाले अभ्यर्थियों को अन्य सरकारी भर्तियों में प्राथमिकता देने पर विचार किया जाए। इसके अलावा छात्रों ने UPPSC की तर्ज पर प्रीमियम सर्विसेज लागू करने और छात्र-सम्बंधित मामलों में अदालत में सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी करने की मांग भी रखी।

22 से ज्यादा परीक्षाओं को लेकर उठा सवाल
छात्र प्रतिनिधियों ने पिछले दिनों भर्ती परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं और जांच के बाद परीक्षाओं को रद्द किए जाने का मुद्दा भी उठाया। अगस्त में राज्य सरकार ने JPSC-JSSC परीक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ कई परीक्षाओं और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं पर कार्रवाई की घोषणा की थी। सरकार ने परीक्षा सुधार समिति, आंतरिक निगरानी व्यवस्था और अन्य सुधारों की बात कही थी। छात्रों का कहना है कि सिर्फ परीक्षाएं रद्द करना समाधान नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी जिससे भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल न उठें।

7 अक्टूबर के बाद ‘छात्र महाजुटान’ की चेतावनी
छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि 7 अक्टूबर तक अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली सुधार समिति का पूर्ण गठन और JPSC अध्यक्ष व सदस्यों के रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं होती है, तो इसके बाद पूरे झारखंड से छात्रों को जुटाकर ‘छात्र महाजुटान’ आयोजित किया जाएगा। छात्रों का कहना है कि इस महाजुटान के जरिए भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा सुधार और प्रतियोगी अभ्यर्थियों से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से रखा जाएगा। फिलहाल छात्रों की मांगों और सरकार की ओर से परीक्षा सुधार को लेकर उठाए गए कदमों के बीच आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है। अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली समिति को लेकर सरकार की घोषणा हो चुकी है, लेकिन उसके पूर्ण गठन और कार्यप्रणाली को लेकर छात्रों की आपत्ति बनी हुई है।

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